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चुनिंदा शेर आपका इश्क बयां करने में कमाल कर सकती हैं...

Date : 01-Dec-2019
प्यार के खूबसूरत एहसास को बयां करने के लिए कई बार जब जुबान साथ नहीं देती तो लोग अपने साथी को दिल का हाल बताने के लिए शेर और शायरी का सहारा लेते हैं. पहले के समय में तो ख़त के जरिए दिल की बात कहा करते थे लेकिन अब इसकी जगह मोबाइल मैसेज और फेसबुक स्टेटस ने ले ली है. लेकिन अगर बात इश्क की हो तो प्यार तब भी उतना ही मासूम था जितना भोला वो आज है. जब लोगों को इकरार की पूरी उम्मीद होती है तब भी दिल इजहार-ए-मोहब्बत से डरता है. लेकिन जब साथी के मन की गहराई का बिलकुल पता ही ना हो तब तो प्यार का इजहार करना वाकई काफी मुश्किल होता है. सर्दियों के मौसम में प्यार का एहसास काफी जवां होता है. ऐसे में साथी से दिल की बात कहने की बेकरारी अलग ही होती है. लेकिन हर कोई शब्दों का जादूगर नहीं होता है. कई बार जल्दबाजी में गलत शब्दों के इस्तेमाल से आपके प्यार की बाजी पलट भी सकती है. इसलिए आइए आज आपके लिए पेश करते हैं कुछ ऐसी ख़ास चुनिंदा शेर और शायरियां जो आपके साथी से आपका इश्क बयां करने में कमाल कर सकती हैं... 1.अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो- मुनव्वर राना 2.और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 3. और क्या देखने को बाक़ी है आप से दिल लगा के देख लिया- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 4. दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 5. किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ- अहमद फ़राज़ 6.हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा द ये मा लूम कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी- अहमद फ़राज़
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जब सोनाक्षी को रीना रॉय की बेटी कहा जाने लगा था

Date : 28-Nov-2019
सोनाक्षी सिन्हा आज बॉलीवुड का एक जाना पहचाना नाम हैं. उन्होंने इंडस्ट्री को कई सुपरहिट फ़िल्में दी हैं. मगर जब उनकी पहली फ़िल्म रिलीज़ हुई थी, तब उनके साथ एक कॉन्ट्रोवर्सी हो गई थी. इसकी वजह बना था उनका चेहरा, जो गुज़रे ज़माने की मशहूर अदाकारा रीना रॉय से मिलता था. तब कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि सोनाक्षी सिन्हा रीना रॉय की ही बेटी हैं. दरअसल, इस कॉन्ट्रोवर्सी का कारण था शत्रुघन और रीना रॉय का अफ़ेयर. 70-80 के दशक में दोनों ने एक साथ कई फ़िल्में की थीं. दोनों अपने करियर के पीक पर थे, इसी बीच दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे. उनका ये रिलेशनशिप लगभग 7 सालों तक चला था. एक्स्ट्रा मेरिटल अफ़ेयर की थी अफ़वाहें कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शादी के बाद भी शत्रुघन सिन्हा का रीना रॉय के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर था. लेकिन शादी के बाद शत्रु अपनी फ़ैमिली के साथ ख़ुश थे और रीना रॉय ने भी उन्हें भुलाकर पाकिस्तानी क्रिकेटर मोहसिन ख़ान से शादी कर ली थी. जब सोनाक्षी सिन्हा ने फ़िल्म दबंग से डेब्यू किया तब एक बार फिर से उनके इस अफ़ेयर की बातें होने लगीं. लोग तो यहां तक कहने लगे थे कि सोनाक्षी असल में रीना की ही बेटी हैं. ये कॉन्ट्रोवर्सी होने के बाद सोनाक्षी सिन्हा और रीना रॉय दोनों ने ख़ुद इस बात को सिरे से नकार दिया था. सोनाक्षी ने दिया था ये जवाब सोनाक्षी ने एक इंटरव्यू में कहा था- इन बातों में कोई दम नहीं है. मेरा चेहरा अगर किसी से मिलता है, तो वो हैं मेरी मां पूनम सिन्हा. वहीं रीना रॉय भी सोनाक्षी की बात से सहमत नज़र आई थीं. उन्होंने इस कॉन्ट्रोवर्सी को लेकर कहा था कि बॉलीवुड में जब किसी का डेब्यू होता है तो ऐसी बातें होती हैं. ज़ख़्मी फ़िल्म में जब उन्हें लोगों ने देखा था तो सभी रीना को आशा पारेख और नासिर हुसैन की बेटी कहने लगे थे. फ़िल्मी दुनिया में ऐसा होता रहता है और कुछ दिनों बाद सब भूल जाते हैं. ख़ैर बी-टाउन में इस तरह की अफ़वाएं उड़ती रहती हैं, जिनका कोई सिर-पैर ही नहीं होता. इन्हें देखने के बाद हमें हंसकर आगे बढ़ जाना चाहिए, जैसा कि सोनाक्षी और रीना दोनों ही कर चुकी हैं.
