Chhattisgarh

मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन 16 दिसंबर को राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर होगा

रायपुर 13 दिसंबर 2019 /भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन आगामी 16 दिसंबर 2019 को छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिलों के मतदान केंद्रों पर किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 16 दिसंबर 2019 को प्रारंभिक प्रकाशन के साथ ही 16 दिसंबर 2019 से 15 जनवरी 2020 तक राज्य के सभी मतदान केंद्रों में दावा- आपत्ति प्राप्त किए जाएंगे। इस अवधि में दावा- आपत्ति प्राप्त करने के लिए मतदान केंद्रों पर उपस्थित अभिहित अधिकारी तैनात रहेंगे, जो मतदाता सूची में नाम जोड़ने ,नाम हटाने और संशोधन के लिए कार्यवाही करेंगे। ऐसे भारतीय नागरिक जिनकी उम्र 1 जनवरी 2020 को 18 वर्ष पूर्ण होगी और ऐसे भारतीय नागरिक जिनका नाम अभी तक किसी कारणवश मतदाता सूची में नहीं जुड़ा है ,उन्हें अपना नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए फार्म- 6 और संबंधित दस्तावेज की छाया प्रति जमा करना होगा।मतदाता सूची में किसी प्रकार की त्रुटि जैसे नाम, सरनेम, आयु, लिंग, जन्मतिथि, फोटो या अन्य प्रकार की त्रुटि को सुधारने के लिए फार्म- 8 भरा जा सकेगा, वही मतदाता सूची से नाम विलोपन अर्थात नामहटाने के लिए फार्म -7 भरा जाना होगा। मतदाता सूची के प्रारंभिक प्रकाशन अवधि में मतदाता अपने निर्धारित मतदान केंद्र पर जाकर मतदाता सूची में अपना नाम का अवलोकन कर सकते हैं। बताया गया है कि दिव्यांग निशक्तजन श्रेणी के मतदाताओं से फार्म- 6 के द्वारा प्राप्त जानकारी को मतदाता डेटाबेस में दिव्यांगजन की श्रेणी के साथ प्रविष्टि की जाएगी। राज्य के ऐसे मतदाता इसके अलावा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय छत्तीसगढ़ के वेबसाइट *www.ceochhattisgarh.nic.in* के माध्यम से भी मतदाता सूची में अपना नाम देख सकते हैं। किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा शिकायत के लिए राज्य सूचना केंद्र रायपुर में स्थापित टोल फ्री नंबर *1800 23311 950* और जिलों में स्थापित कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर *1950* में भी संपर्क किया जा सकता हैं। फोटोयुक्त निर्वाचक नामावली के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अहर्ता तिथि 1 जनवरी 2020 के पुनरीक्षण कार्यक्रम के संबंध में यह बताया गया है कि 16 दिसंबर 2019 सोमवार को मतदाता सूची के प्रारंभिक प्रकाशन के बाद 16 दिसंबर2029 से 15 जनवरी 2020 की अवधि तक दावे -आपत्ति प्राप्त किए जाएंगे। इसके बाद 27 जनवरी 2020 सोमवार को दावे आपत्तियों के निराकरण की तारीख निर्धारित की गई है‌। मतदाता सूची के पूरक सूची की तैयारी4 फरवरी 2020 को जाएगी।निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 7 फरवरी 2020 शुक्रवार को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।

