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BDD की शिकार किसी महिला से प्यार करना क्या मुश्किल है?

BDD की शिकार किसी महिला से प्यार करना क्या मुश्किल है?

Date : 24-Sep-2019
24 सितंबर 2019 वो हंसमुख हैं, सुंदर हैं, नीली आंखें और लंबे बाल जिन्हें वो अक्सर नए रंग में रंगती हैं. फ़िलहाल उसके बालों का रंग चटख़ लाल है और उसकी मुस्कान बहुत ही प्यारी है. लेकिन लिएन को अपना रूप पसंद नहीं है. वो दिन में कई बार कहती हैं कि वो कुरूप हैं. वो कहती हैं कि वो मोटी हैं जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है. उन्हें लगता है उनका चेहरा कुछ टेढ़ा है जबकि वास्तव में उनका चेहरा सुडौल है. 2015 में हमारी मुलाक़ात टिंडर के ज़रिए हुई. लिएन को वो पसंद था क्योंकि टिंडर पर लगाइ गयी अपनी तस्वीरों में वो कैसी दिखती हैं इसे वो नियंत्रित कर सकती थीं. पहली कुछ मुलाक़ातों के दौरान लगा कि उनमें काफ़ी आत्मविश्वास था. इससे पहले इतनी जल्दी मुझे किसी के साथ इतना सहज महसूस नहीं हुआ था. उनमें ऐसा कुछ था कि मैं पूरी तरह उनकी ओर आकर्षित हो गया. हम दोनों के बीच एक ज़बरदस्त जुड़ाव था और कुछ ही महीनों में मुझे लगा कि मुझे उनसे प्रेम होने लगा है. लिएन के साथ संबंध बनने के छह महीने के भीतर ही स्पष्ट हो गया कि लिएन की अपने शरीर और रूप को लेकर जो समस्या थी वो मात्र आत्मविश्वास की कमी नहीं बल्कि उससे ज़्यादा गंभीर समस्या थी. एक बार हम दोनों साथ बाहर जाने के लिए तैयार हो रहे थे और पता चला कि उनका हेयर स्प्रे ख़त्म हो गया है. मैंने देखा कि इस बात से वो बहुत नाराज़ हो गयी थीं और यह सोच कर परेशान हो रही थीं कि उनके बाल कैसे लगेंगे. तो मैं बाहर दुकान पर गया और उनके लिए एक नया हेयर स्प्रे ख़रीद लाया. वो स्प्रे उस स्प्रे से कुछ अलग था जिसे वो हमेशा इस्तेमाल करती थीं. इस बात पर वो बेहद नाराज़ हो गयीं, यहां तक कि चीज़ें फेंकने लगीं. हम दोनो के बीच काफ़ी झगड़ा हुआ. जब हम दोनो शांत हुए तो मुझे अहसास हुआ कि अपने बारे में उनकी नकारात्मक बातें और अपने रूप को लेकर हर काम एक ख़ास तरीक़े से ही करने की ज़िद सही या सामान्य नहीं है. मैं स्वयं भी ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) से प्रभावित रहा हूं. यह एक मानसिक बीमारी है लेकिन मैं उसे नियंत्रण में रख पाता था. मुझे लगा कि उन्हें भी शायद ओसीडी है. मैंने उन्हें सुझाव दिया कि उन्हें डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. हालांकि शुरू में वो इस बात के लिए आश्वस्त नहीं लगीं लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें इस बात से कुछ राहत ज़रूर महसूस हुई कि हमने खुलकर इसके बारे में बात की. बॉडी डिसमॉर्फ़िक डिसऑर्डर तब इस बात का पता चला कि वो एक मनोविकार से पीड़ित है जिसे बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (बीडीडी) कहते हैं. ऐसा माना जाता है कि विश्व की 2% आबादी इससे प्रभावित है. इस मानसिक बीमारी से प्रभावित लोगों को लगता है कि वे कुरूप दिखते हैं. वे अपने रूप की तुलना और लोगों से करते हैं. ऐसे लोग अपने शरीर के किसी विशेष अंग, और आम तौर पर चेहरे को