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नोटबंदी: फ़िल्म लाइन छोड़ रिक्शा चलाने या दूसरे काम करने पर मजबूर

Date : 09-Nov-2019
मुम्बई 9 नवंबर । हिंदी फ़िल्म का एक बड़ा तबका मानता है कि नोटबंदी से फ़िल्मी जगत को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ये मानते है कि नोटबंदी से कई चीज़ें बेहतर हुई हैं. 8 नवंबर 2016 की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में जो फ़ैसला किया उसका असर समाज के हर वर्ग, हर क्षेत्र पर और हर उद्योग पर हुआ है. इस फैसले का दूरगामी परिणाम भले ही हो, पर फ़िलहाल कई क्षेत्र ऐसे हैं, जिन पर सरकार के इस फ़ैसले का गहरा असर पड़ा है. फ़िल्म जगत उसमें सर्वोपरि है. हिंदी फ़िल्म जगत की बात करें तो ऐसा बहुत बड़ा तबका है जो मानता है कि नोटबंदी के चलते फ़िल्मी जगत को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है, लेकिन वही कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ये मानते हैं कि नोटबंदी के चलते कई चीज़ें सुधरी है. हिंदी फ़िल्म जगत एक ऐसी इंडस्ट्री है, जिसके पास सर्वाधिक दर्शक हैं, पर दर्शकों का एक बड़ा वर्ग कई वजहों से सिनेमाघरों से दूर है और जिसकी वजह है नोटबंदी और सरकार के द्वारा लगाईं गई जीएसटी. जिसकी वजह से कई लोग बेरोजगार और लाचार हो गए हैं. कई मजदूरों को होना पड़ा बेरोज़गार आल इंडियन सिने वर्कर एसोसिएशन के लीडर सुरेश श्यामलाल का कहना है, नोटबंदी को तीन साल हो गया है. इन तीन सालों में वर्कर्स के लिए काम बहुत कम हो गया है. फ़िल्म इंडस्ट्री अनधिकृत तरीके से काम करती है यहां वर्कर्स को रोज़ के काम के पैसे मिलते है. कुछ वर्कर्स है जिन्हें तीन महीने बाद पैसे मिलते है. पहले के मुक़ाबले 70 प्रतिशत फ़र्क़ पड़ गया है अब मजदूरों के पास काम नहीं है क्योंकि अब फ़िल्मों और सीरियल्स की इतनी शूटिंग नहीं होती. जब नोटबंदी हुई थी तब कई फ़िल्मों की शूटिंग बीच में ही रुक गई थी. फ़िल्मों के पैसे डूब गए थे, कई लोगों के हाथों से रोज़गार चला गया था जिसका असर आज तक पड़ा हुआ है. नोटबंदी के बाद 28% एंटरटेनमेंट टैक्स लगा हुआ है जिसके चलते पहले जहां 10 फ़िल्में बनती थी अब एक ही बन रही है. फ़िल्म निर्माता हमसे कहते हैं कि, हम कम पैसे ही दे सकते हैं, हमारे पास ज़्यादा पैसे नहीं हैं तुम लोगों को देने के लिए, हमको पिक्चर भी बनानी है, हीरो को भी देना है और जीएसटी भी भरनी है अगर आप लोग जीएसटी को 12% पर ले आओ तब कुछ हो सकता है. पैसों में हो रही है कटौती सुरेश अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि, इंडस्ट्री का बहुत बुरा हाल है. मुंबई के कई शूटिंग स्टूडियो बंद हो चुके है और कई बंद होने की कतार पर है. मज़दूर फ़िल्म लाइन छोड़ रिक्शा चलाने या दूसरे काम करने पर मजबूर हो गए हैं. पहले 2000 से लेकर 3000 वर्कर को काम मिलता था लेकिन अब 1200 मजदूरों को काम मिलता है. सिर्फ जूनियर आर्टिस्ट ही नहीं लाइटमैन हो या कैमरामैन या फिर स्पोर्ट बॉय सबकी हालत बुरी है. पहले उन्हें अच्छे पैसे मिलते थे लेकिन अब उन्हें 1500 से 2000 दिए जाते है और 16 से 17 घंटे काम कराते है. जो लोग पुराने है उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया क्यूंकि उन्हें ज़्यादा पैसे देने पड़ते थे इस लिए अब नए लोगों को लेते है. कैमरा चलाने से लेकर टेक्निकल का काम संभालने वाले लोगों को भी पहले 3000 दिया जाता था लेकिन अब उन्हें भी कम दिया जाता है और रही बात स्पॉट बॉय और बाक़ी आर्टिस्ट की तो 300 से 400 रूपये ही दिए जाते हैं और काम भी दुगुना कराते हैं. बाक़ी सुविधाएं, जैसे रहने और खाने की स्थिति तो बहुत बेकार