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वेस्टइंडीज़ की टीम थोड़ी कमज़ोर दिखती है, भारतीय टीम को उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

वेस्टइंडीज़ की टीम थोड़ी कमज़ोर दिखती है, भारतीय टीम को उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

Date : 03-Aug-2019
क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 के बाद भारतीय टीम वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ मुक़ाबला करने को तैयार है. शुरुआती दो टी-20 मुक़ाबला अमरीका में खेलने का बाद भारतीय टीम मेज़बान वेस्ट इंडीज़ के साथ आखिरी टी-20, तीन वनडे और दो टेस्ट उसी की सरजमीं पर खेलेगी. वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में मिली हार के बाद भारतीय टीम के अंदर मतभेदों को लेकर ख़बरों का बाज़ार काफी गरम रहा. कप्तानी, कोचिंग के अलावा टीम में अंदरूनी टकराव की बातें भी सामने आईं. ऐसे में वेस्ट इंडीज़ का यह दौरा बहुत महत्वपूर्ण है. वैसे रैंकिंग के लिहाज़ से देखें तो भारतीय टीम के सामने वेस्ट इंडीज़ की टीम काफ़ी हल्की दिखती है. टी-20 में वेस्ट इंडीज़ वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी है लेकिन वर्तमान रैंकिंग में वह नौवें पायदान पर है, जबकि भारत पांचवें पर काबिज है. खेल के इस प्रारूप में भारतीय टीम कई नए चेहरों के साथ उतर रही है, मसलन दीपक चाहर, राहुल चाहर, ख़लील अहमद, नवदीप सैनी, क्रुणाल पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर, मनीष पांडे और श्रेयस अय्यर. 2020 में टी-20 वर्ल्ड कप होने वाला है. ऐसे में इन नए खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नज़रें बनी रहेंगी. वनडे में भी रैंकिंग के लिहाज से भारत दूसरे तो वेस्ट इंडीज़ नौवें पायदान पर है. हालांकि इसमें दोनों का प्रदर्शन मिला जुला रहा है. इसलिए पहले से कोई अनुमान लगाना मुश्किल है. टेस्ट मैच में भारत नंबर वन है और वेस्ट इंडीज़ आठवें पायदान पर है. मौजूदा दौरे में दो टेस्ट मैच खेले जाने हैं और ये मुकाबला दिलचस्प हो सकता है क्योंकि अभी कुछ महीने पहले ही इसी वेस्ट इंडीज़ टीम ने इंग्लैंड को टेस्ट मैच में हराया था और सिरीज़ जीती थी. टेस्ट मैच के मामले में भारतीय खिलाड़ियों के सामने कुछ चुनौतियां हैं. जैसे अजिंक्य रहाणे वापस आ रहे हैं और वो टीम के उप कप्तान भी हैं. वो काफ़ी अरसे से भारतीय टीम में नहीं रहे हैं. वर्ल्ड कप 2019 में पांच शतक लगाने वाले रोहित शर्मा को वन डे का बेहतरीन बैट्समैन माना जाता है लेकिन टेस्ट मैचों में उनका रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि टेस्ट की टीम में उन्हें जगह मिलती है या नहीं. वर्ल्ड कप 2019 के 9 मैचों में 55 की औसत से 443 रन बनाने वाले विराट कोहली अपने बल्ले से अधिक अपनी कप्तानी की वजह से आलोचना का शिकार हुए. वेस्ट इंडीज़ की गेंदबाज़ी इसके अलावा टीम पर अभी कई सारे सवाल उठ रहे हैं, मतभेद की भी चर्चा है. वर्ल्ड कप में टीम के संतुलन पर भी सवाल उठे थे. गावस्कर जैसे बड़े खिलाड़ी भी टीम मैनेजमेंट पर सवाल खड़े कर रहे हैं और नए कोच का सेलेक्शन भी होना है. हो सकता है कि इन सारे सवालों का जवाब इस सिरीज़ में मिले. देखना होगा कि रवि शास्त्री और टीम के अन्य कोच को एक्सटेंशन मिलता है या नहीं. अब वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप भी शुरू हो गई है. भारत-वेस्ट इंडीज़ टेस्ट मैच पहले की तरह नहीं रहने वाला है. अब हार, ड्रॉ और जीत के पॉइंट मिलेंगे जिनके आधार पर दो साल में कोई टीम टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल तक पहुंच सकती है. और टेस्ट मैच में भारतीय टीम नंबर वन है, इसलिए उसकी कोशिश होगी कि वो दोनों टेस्ट जीते. लेकिन ये इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि वेस्ट इंडीज़ के पास तीन चार गेंदबाज़ ऐसे हैं जिनकी रफ़्तार डेढ़ सौ किलोमीटर प्रति घंटा है. इंग्लैंड की टीम को भी इन्हीं गेंदबाज़ों ने काफ़ी परेशान किया था. इसलिए भारतीय टीम को इस क्षेत्र में चौकन्ना रहना होगा. टीम में मतभेद एक चुनौती टीम को एकजुट करने की है, क्योंकि ड्रेसिंग रूम में मतभेद और अनबन चर्चा का विषय हैं. किसी भी टीम में मतभेद हो सकता है लेकिन मैच में इन्हें एक किनारे रख कर खेल पाती है, ये महत्वपूर्ण है. टीम में मतभेद की बात पहली बार सुनने को नहीं मिली है. 1983 के वर्ल्ड कप में कपिल देव और सुनील गावस्कर के बीच एक दरार सी थी, लेकिन उसके बावजूद भारत ने पहली बार वर्ल्ड कप जीता. साल 2004-05 में जब भारतीय टीम पाकिस्तान गई तो उस समय राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर के बीच पहले टेस्ट मैच में थोड़ी ग़लतफ़हमी हो गई थी लेकिन फिर भी भारत ने पहली बार ऐतिहासिक जीत हासिल की, पाकिस्तान को उसी की ज़मीन पर हराया. मौजूदा सिरीज़ की शुरुआत टी-20 से हो रही है. चयनकर्ताओं की नज़र अगले टी-20 वर्ल्ड कप पर है इसलिए वो इस दौरे में भरपूर प्रयोग की इजाज़त देना चाहेंगे. कुल मिलाकर भले ही प्रदर्शन के मामले में वेस्टइंडीज़ की टीम थोड़ी कमज़ोर दिखती हो, भारतीय टीम को उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.

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