Politics

शरद पवार का रुख़ अपने भतीजे अजित पवार को लेकर साफ़ नहीं

मुम्बई 25 नवम्बर । महाराष्ट्र में अचानक हुई सियासी उठापटक के बीच, जो शख़्स सबसे ज़्यादा चर्चा के में है, वो हैं अजित पवार. अजित पवार शिव सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस के सत्ता तक पहुंचने के बीच में वो दीवार बनकर आए जिसने बीजेपी के लिए सरकार बनाने का रास्ता बना दिया. शनिवार सुबह देवेंद्र फडणवीस के सीएम और अजित पवार के उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ये सवाल बार-बार उठ रहे हैं कि अजित पवार क्या अलग पार्टी बनाएंगे और एनसीपी उन्हें लेकर क्या फ़ैसला लेगी. एनसीपी प्रमुख शरद पवार का रुख़ भी अपने भतीजे अजित पवार को लेकर साफ़ नहीं है. उन्होंने शनिवार को कहा कि उनके भतीजे अजित पवार ने राज्यपाल को गुमराह किया है. उनके पास ज़रूरी विधायकों का समर्थन नहीं है. अजित पवार का ये क़दम दल-बदल क़ानून के तहत आता है और उन्होंने अनुशासनहीनता की है. इसके बाद अजित पवार को विधायक दल के नेता के पद से भी हटा दिया गया. लेकिन, मीडिया में अजित पवार को मनाने की ख़बरें भी आती रहीं. अजित पवार ने ट्वीटर पर लिखा कि वो एनसीपी के ही सदस्य हैं और शरद पवार उनके नेता हैं. उन्होंने अपना प्रोफाइल भी बदलकर उप-मुख्यमंत्री कर लिया है. शरद पवार ने भी एक ट्वीट किया और ये साफ़ कर दिया कि एनसीपी बीजेपी के साथ नहीं जाएगी. उन्होंने लिखा, बीजेपी के साथ गठबंधन करने का सवाल ही पैदा नहीं होता. एनसीपी ने सर्वसम्मति से शिव सेना और कांग्रेस के साथ जाने का फ़ैसला लिया है. अजित पवार लोगों को उलझन में डालने के लिए गुमराह कर रहे हैं. इन सभी कड़ी बातों के बावजूद भी शरद पवार ने अजित पवार को पार्टी से बाहर नहीं निकाला. अब भी अजीत पवार एनसीपी के सदस्य हैं. ऐसे ही दूसरे उदाहरण भी हैं जब पार्टियों ने अपने बाग़ी विधायकों के विरोध के बावजूद सदस्यता वापस नहीं ली. बीजेपी ने ही शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा और कीर्ति आज़ाद के पार्टी के ख़िलाफ़ लगातार बोलने के बावजूद भी उन्हें पार्टी से नहीं निकाला था. इसी के अलग-अलग पक्षों को जानने के लिए  नवीन नेगी ने बात की शिमला की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर चंचल सिंह से- क्या है वजह शरद पवार के अजित पवार को पार्टी से न निकालने के पीछे की एक बड़ी वजह दल-बदल क़ानून के प्रावधान हैं. ये प्रावधान कहते हैं कि दल-बदल क़ानून तभी लागू हो सकता है जब कोई निर्वाचित विधायक पार्टी का सदस्य हो. अगर कोई पार्टी अपने किसी निर्वाचित सदस्य को निष्कासित करती है यानी पार्टी से बाहर निकाल देती है तो 10वीं सूची कहती है कि उस पर दल-बदल क़ानून लागू नहीं होगा. अगर अजित पवार दो तिहाई सदस्यों को अपने साथ नहीं जोड़ पाते हैं तो उन पर अपने आप ये क़ानून लागू हो जाएगा. अगर किसी पार्टी के दो तिहाई सदस्य अलग हो जाते हैं या किसी अन्य पार्टी में विलय