हो गयी है. काम ना होने के चलते फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े मजदूर दर-दर भटक रहे है. ये इंडस्ट्री बाहर से जितनी कलरफुल दिखती है अंदर से उतनी की ब्लैक एंड व्हाइट है. सुरेश का कहना है कि फ़िल्म लाइन में ब्लैक का पैसा और दादागीरी बहुत चलती है. कोई नहीं पूछेगा कि ये ब्लैक का पैसा है या व्हाइट का ? जाने माने ट्रेड एनालिस्ट विनोद मिरानी की माने तो नोटबंदी का फ़िल्मों पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा है. ना इसका असर फ़िल्म बनाने वाले प्रोड्यूसर पर हुआ और ना ही टिकट ख़रीदने वाली दर्शकों पर. नोटबंदी के बाद भी कुछ ऐसे काम है, जैसे रेस्टॉरेंट में खाना खाना, सब्ज़ी ख़रीदने से लेकर पिक्चर देखना ये काम कैश में हो सकते हैं और ये आपसे कोई नहीं पूछेगा कि ये ब्लैक का पैसा है या व्हाइट का? विनोद मिरानी की माने तो उनका कहना है कि, फ़िल्म इंडस्ट्री में अब सबकुछ व्हाइट में होने लगा है लेकिन पहले ऐसा नहीं था. पहले पैसों का लेनदेन हुआ करता थी लेकिन अब जबसे स्थापित कंपनी आ गई है तबसे ब्लैक में काम होना बंद हो गया है. आज निर्माता खुद के पैसे से कभी काम नहीं करता पहले के ज़माने में ऐसा होता था लेकिन अब वो काम करते है बड़ी - बड़ी प्रोडक्शन कंपनी के साथ, डिस्ट्रब्यूशन कंपनी , सैटेलाइट चैनल, ओ.टी.टी प्लेटफार्म जैसे ऐमज़ॉन, नेटफ्लिक्स उससे भी अच्छी कमाई हो जाती है. फिर उनके पास म्यूजिक़ कंपनी है वो भी फ़ायदा कराती है. आज कल सिर्फ़ बॉक्स-ऑफ़िस की कमाई तक ही निर्भर नहीं है, फ़िल्म मेकर बाक़ी प्लेटफ़ार्म से भी अच्छा पैसा आ जाता है. मेरी कमाई बढ़ी, क्योंकि मैंने पैसे नहीं बढ़ाये जाने माने एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनोज देसाई जोकि मुंबई के जाने-माने थिएटर मराठा मंदिर, गेट्टी गैलेक्सी और सात और बड़े थिएटर के मालिक हैं. उनका कहना है कि, तीन साल पहले हुए नोटबंदी से कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं हुआ. मराठा मंदिर थिएटर में 25 साल होने जा रहे हैं दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे के, वो आज भी चल रही है इसकी ख़ास वजह है टिकट के दाम जो हमें कभी नहीं बढ़ाए. आज भी हम 18 से 20 रूपये ही लेते हैं. नई फ़िल्म के लिए भी हमारे पैसे ठीक हैं जो ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोग, मध्य वर्ग और उच्च वर्ग लोगों को ध्यान में रखकर तय किए गए हैं . कुछ थिएटर में हमारे पास हज़ार सीट है तो किसी थिएटर में 250 सीटें हैं और सभी थिएटर भरे रहते है. जीएसटी आ गया है और वो हम सबको बर्दाश्त करना पड़ रहा है लेकिन मैं खुश हूं कोई नुकसान नहीं हुआ है. उन्हें उम्मीद है कि आगे जाकर सरकार हमारे बारे में ज़रूर सोचेगी. थिएटर में फ़िल्में लगती है लेकिन मुनाफ़ा नहीं मिलता मनोज देसाई की बात से बिलकुल भी सहमत नहीं है दीपक कुदळे, जो कि आईपीपी (इमीडियेट पास्ट प्रेजिडेंट) हैं सिनेमा ओनर और एक्ज़क्यूटिव एसोसिएशन के. वो कहते हैं कि नोटबंदी के चार महीने तक तो हम इतने परेशान थे कि हमें लगा कि अब तो सिंगल थिएटर पूरी तरह से बंद हो जाएंगे. धीरे-धीरे हम संभले लेकिन हालात आज भी सुधरे नहीं है. वे कहते हैं, नोटबंदी के बाद सब कुछ ऑनलाइन होने लगा और हमारे पास ऑनलाइन पेमेंट वाली सुविधाएं इतनी नहीं थी. अब जाकर आ पाई है लेकिन जहां मल्टीप्लेक्सेस में 70 % ऑनलाइन बुकिंग होती है और 10% ही कैश पेमेंट होती है वही सिंगल थिएटर्स में उल्टा है हमारे यहां कैश पेमेंट करने वाले 70% और ऑनलाइन करने वाले 10% जिसकी वजह है. 