Breaking News

लोकसभा चुनाव 2019: नतीजे आने के बाद किंगमेकर बन सकती हैं क्षेत्रीय पार्टियां

Date : 03-Apr-2019
आगामी लोकसभा चुनाव में यदि कोई एक पार्टी 272 का चमत्कारी आंकड़ा यानी पूर्ण बहुमत दर्ज नहीं कर पाती है तो सरकार बनाने के कवायद में तीन क्षेत्रीय पार्टियां बेहद अहम भूमिका निभाती नज़र आ सकती हैं. ये तीनों पार्टियां हैं- ओडिशा में बीजू जनता दल बीजेडी, आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस, तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति टीआरएस. साल 2014 में एक पार्टी पूर्ण बहुमत में आई थी जिसके बाद केंद्र में क्षेत्रीय दलों का महत्व एक तरह से ख़त्म हो गया था. लेकिन अब ये चर्चा तूल पकड़ रही है कि हो सकता है कि 2019 में सरकार बनाने के लिए गठबंधन की ज़रूरत हो और ऐसे में ये क्षेत्रीय पार्टियां महत्वपूर्ण होंगी. इस सूची में बहुजन समाज पार्टी का नाम भी शामिल हो सकता है, क्योंकि पार्टी सुप्रीमो मायावती के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सका और चुनाव के बाद वो बीजेपी का समर्थन कर सकती हैं. बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस और टीआरएस की बात करें तो फिलहाल ऐसे लग रहा है कि ये तीनों पार्टियां अपने-अपने प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन करने वाली हैं.2014 में जब मोदी लहर अपने चरम पर थी उस वक्त भी इस क्षेत्रीय दलों ने अपने-अपने प्रदेशों में अच्छा प्रदर्शन किया था. उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी बीजेडी बढ़िया प्रदर्शन बरकरार रखेगी और वाईआरएस कांग्रेस भी कम-से-कम 12 सीटें ले कर आ सकती हैं. बीते साल दिसंबर में तेलंगाना में विधानसभा चुनाव हुए थे जिनमें टीआरएस को भारी बहुमत से जीत मिली थी यहां कुल 119 सीटों में से टीआरएस को 88 सीटों पर जीत मिली थी. लोकसभा चुनावों में पार्टी को 11 सीटें मिली थीं. इन तीन पार्टियों के ही आंकड़ों को मिला दिया जाए तो माना जा सकता है कि लोकसभा में 63 सांसद इन पार्टियों के हो सकते हैं. अब इस आंकड़े में यदि बसपा को मिला कर देखा जाए और उत्तर प्रदेश से भी 80 सीटें हैं जिनमें से कई पर भाजपा पिछड़ सकती है. लेकिन ऐसी स्थिति में भी लगता है कि बीजेपी के सरकार बनाने की संभावना अधिक है क्योंकि ये चारों क्षेत्रीय पार्टियां महागठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगी और कांग्रेस को समर्थन भी नहीं दंगी.और मज़बूत हुई क्षेत्रीय पार्टियां दिलचस्प बात ये है कि बीते दो दशकों से जहां राज्यों में राष्ट्रीय पार्टियों का वोट शेयर लगातार घट रहा है वहीं क्षेत्रीय पार्टियों का वोट शेयर बढ़ रहा है. 1952 को हुए पहले लोकसभा चुनावों में हिस्सा लेने वाली 55 पार्टियों में से 18 क्षेत्रीय पार्टियां थीं. साल 2004 में 36 क्षेत्रीय पार्टियां चुनावी अखाड़े में उतारी थीं और 2014 में 31 क्षेत्रीय पार्टियों ने चुनाव लड़ा था. 