कर लेते हैं तो उस मामले में दल-बदल क़ानून लागू नहीं होता. ऐसे में अजित पवार को दो तिहाई विधायकों का बहुमत चाहिए होगा. दल-बदल क़ानून अनिवार्य होता है और किसी राजनीतिक पार्टी की इच्छा पर भी निर्भर नहीं करता है. जैसे कि अगर एनसीपी अजित पवार पर दल-बदल क़ानून के तहत कार्रवाई न भी चाहे तो भी ये क़ानून उन पर लागू होगा. इसलिए पार्टियां बाग़ी नेताओं से सदस्यता नहीं छीनतीं और उन नेताओं को किस मामले में विप जारी होने पर पार्टी के पक्ष में ही वोट डालना पड़ता है. लेकिन, उलझन अब भी है... संविधान में जो 10वीं सूची है उसके मुताबिक़ विधानसभा का कोई भी सदस्य (विधायक) अगर अपनी पार्टी की सदस्यता अपनी मर्ज़ी से छोड़ता है और दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है तो उस पर दल-बदल क़ानून लागू होता है. लेकिन, महाराष्ट्र के मामले में अब भी उलझन बाक़ी है क्योंकि चुनाव तो हो गया है पर अभी तक विधायकों ने विधानसभा सदस्य के तौर पर शपथ नहीं ली है. ऐसे में उन पर दल-बदल क़ानून लागू होगा या नहीं, इस पर स्थिति साफ़ नहीं है. ना तो 10वीं सूची में इस पर स्पष्टता है और ना ही सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे किसी मामले में कोई फ़ैसला दिया है. हालांकि, एक मामला रामेश्वर प्रसाद बनाम केंद्र सरकार का है जो इस मामले में संदर्भ का काम कर सकता है. रामेश्वर प्रसाद मामले में ये कहा गया था कि अनुच्छेद 172 के अनुसार बिहार विधानसभा के चुनाव हो जाने के बाद निर्वाचित सदस्यों ने शपथ नहीं ली है तो विधानसभा को भंग किया जा सकता है या नहीं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सदस्यता की शपथ ज़रूरी नहीं है और अनुच्छेद 172 और संविधान की अन्य नीति सम्मत धाराओं के अनुसार विधानसभा भंग की जा सकती है. इसके अनुसार अगर वर्तमान स्थिति देखी गई तो दल-बदल क़ानून बिना शपथ लिए भी लागू हो सकता है. हालांकि, दूसरे विधायकों को छोड़ दें तो क्योंकि अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री की शपथ ले ली है तो उन पर अब भी दल-बदल क़ानून लागू हो सकता है. इस संबंध में अंतिम फ़ैसला स्पीकर लेता है. लेकिन, महाराष्ट्र में दुविधा ये भी है कि न तो विधानसभा सदस्यों की पहली बैठक हुई है और न ही स्पीकर चुने गए हैं. अब इस मामले में फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट लेगा. अगर स्पीकर दल-बदल क़ानून पर कोई फ़ैसले लेता भी है तो उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. और कौन-से कारण वहीं, राजनीतिक हलकों में ये भी चर्चा है कि एनसीपी अजित पवार को इसलिए पार्टी से नहीं निकाल रही है क्योंकि उनके वापस आने की उम्मीद है. शनिवार को भी उन्हें मनाने के लिए कुछ क़रीबी नेता भेजे गए थे लेकिन अजित पवार नहीं माने. आगे भी ऐसी कोशिशें हो सकती हैं. अगर पार्टी से निकाल दिया गया तो वापसी के रास्ते भी बंद हो जाएंगे. साथ ही अजित पवार का खेमा भी अलग हो सकता है.