10% सर्विस टैक्स जो काट लेती है पेएटीएम और बुक माय शो. जिसके चलते ग़रीब और मिडिल क्लास ऑनलाइन बुकिंग करना नहीं करते पसंद. आज थिएटर में फ़िल्में लगती भी है तो मुनाफ़ा नहीं हो पा रहा है. त्योहारों पर करती है फ़िल्में अच्छा बिज़नेस दीपक कुदळे अपनी बात को समझाते हुए कहते हैं कि, 5 से 6 फिल्में आती है जिसका बिज़नेस अच्छा होता है. दिवाली हो , ईद हो या क्रिसमस त्योहारों पर फ़िल्में चलती है. पूरे साल को देखा जाए तो 13 औसत फ़िल्में आती है, 13 औसत से कम और तेरा सुपर बंपर फ़िल्में होती है. सुपर बंपर को छोड़ जो की 5 से 6 फ़िल्में ही रहती है पूरे साल तो बाक़ी फ़िल्मों के लिए दर्शक ही नहीं आते है. हमें बहुत कुछ करना पड़ता है, कई तरह से लुभाने की कोशिश करते है फिर भी दर्शक नहीं आते है. महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर हम डेवलेपर कंट्रोल रूल बनाने की कोशिश कर रहे है, जिसमें हम इन्हीं सब मुद्दों पर चर्चा करेंगे और अभी कुछ और कानून भी बनाए हैं. जैसे किसी भी प्लेटफार्म पर 2 महीने तक कोई फ़िल्म नहीं दिखा सकते फिर वो सैटेलाइट चैनल हो, या कोई ओटीटी प्लेटफार्म. दम तोड़ रहा है छोटा और स्वतंत्र सिनेमा युसूफ शेख़ जो कि फ़िल्म डिस्ट्रब्यूटर है उनका कहना है कि ,'बॉक्स ऑफ़िस की अच्छी कमाई और बिज़नेस सिर्फ़ बड़ी-बड़ी फ़िल्मों को ही फहीदा दिला रहे हैं छोटे मोटे प्रोडक्शन हाउस जिनकी तदात 100 से भी ज़्यादा है, 100 से भी ज़्यादा स्वतंत्र सिनेमा अब धीरे-धीरे ख़त्म हो रहे है क्यूंकि उनको ख़रीददार नहीं मिल रहे. कोई भी अब स्वतंत्र फ़िल्ममेकर और प्रोड्यूसर पैसा लगाने से डर रहे हैं पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री को सिर्फ़ 10 शक्तिशाली लोग चला रहे है वही फ़िल्में बनाते है और उन्हीं की फ़िल्म चल रही है बाक़ी सबकी हालत ठीक नहीं है. नोटबंदी और जीएसटी के चलते एक छोटी इंडस्ट्री जो थी जो 5 करोड़ के बजट में फ़िल्म बनाया करती थी वो अब ख़त्म हो गयी है. यही वजह है कि अब वो लोग जो चाहे टेक्निकल से जुड़े हों या प्रोडक्शन से अब वो फ़िल्म छोड़ वेब सीरीज़ बना रहे हैं. अब जो फ़िल्ममेकर फ़िल्म नहीं बना सकता वो अब वेब सीरीज़ बना रहा है और छोटा सिनेमा अब पूरी तरह से ख़त्म होता जा रहा है ये है आज का सबसे बड़ा बदलाव.
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प्रेग्नेंट कल्कि बोलीं- मुझसे पूछा जाता है बच्चे का पिता कहाँ है?

Date : 31-Oct-2019
बॉलीवुड एक्ट्रेस कल्कि इन दिनों अपनी प्रेगनेंसी को लेकर काफी सुर्ख़ियों में हैं। कल्कि ने कुछ दिनों पहले ही अपनी प्रेग्नेंसी का खुलासा किया था। लेकिन हाल ही में कल्कि ने कुछ ऐसा बताया जिसे सुनकर आप भी चौंक जाएँगे।दरअसल, हाल ही में कल्कि ने पिंकविला से बात करते हुए अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर बात की। कल्कि से पहले पूछा गया कि जब उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में पता चला तो उनका पहला रिएक्शन क्या था? तो कल्कि ने कहा, मैं शॉक्ड थी कि ये कैसा हो गया? हमने से सब प्लान नहीं किया था। मैंने इसके बाद एक और टेस्ट कराया जिसके बाद ये कंफर्म हुआ कि हाँ मैं सच में प्रेग्नेंट हूँ। फिर मैं बहुत खुश थी।  कल्कि ने फिर ट्रेलिंग को लेकर भी बात की। कल्कि ने बताया कि कई ट्रोलर्स ने उनसे पूछा कि बच्चे का पिता कहाँ है? ये सब पढ़कर मैं काफ़ी परेशान हो जाती थी। लेकिन सच तो यही है कि अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो भी आपको ट्रोल किया जाता है, आप सेलेब नहीं हैं और समाज को लेकर अपनी राय रखती हैं तब भी। 
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रणबीर कपूर और आलिया भट्ट नवंबर में फ्रांस में करेंगे शादी! 