2019 में क्षेत्रीय पार्टियां करीब 150 से 180 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतर सकती हैं और इन चुनाव क्षेत्रों राष्ट्रीय पार्टियां अधिक महत्वपूर्ण नहीं मानी जातीं. इन चुनाव क्षेत्रों में क्षेत्रीय सम्मान सबसे अधिक संवेदनशील मुद्दा होती है. अविभाजित आंध्रप्रदेश में 1982 में एनटी रामाराव ने तेलुगु लोगों को आत्म गौरवम् का नारा दिया था और इसी के बल पर उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की थी. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृहराज्य में गुजराती अस्मिता के बारे में बात करते रहे हैं. साल 2015 में बिहार में जो महागठबंधन बना था वो बिहारी सम्मान को लेकर ही थी. और ओडिशा में नवीन पटनायक के लिए वोट लेकर ने वाली भावना बीजू की जननायक की छवि के कारण है. अगर हम 2014 की बात करें तो कर्नाटक के अलावा भाजपा ना तो किसी दक्षिण भारतीय राज्य में अपने पैर पसार पाई ना ही ओडिशा और पश्चिम बंगाल में. कांग्रेस और बीजेपी के वोट स्विंग के बावजूद क्षेत्रीय पार्टियों का शेयर लगभग उतना ही रहा जितना पहले था, यानी 212 सीटों पर 2009 में जहां क्षेत्रीय पार्टियों का वोट शेयर 46.7 फीसदी था वहीं 2014 में ये 46.6 फीसदी था. कांग्रेस के कमज़ोर होने के बाद चुनावों में उतरने वाली क्षेत्रीय पर्टियों ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया, ख़ास कर हिंदी भाषी इलाकों से बाहर की संसदीय सीटों पर. चुनाव आयोग के आंकड़ों को ही देखें तो एआईएडएमके, बीजेडी, तृणमूल कांग्रेस और आंध्रप्रदेश की तीन क्षेत्रीय पार्टियों ने अपने-अपने इलाके में अपने पैर मज़बूती से जमाए रखे. यहां तक कि डीएमके और समाजवादी पार्टी ने भी अपना वोट शेयर बरकरार रखा. और तो और बसपा ने कोई सीट तो नहीं जीती लेकिन अपना 19 फीसदी वोटशेयर उसने भी बनाए रखा है.रणभूमि - आंध्रप्रदेश एक तरह से देखा जाए को बीजेपी के लिए कांग्रेस से मुक़ाबला करना जितना आसान होगा इन क्षेत्रीय पार्टियों से मुक़ाबला करना उतना मुश्किल होगा. क्षेत्रीय स्तर पर हर राज्य की समस्याएं अलग हैं और उन्हें अलग चश्मे से देख जाना ज़रूरी होता है. 2014 के बाद से देखा जाए तो बीजेपी को क्षेत्रीय पर्टियों के हाथों शिकस्त ही मिली है. आंध्रप्रदेश में 2014 में वाईएसआर छोटे से फर्क के कारण सरकार बनाने से चूक गई क्योंकि सत्ताधारी टीडीपी और वाईएसआर के बीच वोटशेयर का फर्क 2 फीसदी से भी कम था. यहां इस बार एक साथ विधानसभा और लोकसभा चुनाव होने वाले हैं. यहां टीडीपी और वाईएसआर के बीच कड़ी टक्कर की उम्मीद जताई जा रही है और टीडीपी के समने एंटी इन्कंबेंसी की डर भी है. प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस, कांग्रेस के पारंपरिक वोटबैंक- यानी रेड्डी समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है. रायलसीमा पार्टी के प्रमुख जगनमोहन रेड्डी का गढ़ माना जाता है जबकि समुद्रतटीय इलाकों को टीडीपी का गढ़ माना जाता है.