लेकर परेशान रहते हैं. लिएन ने बीडीडी का इलाज करवाने के लिए थेरेपी शुरू कर दी थी. हालांकि उन्हें पता चल गया था कि वो इस मानसिक बीमारी से प्रभावित हैं फिर भी इस बीमारी के साथ निबाह पाना कठिन होता है. हालांकि मैं इस बीमारी से प्रभावित नहीं हूं लेकिन लिएन के साथ रहने का अर्थ है कि यह बीमारी मेरी ज़िंदगी का हिस्सा बन गयी है. बीडीडी की वजह से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अनअपेक्षित स्थितियां पैदा हो जाती हैं. जैसे कि एक बार हम शरबत पीने एक ज्यूस बार में गए लेकिन वहां पहुंचकर लिएन ने भीतर जाने से मना कर दिया क्यों कि वहां एक लड़की बैठी थी, जो लिएन के मुताबिक़ उससे कहीं अधिक सुंदर थी. कभी-कभी यह स्थितियां डरावनी भी हो सकती हैं. अपने रूप को लेकर नकारात्मक भावनाओं की वजह से लिएन कई बार कहती हैं कि उनका मन करता है कि वो अपना चेहरा नोंच लें या अपने बाल जला दें. एक बार तो मैं वहीं मौजूद था जब उन्होंने वाक़ई अपने बाल जलाने की कोशिश की. मैंने उसके हाथ से लाइटर छीन लिया और बालों से दूर कर दिया. उस समय हमारे संबंधों की शुरूआत हुए दो महीने ही हुए थे. मैं बहुत घबरा गया था और समझ नहीं पा रहा था कि क्या कहूं. और उन्हें कैसे रोकूं. सबसे मुश्किल बात यह है कि हमारा संबंध अंतरंग नहीं है. लिएन के लिए मेरे सामने निर्वस्त्र होना बहुत ही कठिन है. पिछली बार जब हमने संभोग करने का प्रयास किया तो हम ज़्यादा आगे नही बढ़ पाए. यानि वो प्रयास संभोगपूर्व क्रिड़ा या फ़ोर प्ले तक सीमित रहा. मैं हमेशा प्रयास करता हूं कि उसे जिस तरह जो करना है वो करने दूं ताकि वो असहज ना महसूस करे. मगर परेशानी की बात यह है कि आमतौर पर वह चाहती है कि मैं पहल करूं. इससे होता यह है कि हम कभी कभार ही एक दूसरे के साथ थोड़ा कुछ कर पाते हैं. यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि उस समय लिएन कैसा महसूस कर रहीं हैं. हम शुरूआत करते हैं, लेकिन उनके भीतर अपने आप के बारे में नकारात्मकता की वजह से सहजता नहीं होती और हम रुक जाते हैं. मुझे लगता है जैसे मेरी ज़िदगी चाक़ू की धार पर चल रही है. सेक्स भले ही सबसे महत्वपूर्ण बात ना हो, लेकिन वो निश्चित ही जीवन का एक बड़ा हिस्सा है. अपनी समस्या का ख़ुद इलाज करने के लिए मैं पॉर्न का इस्तेमाल करता हूं. लिएन बहुत नाराज़ हुई जब उसने पाया कि मेरे फ़ोन में पॉर्न सामग्री है. वो नहीं चाहती कि मैं पॉर्न देखूं क्योंकि उन्हें लगता है कि मुझे पॉर्न देखना उनके साथ सेक्स करने से ज़्यादा पसंद है. हमने एक दूसरे के साथ सेक्स के लिए नज़दीकियां बढ़ाने के कई तरीक़े आज़माए, जैसे रात में डेट पर जाना, मेरा उसे यह बताना कि वह कितनी आकर्षक लगती है, तैयार होने के लिए उसे बहुत सारा समय देना. लेकिन अगर वह अपने आप को लेकर सहज नहीं हो पाए तो यह बहुत ही कठिन है. इसका परिणाम यह है कि हम अपने भविष्य के लिए कोई योजना नहीं बना सकते. हम दोनो 29 साल के हैं. यह ऐसी उम्र है जब उसके सभी दोस्तों की शादी हो रही है. इन गर्मियों में हमें कुछ शादियों में शामिल होना है. हमने शादी और बच्चे पैदा करने के बारे में बातें की. मै चाहूंगा कि हमारे बच्चे हों. उसके