Date : 29-Oct-2019
मुम्बई 29 अक्टूबर । बॉलीवुड की सबसे मशहूर जोड़ी और लाखों दिलों की धड़कन रणबीर कपूर और आलिया भट्ट ना-ना करते भी जल्दी ही शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं. टाइम्स इंटरनेट की एंटरटेनमेंट साइट आईडीवा की खबरों की मानें तो ब्रह्मास्त्र स्टार रणबीर और आलिया की अगले महीने यानी दो हफ्ते के अंदर फ्रांस में शादी होने वाली है और शादी की तैयारियां जोरों पर है. ऋषि कपूर और महेश भट्ट अपने बच्चे की शादी की खबरें पूरी दुनिया से छुपाना चाहते हैं और चाहते हैं कि रणबीर आलिया की शादी बेहद सादगी भरे माहौल में हो. अगले साल रणबीर और आलिया की बहुप्रतीक्षित फिल्म ब्रह्मास्त्र भी रिलीज होने वाली है, जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है. आईडीवा की रिपोर्ट की मानें तो आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की शादी 7-10 नवंबर के बीच हो सकती है और इसके लिए फेमस सेफ रितु डालमिया को कैटरिंग सर्विस के लिए कहा गया है. साथ ही रणबीर कपूर की फेमस सिलेब्रिटी फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी से कई दफा मुलाकात भी हो चुकी है और रणबीर अपनी ड्रेस को लेकर सब्यसाची से डिस्कस कर चुके हैं. इस बीच खबरें ये भी आ रही हैं कि आलिया भट्ट छुट्टी मनाने किसी अंजान जगह पर चली गई हैं, जिसके बाद खबरें और पुख्ता हो गई हैं कि जल्द ही वो घड़ी आने वाली है, जिसका बॉलीवुड स्टार्स और करोड़ों फैंस को इंतजार है आपको बता दूं कि रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी बॉलीवुड की सबसे बड़ी शादी मानी जा रही है और इनदोनों के करोड़ों फैंस को इसका लंबे समय से इंतजार है. बीते दिनों रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी का फेक इन्विटेशन कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. हालांकि रणबीर और आलिया हमेशा शादी की खबरों पर चुप्पी साधे रहे. यहां बताना जरूरी है कि फ्रांस हमेशा से बॉलीवुड स्टार्स की पसंदीदा जगह है और फ्रांस में ही बॉलीवुड के हॉटेस्ट कपल रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण ने शादी की थी. वहीं अनुष्का शर्मा और विराट कोहली ने इटली में शादी की थी.
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औरत को ख़ूबसूरत शब्द के भार से लादने की क्या ज़रूरत: नंदिता दास

Date : 22-Oct-2019
नई दिल्ली 22 अक्टूबर । भारतीय समाज में त्वचा के रंग को लेकर फैले भेदभाव के ख़िलाफ़ मुखर रहने वालीं बॉलीवुड अभिनेत्री नंदिता दास दिल्ली में 100 वीमेन- सीज़न 2019 की फ़्यूचर कॉन्फ़्रेंस में आए लोगों के साथ नंदिता ने फ़िल्म इंडस्ट्री में रंग को लेकर होने वाले भेदभाव पर अपने निजी अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि सांवले अभिनेता-अभिनेत्रियों को कमर्शियल सिनेमा में कैसी दिक्कतें आती हैं. नंदिता कहा कि फ़िल्मों में शिक्षित, उच्चवर्ग की महिला की भूमिका के लिए उनसे मेकअप के माध्यम से त्वचा को गोरा करने के लिए कहा जाता है.उन्होंने कहा, लेकिन जब मुझे कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि वाला रोल करना होता है तब इस बात के लिए मेरी तारीफ़ होती है कि मैं कितनी सांवली और ख़ूबसूरत हूं. उन्होंने कहा कि सांवले अभिनेता कमर्शियल फ़िल्मों में गोरे दिखते हैं जबकि रियलिस्टिक फ़िल्मों में डार्क दिखते हैं. नंदिता ने कहा, अगर कोई एक्टर गोरा हो तो रियलिस्टिक सिनेमा में या फिर ग़रीब या ग्रामीण दिखाने के लिए उसे सांवला दिखाया जाता है. गोरेपन का जुनून नंदिता दास ने कहा कि भारत में गोरे रंग प्रति जुनून को पूरी तरह से सामान्य बना दिया गया. देश की आधे से ज़्यादा आबादी का इसी जुनून के कारण प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा. नंदिता ने कहा, भारत में इतने सारे रंग हैं लेकिन जुनून सिर्फ़ गोरेपन को लेकर है. 