रणभूमि - तेलंगाना तेलंगाना पार्टी के प्रमुख और प्रदेश के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव अतुलनीय तेलंगाना के विचार का प्रतिनिधित्व करते हैं. वो खुद को तेलंगाना का बेटा कहते हैं और 2014 और 2018 विधानसभा चुनावों में वो तेलंगाना का गर्व की भावना को मुद्दा बन कर मैदान में उतरे थे और उन्हें बहुमत भी मिला था. बीते पांच साल में तेलंगाना में विपक्ष की मौजूदगी लगभग न के बराबर दिखती है और एक बार फिर चंद्रशेखर राव बहुमत से आगे आते दख सकते हैं. आंध्र प्रदेश के विभाजन के लिए चंद्रशेखर राव यूपीए चीफ़ सोनिया गांधी का धन्यवाद तो करते हैं लेकिन इसकी पूरी संभावना है कि वो केंद्र में कांग्रेस की बजाय भाजपा से नेतृत्व वाली सरकार का हाथ थाम लें. राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति में उतरने की उनकी अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. कांग्रेस खुद टीआरएस को बीजेपी की बी टीम कहती आई है. रणभूमि - ओडिशा उत्तर भारत के अधिकतर रज्यों में जीत परचम फहराने के बाद बीजेप ओडिशा में पैर जमाने की कोशिश कर रही है. इधर 19 साल तक लगातार मुख्यमंत्री रह चुके बीजेडी नेता नवीन पटनायक भी पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं. यहां एक साथ विधानसभा और लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और फिलहाल बीजेपी के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणभूमि बनती जा रही है2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेडी ने 21 में से 20 सीटों पर जीत दर्ज की थी और 44.8 फीसद वोट शेयर बनाए रखा. उस वक्त देश में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी यहां केवल एक सीट पर जीत पाई थी और इसका वोट शेयर 21.9 फीसद था. जो बात नवीन पटनायक के पक्ष में जाती है वो ये है कि प्रदेश में पहले ही एक मज़बूत विपक्ष नहीं है. ओडिशा में इस बार त्रिकोणीय चुनाव होने वाले हैं जिनमें बीजेडी, बीजेपी और कांग्रेस अहम खिलाड़ी होंगे. इसके कोई संकेत नहीं मिलते कि लंबे वक्त से सत्ता में रह चुके नवीन पटनायक को एंटी-इन्कंबेंसी का कोई डर सता रहा है, वो अभी भी काफी पॉपुलर हैं. 2009 तक एनडीए की सहयोगी रह चुकी बीजेडी फिलहाल बीजेडी और कांग्रेस के बराबर दूरी बनाए हुए है, लेकिन संसद में कई मुद्दों पर वो पहले भी बीजेपी का समर्थन कर चुकी है. इसलिए इस अटकलों को खारिज नहीं किया जा सकता कि अगर नतीजे आने के बाद बीजेपी को ज़रूरत पड़ेगी तो बीजेड़ी उनके साथ खड़ी दिखाई सकती है. संक्षेप में कहें तो, त्रिशंकु संसद बनने के संकेत मिलने पर इन क्षेत्रीय पार्टियों की मांग बढ़ सकती है और वो भी अपना महत्व समझते हैं. और ये समझने वाली बीजेपी भी इसके लिए तैयार है.
View More...