साथ बातें एक चरम से दूसरे चरम पर जाती हैं. लिएन कभी कहती हैं वो शादी करना चाहेगी, लेकिन उनके भीतर का बीडीडी कहेगा - नहीं . क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चा पैदा करने से उनके शरीर पर असर पड़ सकता है. फ़िलहाल बीडीडी के इलाज के लिए उनकी थेरेपी चल रही है और उससे मदद भी मिल रही है. लेकिन कई बार मुझे यह भी लगा कि हमें अलग हो जाना चाहिए. एक बार एक संगीत कार्यक्रम के बाद हम दोनों कुछ दोस्तों के साथ एक पब में चले गए. वहां कुछ और दोस्त आ गए जिनके साथ कुछ महिलाएं थीं जो उनकी परिचित थीं. लिएन बहुत नाराज़ हो गयी. मुझे लगता है शायद उन्हें लगा वो उन महिलाओं की तुलना में बदसूरत हैं. वो मुझ पर बरसने लगीं और फिर ग़ुस्से में वहां से चली गयीं. शायद यह उनकी रक्षात्मक प्रतिक्रिया है. हम लोग डेढ़ साल से साथ थे और ऐसी छोटी-छोटी घटनाएं बढ़ती जा रही थीं. वो अकसर ऐसा करती थीं कि किसी दुकान या बार में गयी हों और वहां किसी को देख कर उनका बीडीडी हावी हो जाता था और वो वहां से निकल जाती थीं या मुझ पर बरस जातीं उस दिन पब में हुई घटना के बाद मैंने उनसे कह दिया कि यह बर्ताव हद से बढ़ता जा रहा है. मैंने कहा उन्हें डॉक्टर से मदद लेनी चाहिए क्योंकि मेरे लिए इससे निबटना मुश्किल होता जा रहा है. कई बार लगता है कि वह एक नहीं बल्कि दो व्यक्ति हैं. बीडीडी जैसे उसके भीतर मौजूद जानवर की तरह है. मैंने तय कर लिया है कि जब भी वह कहे कि, मैं कुछ ख़ास नहीं लग रही तो मैं सीधे उसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दूंगा, बल्कि बस उसका हाथ सहला दूंगा या उसे आलिंगन दूंगा. काफ़ी समय तक मैंने इस बारे में अपने दोस्तों या परिवार में किसी से बात नहीं की. मैंने सोचा, यह लिएन का निजी मामला है. फिर पिछले वर्ष हताश होकर अपनी भड़ास निकालने के लिए मैंने अपने माता-पिता से इस बारे में बात की. दोनों ने मुझे सहानुभूति और संवेदनशीलता से सुना. मेरी मां मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करती हैं और लिएन की स्थिति समझती हैं. हालांकि उनकी मुख्य रूचि इस बात में है कि मैं ख़ुश रहूं. मैं उन्हें बार-बार आश्वस्त करता हूं कि मैं ख़ुश हूं. दोस्तों की बात अलग है. उन्हें हाल ही में बीडीडी के बारे में पता चला. उनके लिए यह समझ पाना सबसे मुश्किल था कि मेरे और लिएन के बीच अंतरंग संबंध नहीं थे. मैं तो इससे बिल्कुल नहीं निबट पाता जैसी कई प्रतिक्रियाएं सुनने को मिलीं. लेकिन मुझे अपने और लिएन के बीच प्यार पर पूरा विश्वास है. मैं हर दिन को वो जैसा है वैसे स्वीकार करता हूं और हमारे बीच के अच्छे पलों का आदर करता हूं. हम रोज़ हंसते हैं, ख़ुश होते हैं, एक दूसरे से सब कुछ साझा करते हैं. वह अभी भी मेरी सबसे अच्छी दोस्त है. मुझे पता है शायद लिएन का बीडीडी कभी ख़त्म नहीं होगा. लेकिन मैं ऐसे मक़ाम तक पहुंचना चाहता हूं जहां मुझे हमेशा यह ना महसूस हो कि मैं बहुत ही नाज़ुक स्थिति से गुज़र रहा हूं. मै ऐसी स्थिति में आना चाहता हूं जहां मैं उसे अपने आप से संतुष्ट पाऊं, वो जैसी है उसे लेकर उनमें आत्मविश्वास हो.

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