80-90 प्रतिशत लोगों के रंग की स्किन कही दिखती ही नहीं. गोरे रंग के प्रति जुनून कितना गहरा है, उसे लेकर एक उदाहरण देते नंदिता ने बताया कि इस विषय पर एक लेख में एक जगह उनकी जो तस्वीर छापी गई थी, उसमें उन्हें फ़ोटोशॉप के माध्यम से गोरा कर दिया गया था. नंदिता ने कहा कि पहले गोरापन बढ़ाने वाले विज्ञापन अब नहीं दिखते मगर उसमें चालाकी की जाने लगी है. उन्होंने कहा, एडवर्टाइज़मेंट एसोसिएशन की गाइडलाइन्स सख़्त हुई हैं. मगर अब विज्ञापनों में गोरेपन की जगह ग्लोइंग और ब्राइटनिंग स्किन ने ले ली है. हालांकि वह संतोष जताती हैं कि हाल के सालों में जागरूकता बढ़ी है. उन्होंने कहा, युवा महिलाएं कभी एयरपोर्ट या बुकशॉप पर मिलती हैं तो इस बारे में बात करती हैं और त्वचा के रंग को लेकर होने वाले भेदभाव को लेकर किए जा रहे काम को लेकर शुक्रिया कहती हैं. लोग ऐसा भी पूछते हैं कि कैसे डार्क स्किन होने के बावजूद आप कॉन्फ़िडेंट हैं. इससे पता चलता है कि कैसे त्वचा के रंग को आत्मविश्वास और योग्यता से जोड़ दिया गया है. उन्होंने कहा, गांव में देखा कि कुछ महिलाएं वे क्रीम इस्तेमाल कर रही थीं जो एक्यपायर हो चुकी थी. हमें समाज में पहले से ख़ूबसूरती के बारे बताया जाता है कि रंग कैसा होना चाहिए, क़द क्या होना चाहिए और फिर हम ख़ुद को उन पैमानों पर ढालने की कोशिश करते हैं. क्यों महिलाओं को ख़ूबसूरत जैसे शब्द के भार से लादा जाए? हमें हर तरह की विविधता का सम्मान करना चाहिए. अच्छा दिखना ज़रूरी है? नंदिता ने कहा गोरे रंग को ख़ूबसूरती का पैमाना बना दिया गया है. उन्होने पूछा, अच्छा दिखने में कोई बुराई नहीं कि लेकिन क्या यह आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए? बॉलीवुड अभिनेत्री ने लोगों के सामने कई विचार योग्य सवाल खड़े किए. एक मौक़ा ऐसा आया जब उन्होंने दर्शकों से पूछा, अगर सांवली महिलाएं प्रतिभाशाली न हों तो क्या वे कहीं टिकी रह सकती हैं? उनकी तुलना आप किसी गोरे रंग वाली महिला से करें और फिर सोचें. क्या सांवली महिलाएं सर्वाइव कर पाएंगी? 2030 में महिलाओं की अगुवाई वाले भविष्य को लेकर अपना विज़न रखते हुए नंदिता ने सबसे पहले पूर्वग्रहों को दूर करने पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को फ़ैसले लेने वाली भूमिका में आना होगा मगर अंगूठा छाप वाली संस्कृति ख़त्म करनी होगी. उन्होंने कहा कि अक्सर वे पुरुष नेता की पत्नी या रिश्तेदार के तौर पर सिर्फ़ परोक्ष रूप से ही ऐसी भूमिकाओं में दिखती हैं. उन्होंने इसके लिए पंचायती राज का उदाहरण दिया. नंदिता ने यह भी कहा कि समाज में फैली नफ़रत और हिंसा को ख़त्म किया जाना चाहिए और ऐसे अधिकतर मामलों में पुरुषों का दोष ज़्यादा रहता है. उन्होंने कहा, लिंचिंग, युद्ध, रेप, दंगों और शोषण की भरमार है. अगर अधिक महिलाएं सक्रिय भूमिका में होंगी तो दुनिया में पहले से अधिक शांति होगी.
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मोदी के घर जुटीं बॉलीवुड की हस्तियां

Date : 20-Oct-2019
नई दिल्ली 20 अक्टूबर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली में शाहरुख़ खान, आमिर ख़ान और कंगना रनौत समेत सिनेमा और कला जगत के दिग्गज सितारों से मुलाक़ात की और उनसे गांधी के विचारों पर चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने इन हस्तियों से सिनेमा के ज़रिए महात्मा गांधी के विचारों और उनके जीवन मूल्यों का प्रचार-प्रसार करने की अपील की, ताकि युवा, गांधी के विचारों से जुड़ सकें. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी फ़िल्में, संगीत और नृत्य लोगों और समाजों को जोड़ने का एक बहुत अच्छा ज़रिया बन गया है. इस कार्यक्रम में अभिनेता शाहरुख खान, आमिर खान, कंगना रनौत, जैकलीन फर्नांडिस, डायरेक्टर इम्तियाज़ अली, एकता कपूर, अनुराग बसु, बोनी कपूर समेत कई दिग्गज शामिल हुए थे.