लोकसभा चुनाव 2019: हिंदुत्व पर आक्रामक होते मोदी-योगी-शाह

Date : 02-Apr-2019
लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान ज़ोर पकड़ता जा रहा है और अपनी रैलियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने जो कुछ कहा है उसकी काफ़ी चर्चा हो रही है. एक नज़र पिछले तीन दिनों में इन नेताओं की कुछ ऐसी ही टिप्पणियों पर - मोदी की सेना दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय सेना को मोदी की सेना कहा था.योगी ने कहा था, कांग्रेस के लोग आतंकवादियों को बिरयानी खिलाते थे और मोदी जी की सेना आतंकवादियों को गोली और गोला देती है, यही अंतर है. योगी ने कहा, कांग्रेस के लोग अजहर मसूद जैसे दुर्दांत आतंकवादी के नाम के साथ जी लगाकर आतंकवाद को प्रोत्साहित करने का काम करते हैं. तो प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में आज आतंकवाद के ठिकानों को नष्ट और ध्वस्त करके आतंकवाद की ही नहीं पाकिस्तान की कमर तोड़ने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर रही है.इस पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है. दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने इसे भारतीय सेना का अपमान बताया है.हिंदू आतंकवाद योगी आदित्यनाथ ने हिंदू आतंकवाद के शब्द को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा, 2007 में समझौता एक्सप्रेस ट्रेन धमाके के बाद कांग्रेस ने एक शब्द दिया था, हिंदू आतंकवाद. ये शब्द आया कहां से और कैसे कांग्रेस ने उस हिंदू समाज को आतंकवादी ठहरा दिया जो हिंदू अपनी सहिष्णुता के लिए, विश्वबंधुत्व के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाराष्ट्र के वर्धा में सोमवार को एक चुनावी रैली में कांग्रेस पर हिंदू समाज को बदनाम करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, भाईचारे की ज़िंदगी जीने वाले और पूरे विश्व को परिवार मानने वाले हिंदू समाज को आतंकी कह दिया. आतंकवाद को हिंदू के साथ जोड़ दिया, इसके कारण जहां मेजॉरिटी बहुसंख्यक लोग रहते हैं अब वहां से चुनाव लड़ने की उनकी हिम्मत नहीं पड़ रही है. उन्होंने कहा कि आतंकवादी हिंदू कहने की सज़ा उन्हें मिल चुकी है और इसलिए भाग कर के, जहां मेजॉरिटी, माइनॉरिटी में है, वहां शरण लेने को वो मज़बूर हो गए. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी पश्चिमी यूपी के बिजनौर में हुई चुनावी रैली में हिंदू आतंकवाद को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा.कांग्रेस ने हिंदू धर्म को किया बदनाम बीते रविवार को बिजनौर और बागपत में हुई रैलियों में अमित शाह ने कांग्रेस पर हिंदू धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, समझौता ब्लास्ट को हिन्दू आतंकवाद बोलकर कांग्रेस ने अपने वोटबैंक के लिए पूरी दुनिया में शांति और सौहार्द के प्रतीक हिन्दू धर्म को बदनाम किया. आतंकवाद को हिंदू धर्म के साथ जोड़ने का पाप कांग्रेस ने किया. राहुल बाबा आपको पता नहीं है हम तो चींटियों को भी आटा खिलाने वाले लोग हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दो सीटों से लड़ने पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, कांग्रेस की वोटबैंक की राजनीति ने देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है और इसी का नतीजा है कि आज राहुल गांधी को अमेठी छोड़ कर केरल भागना पड़ रहा है, क्योंकि उनको पता चल गया है कि वहाँ उनका हिसाब किताब होने वाला है. पर आप कहीं भी चले जाओ जनता आपसे हिसाब ज़रूर माँगेगी.
View More...

छत्तीगढ़ में बीजेपी ने जारी की ‘अटल संकल्प पत्र’

Date : 12-Nov-2018

रायपुर : आगामी छत्‍तीसगढ़ विधाननसा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है. शनिवार को बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने एक समारोह के दौरान पार्टी के घोषणा पत्र को ‘अटल संकल्‍प पत्र’ के नाम से जारी किया. इस दौरान उन्‍होंने राज्‍य की बीजेपी सरकार और मुख्‍यमंत्री रमन सिंह के कार्यों की तारीफ की. छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री रमन सिंह ने इस दौरान कहा ‘राज्‍य में पत्रकार कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा, महिलाओं को अपने व्यापार शुरू करने के लिए 2 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण दिया जाएगा. छत्तीसगढ़ फिल्म सिटी का निर्माण किया जाएगा. 12वीं कक्षा तक के सभी छात्र-छात्राओं को मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म दी जाएगी.

अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में भाजपा की सरकार और उसके 15 साल, एक तरह से देश में कल्याणकारी राज्य कैसे बन सकता है इसका सबसे अच्छा उदाहरण है. रमन सिंह जी ने 15 साल में छत्तीसगढ़ को बदलने का भरसक प्रयास किया है, सफल प्रयास किया है. हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि नक्सलवाद पर नकेल कसने की है, रमन सिंह जी ने नक्सलवाद को करीब करीब खत्म कर दिया है.