Sports

सेरेना विलियम्स की ताक़त का क्या राज है?

एकल ख़िताब में अपना 24वां ग्रैंड स्लैम जीतने के मुकाबले यूएस ओपेन 2019 में सेरेना विलियम्स का सफ़र कई मायनों में बहुत यादगार रहा है. ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज महिला खिलाड़ी मार्गरेट कोर्ट स्मिथ के 24वें ग्रैंड स्लैम ख़िताब के साथ आज सेरेना बराबरी पर खड़ी हैं. टेनिस के शीर्ष पर अपनी ताक़त को बरक़रार रखना दिलचस्प हैः ये वही टूर्नामेंट है जिसमें इस अमरीकी खिलाड़ी ने 20 साल पहले अपना पहला ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीता था. साल 1968 में इस खेल के व्यवसायीकरण के बाद से अब तक कोई भी पुरुष या महिला खिलाड़ी ऐसा नहीं है जिसने ओपन में लगातार ऐसा प्रदर्शन किया हो. उम्र की ढलान पर खेल का शिखर 37 साल और 11 महीने की उम्र में सेरेना विलियम्स ने टेनिस कैलेंडर के चार मुख्य टूर्नामेंटों (ऑस्ट्रेलियाई ओपन, फ्रेंच ओपन, विम्बलडन और यूएस ओपन) में से एक को जीता. और इस तरह वो ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज केन रोज़वाल के क़रीब पहुंच गई हैं जिन्होंने 37 साल दो महीने की उम्र में 1972 में ऑस्ट्रेलियाई ओपन जीता था. तारीफ़ की बात है कि किस तरह उन्होंने सितम्बर 1999 में मार्टिना हिंगिस पर न्यूयॉर्क में पहली जीत के बाद अपने सफ़र को आगे बढ़ाया. 1999 से 2010 तक उन्होंने 13 ग्रैंड स्लैम जीते. अगले 10 ग्रैंड स्लैम 2012 से 2017 के बीच उनके खाते में आए जब वो अपनी ज़िन्दगी के तीसरे दशक में दाखिल हो चुकी थीं. साल 2017 के अंत में जारी डब्लूटीए रैंकिंग में सेरेना फ़ेहरिस्त में शामिल 100 खिलाड़ियों में से उन तीन खिलाड़ियों में से एक थीं जो 30 साल के ऊपर के थे. सेरेना के ख़िलाफ़ कोर्ट में उतरने वाले खिलाड़ियों की औसत उम्र 25 साल है. एक नई शुरुआत गुरुवार को यूक्रेन की खिलाड़ी एलीना स्वेतोलिना को हराने के बाद सेरेना ने कहा, मैं इन अंकों के बारे में नहीं सोचती. मैं यहां जितना अच्छा हो सके वैसा प्रदर्शन करने आई हूं. 20 साल से यहां हूं और अब भी खेल रही हूं. पर उन्होंने ये दूसरी पारी की सफलता कैसे पाई? इसके पीछे दो मुख्य नाम हैं, पैट्रिक मोराटोग्लो और मेकी शिल्स्टन. पहला नाम वो फ़्रांसिसी कोच हैं जिन्हें सेरेना ने 2012 में फ्रेंच ओपन में पहली बार शुरुआती राउंड में ही हार के बाद चुना था. इस कोच ने इस अमरीकी खिलाड़ी के खेल को संवारने में मदद की. शिल्स्टन निजी ट्रेनर हैं जिन्होंने पहले भी सेरेना के साथ काम किया था. पर 2011 में जब सेरेना अपनी खराब सेहत से जूझ रही थीं तब शिल्स्टन ने उन्हें नयी दिशा दी. ये वही साल था जब सेरेना अपने फेफड़ों में एक खतरनाक क्लॉट और पैर में लगी चोट से जूझ रही थीं. मां बनना इस बीच सेरेना मां भी बनीं. इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है कि सेरेना अविजित ही रहीं. जनवरी 2017 में ऑस्ट्रेलियाई खिताब जीतने के बाद सेरेना ने लगातार अगले तीन ग्रैंड स्लैम के फाइनल हारे. नाओमी ओसाका से 2018 में यूएस ओपन में हार के बाद अंपायर कार्लोस रामोस पर गुस्सा निकालने और आगाह किये जाने ने उस मैच को एक अलग महत्त्व दे दिया. हालांकि, सेरेना 2019 में विम्बलडन फ़ाइनल में पहुंचीं लेकिन उन्हें इस साल एक टूर्नामेंट जीतना अभी भी बाकी है. आज वो विश्व रैंकिंग में आठवें स्थान पर हैं जो किसी प्लेयर के लिए काफी सम्मानजनक स्थान है, पर सेरेना के लिहाज़ से ये कम ही है. इस अमरीकी खिलाड़ी ने जब दो साल पहले ऑस्ट्रेलियाई ओपन जीता था तब वो दो माह की गर्भवती थीं जिसके बाद वो आठ माह तक अपनी बेटी अलेक्सिस ओलम्पिया ओहनियन जूनियर के जन्म के कारण खेल से दूर रहीं. 2018 में सेरेना ने वापसी की और फ्रेंच ओपन में पहला राउंड खेला. उस वक़्त सेरेना विश्व रैंकिंग में 451वें स्थान पर थीं. ये यात्रा किसी कविता से कम नहीं है, जिसमें वो न्यूयॉर्क में अपने 24वें खिताब तक पहुंचीं. साथ ही उन्होंने अपने पहले खिताब के ठीक 20 साल पूरे किए. ये फ्लशिंग मेडोस कॉम्प्लेक्स ही 2018 के उस लम्हे का साक्षी रहा जब अपने प्रशंसकों के सामने उनकी इमेज किसी खलनायिका सी हो गई थी. क्या ये ही वो जगह बनेगी जहाँ अपने 25वें खिताब की जीत के लिए सेरेना झुककर सबका अभिवादन करेंगी! कुछ कहा नहीं जा सकता, पर यकीनन अगले कुछ दिन उनके ज़ेहन में ये सब ज़रूर चलेगा.

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