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लारा दत्ता ने शेयर की प्रियंका चोपड़ा और दिया मिर्जा की 20 साल पुरानी फोटो

Date : 23-Sep-2019
नई दिल्ली 23 सितम्बर । बॉलीवुड एक्ट्रेस लारा दत्ता ने अपने इंस्टाग्राम पर 20 साल पुरानी फोटो शेयर की है। 20 साल पुरानी इस फोटो के साथ लारा ने कई यादों को ताज़ा कर दिया है। ये फोटो साल 2000 की जब उन्होंने मिस यूनिवर्स का खिताब जीता था। एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम पर जो फोटो शेयर की है उसमें वो, प्रियंका चोपड़ा और दिया मिर्जा नजर आ रही हैं। फोटो में तीनों एक्ट्रेसेज ने अपनी-अपनी कामयाबी का ताज पहना हुआ है। यानी लारा ने मिस यूनिवर्स का ताज, प्रियंका चोपड़ा ने मिस वर्ल्ड का ताज और दिया मिर्जा ने मिस एशिया पैसिफिक इंटरनेशनल का ताज पहना हुआ है। साल 2000 में ही इन तीन अभीनेत्रियों ने अलग-अलग कैटेगरी में ये अवॉर्ड जीते थे। फोटो शेयर करते हुए एक्ट्रेस ने प्रियंका और दिया की तारीफ करते हुए एक कैप्शन भी लिखा है। कैप्शन में लारा दत्ता ने लिखा, ‘कुछ वक्त पहले मैंने 20 साल पुरानी ये फोटो शेयर की थी। अब मुझे इंस्टाग्राम पर ये एडिट तस्वीर मिली है जो Then & Now है। मुझे ये बहुत पसंद आई। 20 साल हो गए दोस्तों। इस कैप्शन के साथ लारा दत्ता ने प्रियंका और दिया को टैग भी किया है।
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पोर्नहब रिवेंज पोर्न से कमा रहा भारी मुनाफ़ा

Date : 17-Sep-2019
दुनिया की सबसे बड़ी पोर्न वेबसाइट पोर्नहब के मालिक रिवेंज पोर्न के ज़रिए अच्छी कमाई कर रहे हैं और शिकायत के बाद भी ऐसे वीडियो को नहीं हटा रहे हैं. रिवेंज पोर्न का मतलब होता है कि किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उनकी बेहद निजी अंतरंग तस्वीरों और वीडियो को ऑनलाइन या किसी और तरीके से फैला दिया जाए. इसका मकसद उस व्यक्ति को परेशान करना और शर्मिंदा करना होता है. अक्सर ऐसा करने वाला उस महिला का पूर्व साथी होता है, लेकिन कई बार ये चीज़ें पीड़ित के डिजिटल आर्काइव या आई-क्लाउड से भी चुराई गई होती हैं. एक महिला सोफ़ी ने बताया कि उनका एक इसी तरह का वीडियो पोर्नहब वेबसाइट पर डाल दिया गया था. जब उन्हें पता चला कि इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं, तो उन्हें बड़ा धक्का लगा. कई बार बहुत सालों पहले बनाए गए वीडियो को रिवेंज पोर्न के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पीड़ितों की ज़िंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ता है कैंपेन समूह #NotYourPorn के मुताबिक इस तरह की सामग्री से पोर्नहब के मालिक माइंडगीक को बहुत विज्ञापन मिले. जिससे उन्होंने भारी मुनाफ़ा कमाया. हालांकि पोर्नहब का कहना है कि वो रिवेंज पोर्न की कड़ी निंदा करता है. वेबसाइट ने कहा कि उनकी एंटी-रिवेंज-पोर्न पॉलिसी पूरी इंडस्ट्री में सबसे सख़्त है. उनके मुताबिक उन्हें सोफ़ी का कोई मेल नहीं मिला, जिसमें उन्होंने उनके वीडियो को हटाने की बात कही है. लेकिन अब वो उनके संपर्क में हैं और इस मसले को सुलझाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं. एक बार इंटरनेट पर डाले जाने के बाद, वीडियो को फैलने से रोकना बहुत मुश्किल होता है सोफ़ी (बदला हुआ नाम) - ने बताया कि 18 महीने पहले वो एक दिन अपने परिवार वालों के साथ कहीं बाहर गई हुई थीं. जब उन्हें वक्त मिला तो उन्होंने मिस्ड कॉल और मैसेज देखने के लिए अपना फोन चेक किया. उनकी बहन के पार्टनर को पोर्नहब पर उनकी कुछ वीडियो मिली थीं. उनमें से एक वीडियो तो टॉप 10 चार्ट में पहुंच गई थी और लाखों लोग उसे देख चुके थे. सोफ़ी कहती हैं, मैं बहुत हैरान, शर्मिंदा और दुखी हो गई. सोफ़ी ने अपने पूर्व साथी के साथ छह वीडियो बनाए थे - लेकिन दोनों कई साल पहले अलग हो गए थे और सोफी ने किसी को भी वो वीडियो ऑनलाइन डालने पर सहमति नहीं दी थी. जैसे ही उन्हें अपने वीडियो पोर्नहब पर होने के बारे में पता चला, उसके एक