अमित शाह ने कहा कि स्किल डेवेलपमेंट के लिए अपना कानून बनाने वाला पहला राज्य छत्तीसगढ़ बना. किसानों को अल्पकालीन ऋण शून्य ब्याज दर पर उपलब्ध करवाने वाला पहला राज्य भी छत्तीसगढ़ बना. बीजेपी के अटल संकल्‍प पत्र जारी करने के समारोह में बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह, रमन सिंह, बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, सरोज पांडेय, राम विचार नेताम धरमलाल कौशिक मौजूद रहे. अमित शाह ने कहा है कि छत्‍तीसगढ़ को हेल्थ हब, एजुकेशन हब के बाद अब डिजिटल हब बनाने का काम होगा. जनादेश, जन आशीर्वाद से हमें भरोसा, हम चौथी बार सरकार बनाएंगे. अमित शाह ने इस दौरान कांग्रेस पर भी हमला बोला. उन्‍होंने कहा ‘जिस पार्टी को नक्‍सलवाद में क्रां‍ति दिखाई पड़ती हो, नक्‍सलवाद क्रांति का माध्‍यम दिखाई पड़ता हो, वो पार्टी छत्‍तीसगढ़ का भला नहीं कर सकती.’ उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस ने करीब-करीब 55 साल शासन किया है लेकिन देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का काम केंद्र की मोदी सरकार और राज्य में भाजपा सरकारें कर रही हैं.

View More...

हैती में आये भूकंप में अब तक 15 की मौत

Date : 12-Oct-2018

पोर्त-दे-पैक्स : हैती में आए 5.9 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 पर पहुंच गई है और 333 अन्य लोग घायल हैं. हैती की सिविल रक्षा एजेंसी ने सोमवार को एक बयान में बताया कि वह जल्द ही नोर्द क्वेस्ट और एर्तिबोनिते प्रांतों में 70 सैनिकों को तैनात करेगी. ये प्रांत भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. एजेंसी ने पहले ही नर्सों और डॉक्टरों के साथ 14 सैनिकों को वहां भेजा है.

हैती के उत्तरी तट पर भूकंप के बाद के झटकों के डर से लोग बाहर ही बैठे हुए हैं. हैती में शनिवार रात को आए भूकंप के बाद रविवार को भी 5.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए. अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण ने बताया कि बाद में आए भूकंप का केंद्र पोर्त-दे-पैक्स के उत्तर पश्चिम से 15.8 किलोमीटर दूर स्थित था. मृतकों में पांच साल का लड़का भी शामिल है जिसकी मकान ढह जाने से दबकर मौत हो गई.

हैती में जानलेवा भूकंप के बाद महसूस हुए 5.2 तीव्रता के झटके (आफ्टर शॉक) ने अपने घरों के मलबे टटोल रहे और उससे बाहर निकलने की कोशिश कर रहे लोगों को बुरी तरह डरा दिया है. शनिवार रात को आए भीषण भूकंप में अभी तक 12 लोग मारे गए हैं और ताजा झटके के बाद उनकी संख्या बढ़ने की आशंका है.

अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण का कहना है कि रविवार को महसूस हुए झटके का अधिकेन्द्र पोर्त-दे-पैक्स से करीब 15.8 किलोमीटर उत्तर और उत्तर-पश्चिम में 10 किलोमीटर की गहराई में था. शनिवार की रात को आए 5.9 तीव्रता के भूकंप ने सबसे ज्यादा नुकसान इसी शहर को पहुंचाया है. सर्वेक्षण के एक वैज्ञानिक पॉल कारूसो ने बताया, ‘‘यह भूकंप के बाद का झटका था. यह उसी जगह पर आया है. यह भूकंप के बाद महसूस हुआ पहला बड़ा/तेज झटका है.’’ रविवार को महसूस हुए झटके ने शनिवार की भूकंप से डरे हुए लोगों को और डरा दिया है.

View More...

