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सिर्फ आतंक, पाक, घुसपैठियों के नाम पर वोट का कटोरा

सिर्फ आतंक, पाक, घुसपैठियों के नाम पर वोट का कटोरा

Date : 03-Apr-2019
हरिशंकर व्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सारे भाषण अब  आतंक, पाक के नाम पर वोट मांगने और विरोधियों को गाली दे कर अपने को चौकीदार बताने के हो गए है। अब नरेंद्र मोदी यह नहीं बताते है कि उन्होंने नीम कोटेड यूरिया का नियम बनाया तो उससे किसानों को कितना फायदा हुआ। बाकी मुद्रा योजना, जन धन खाते, शौचालय, आवास, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया आदि की बातें तो छोड़िए किसानों के खाते में दो-दो हजार रुपए भेजने की योजना का भी जिक्र नहीं हो रहा है। प्रचार की एकमात्र थीम राष्ट्रीय सुरक्षा की है। इससे भी प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों के नर्वस होने का अंदाजा लग रहा है कि वे हर सभा में आतंकवाद, पाकिस्तान और घुसपैठियों के नाम पर वोट मांग रहे हैं।  याद करें कैसे गुजरात में विधानसभा चुनाव के प्रचार में मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दूसरे कांग्रेस नेताओं के पाकिस्तानी प्रतिनिधियों से मिलने का मुद्दा उठाया था और कहा था कि उनके खिलाफ कांग्रेस पाकिस्तान के साथ मिल कर साजिश कर रही है। दो दशक तक गुजरात का ‘विकास’ करने के बाद मोदी को इस नाम पर वोट मांगना पड़ा था। उसी तरह पांच साल तक जम कर ‘विकास’ करने के बाद मोदी कह रहे हैं कि उनके हारने की दुआ पाकिस्तान में मांगी जा रही है। वे गुजरात के प्रचार की तरह ही लोकसभा के प्रचार में विपक्ष को पाकिस्तानपरस्त साबित करने में जुटे हैं।  चुनाव आयोग की ओर से सेना के अभियानों के राजनीतिक इस्तेमाल पर पाबंदी का सख्त आदेश जारी होने के बावजूद प्रधानमंत्री को इसकी परवाह नहीं है। वे हर सभा में वायु सेना के पराक्रम का जिक्र कर रहे हैं और विपक्ष पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने 28 और 29 मार्च की अपनी सभी छह रैलियों में इसका जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सेना पर सवाल उठा रहा है इसलिए उसको सजा मिलनी चाहिए। अभी तक इस बात पर बहस चल रही है कि बालाकोट अभियान में आखिर क्या हुआ था पर प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि पाकिस्तान लाशें गिन रहा था और विपक्ष सवाल उठा रहा है।  पांच साल तक किए अपने कामों खास कर नोटबंदी व जीएसटी जैसे कथित गेमचेंजर फैसलों पर वोट मांगने की बजाय मोदी और शाह दोनों देश की सुरक्षा के नाम पर वोट मांग रहे हैं। अमित शाह अपनी हर सभा में कह रहे हैं कि मोदी के हाथों में ही देश सुरक्षित है। खुद मोदी ने ओड़िशा के जयपुर में शुक्रवार को सभी में लोगों से पूछा कि उनको कैसा प्रधानमंत्री चाहिए, जो दुश्मन की सीमा में घुस कर मारे वैसा या जो चुपचाप तमाशा देखे वैसा? उनके प्रचार का सारा नैरेटिव मजबूत बनाम मजबूर प्रधानमंत्री का है।  राष्ट्रीय सुरक्षा की इस सारी बहस में बहुत सावधानी से यह प्रयास किया जा रहा है कि सारा फोकस पाकिस्तान पर रहे। इसमें चीन का नाम कहीं से नहीं आने पाए। पाकिस्तान के नाम पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रयास भी हो रहा है। तभी योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की सहारनपुर सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी इमरान मसूद को पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर का दामाद बता पर लोगों से वोट मांगे। तभी अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में अपनी सभाओं में कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो वह असम की तर्ज पर बंगाल के लिए भी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर बनाएगी और एक एक घुसपैठिए को खोज कर भारत से बाहर निकालेगी। अब कुल मिला कर पाकिस्तान के आतंकवादियों के नाम पर, कश्मीर के अलगाववादियों के नाम पर, असम और बंगाल के घुसपैठियों के नाम पर और विपक्षी पार्टियों के मुस्लिम उम्मीदवारों के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं। 2014 में चुनाव जीतने के बाद लाल किले से अपने भाषण में मोदी ने कहा था कि वे पांच साल बाद देश की जनता के सामने अपने कामकाज का हिसाब रखेंगे। पर अफसोस की बात है कि पांच साल के बाद कामकाज का हिसाब रखने की बजाय मोदी देश की सुरक्षा के नाम पर वोट मांग रहे हैं। हालांकि पांच साल में पहले से ज्यादा जवान मारे गए हैं, ज्यादा आतंकवादी हमले हुए हैं, राष्ट्री सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा हुई हैं पर झूठे-सच्चे आंकड़ों के सहारे बताया जा रहा है कि देश मोदी के हाथ में ही सुरक्षित रह सकता है। इससे भाजपा के शीर्ष नेताओं की नर्वसनेस दिखती है और उनका आत्मविश्वास हिला हुआ दिख रहा है। 

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