नाइजीरिया में 'बोको हराम' के हमले में सात नाइजीरियाई सैनिकों की मौत

Date : 12-Oct-2018

नाइजीरिया : नाइजर सीमा के पास सैन्य शिविर पर 'बोको हराम' के जिहादियों के हमले में कम से कम सात नाइजीरियाई सैनिक मारे गए हैं. नाइजीरियाई सेना ने बुधवार को ट्विटर पर एक बयान जारी कर कहा कि नाइजीरिया के उत्तरी-पूर्वी बोर्नो राज्य के मेतेले गांव में सोमवार को सेना और इस्लामी जिहादियों के बीच भीषण संघर्ष हुआ, स दौरान सात सैनिक मारे गए और 16 अन्य घायल हो गए.

हालांकि सैन्य और मिलिशिया सूत्रों का कहना है कि घटना में मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है. वैसे बोर्नों की प्रांतीय राजधानी मैदुगुडी से सेना के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि,'सात घंटे तक चले इस संघर्ष में हमने 18 सैनिकों को खोया.'

पहचान गुप्त रखते हुए इस नाइजीरियाई सेना के अधिकारी ने बताया कि हमारे सैनिक बहादुरी से लड़े और 'बोको हराम' के जिहादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया. जिहादियों के खिलाफ लड़ाई में सेना की मदद करने वाले स्थानीय मिलिशिया का कहना है कि मंगलवार को सैनिकों के 18 शव मोनगुनो शहर लाए गए थे. 

उनके अनुसार नाइजीरियाई सैनिकों और 'बोको हराम' के जिहादियों के बीच संघर्ष भीषण काफी भीषण था. यह शाम करीब साढ़े चार बजे शुरू हुआ और रात साढ़े ग्यारह बजे तक चला.

नाइजीरिया में लम्बे समय से आतंरिक गृहयुद्ध चल रहा हैं. इस्लामिक अतिवाद विचारधारा वाला संगठन बोको हराम लम्बे समय से वहां इस्लामिक सत्ता को स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहा हैं. बोको हराम लूट,अपहरण,जबरन धर्म परिवर्तन की वारदातों के अलावा लाखों निर्दोष नाइजीरिया के नागरिको की ह्त्या में संलिप्त रहा है. 

View More...

धीरे-धीरे ओडिशा और आंध्र प्रदेश ​की ओर बढ़ रहा है चक्रवाती तूफान 'तितली', 2 दिन स्कूल बंद

Date : 12-Oct-2018

बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण आया चक्रवाती तूफान 'तितली' अब धीरे-धीरे ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तट की तरफ बढ़ रहा है. फिलहाल इसकी रफ्तार धीमी है लेकिन गुरुवार को चक्रवाती तूफान 'तितली' प्रचंड रूप ले लेगा. मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार की इसकी तीव्रता और बढ़ने के आसार हैं जिसमें 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हवाएं चलेंगी. तूफान के चलते 11 और 12 तारीख को स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है.

चक्रवाती तूफान 'तितली' से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक उच्चस्तरीय बैठक की. मौसम विभाग के मुताबिक 'तितली' फिलहाल ओडिशा के गोपालपुर से तकरीबन 530 किमी दक्षिण पूर्व और आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्नम से 480 किमी दक्षिण पूर्व में है.

अगले 24 घंटों में यह चक्रवाती तूफान में बदल सकता है और गुरुवार सुबह गोपालपुर और कलिंगपट्टनम के बीच ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों को पार करते हुए धीरे धीरे इसकी तीव्रता कम हो जाएगी. चक्रवाती तूफान 'तितली' का सबसे ज्यादा प्रभाव ओडिशा के तटीय इलाकों पर पड़ेगा. वहीं इसकी बजह से यूपी, बिहार में भी बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए ओडीशा के गजपति, गंजाम, पुरी, कंधमाल, कोरापुट, कटक, जाजपुर और कालागढ़ में बारिश का रेड एलर्ट जारी किया है.

View More...