हफ्ते के अंदर उन्हें हटा दिया गया. लेकिन तबतक किसी ने उन वीडियो को डाउनलोड करके करीब 100 वीडियो क्लिप बना ली थी और उन्हें फिर से वेबसाइट पर अपलोड कर दिया था. लेकिन जब सोफ़ी ने इस बारे में वेबसाइट से शिकायत की तो उनके मुताबिक वहां से उन्हें ज़्यादा मदद नहीं मिली सोफ़ी को किसी दूसरी कंपनी से संपर्क करने के लिए कहा गया, जो पोर्नहब से वीडियो हटाने की रिक्वेस्ट को हैंडल करती है. लेकिन सोफी कहती हैं कि उन्हें वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला. वो पुलिस के पास भी गईं. अबतक किसी पर भी मामला दर्ज नहीं किया गया है. #NotYourPorn से जुड़ी कैट कहती हैं कि पोर्नहब पर रिवेंज पोर्न को अनुभवहीन लोगों द्वारा बनाए गई या घर पर शूट की गई सामाग्री को तौर पर पेश किया जाता है. उनके मुताबिक ये दोनों ही तरह के वीडियो खासे लोकप्रिय हैं और उनसे वेबसाइट को खूब विज्ञापन मिलते हैं. सोफ़ी चाहती हैं कि वेबसाइट को जैसे ही पता चले कि कोई वीडियो रिवेंज पोर्न है, वैसे ही उसे हटा देना चाहिए, ताकि लोगों को उसे डाउनलोड करके फिर से अपलोड करने का मौका ना मिले. एक पीड़ित ने कहा, आप नहीं चाहते कि आपके बच्चे, पति, परिवार और दोस्त आपको ऐसे देखें. जबतक सोफ़ी को पता चला कि उनके वीडियो ऑनलाइन डाल दिए गए हैं, तबतक वो एक नए रिश्ते में आ चुकी थीं. इस घटना ने उनके नए रिश्ते पर असर डाला. उनके नए साथी और उनके बीच तनाव पैदा हो गया. सोफ़ी ने बताया कि उनके साथी के दोस्त पोर्नहब पर डाले गए उनके वीडियो की वजह से उनके साथी का मज़ाक उड़ाते थे. सोफ़ी की एक किशोर बेटी भी है. सोफ़ी के मुताबिक वीडियो के बारे में पता चलने के बाद से उसका व्यवहार उनके प्रति बदल गया है. पोर्नहब के उपाध्यक्ष कोरी प्राइस ने कहा, जो सामग्री हमारी कंपनी की पॉलिसी का उल्लंघन करती है, उसके बारे में पता लगने पर हम तुरंत उसे हटा देते हैं. इसमें वो वीडियो शामिल हैं, जो किसी की सहमति के बिना ऑनलाइन डाले गए होते हैं. उन्होंने कहा, 2015 में अपने फैन्स की सुरक्षा को और सुनिश्चित करने के लिए, हमने रिवेंज पोर्न के ख़िलाफ़ आधिकारिक तौर पर कड़ा कदम उठाया. हम मानते हैं कि रिवेंज पोर्न यौन उत्पीड़न का एक रूप है. लोग एक आसान फॉर्म भरकर बिना सहमति वाले वीडियो को हटवा सकते हैं. हम एक अत्याधुनिक थर्ड पार्टी डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग सॉफ्टवेयर का भी इस्तेमाल करते हैं. ये सॉफ्टवेयर नए वीडियो को स्कैन करता है और देखता है कि ये किसी अनाधिकृत सामग्री से तो मैच नहीं कर रहा. इससे हम ये सुनिश्चित कर पाते हैं कि ओरिजनल वीडियो फिर से वेबसाइट पर ना डाला जा सके.
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तीसरी शादी करने चला था, पहली दो पत्नियों ने जमकर कूटा

Date : 11-Sep-2019
11 सितम्बर। तमिलनाडु के तिरुपुर में एक शख्स को दो पत्नियों के होने के बावजूद तीसरी शादी करने की कोशिश करना बहुत महंगा पड़ा. दोनों पत्नियों ने उसकी जमकर धुनाई की. ये वाक्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया है. पहले कर चुका है दो शादियां 26 वर्षीय एस दिनेश रासिपलायम की एक निजी कंपनी में पैटर्न मेकर के तौर पर नौकरी करता है. दिनेश ने तिरुपुर की प्रियदर्शिनी के साथ 2016 में शादी की थी. आरोप है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद वो प्रियदर्शिनी को अपशब्द कहने के साथ मारने-पीटने लगा. प्रियदर्शिनी आखिर कब तक ये बर्दाश्त करती और वो दिनेश को छोड़कर अपने मायके में जाकर रहने लगी. दिनेश ने अप्रैल 2019 में मैट्रिमोनियल साइट के जरिए अनुप्रिया से शादी की. अनुप्रिया पहले से तलाकशुदा थी. अनुप्रिया से भी शादी के बाद दिनेश की हरकतें नहीं बदलीं. आरोप है कि उसने अनुप्रिया से भी वैसा ही बर्ताव किया जैसा कि प्रियदर्शिनी के साथ करता था. अपशब्द, मारने-पीटने के साथ वो अनुप्रिया को दहेज के लिए ताने देता था. अनुप्रिया भी जल्दी ही उसे छोड़कर मायके चली गई. पिटाई से पहले कंपनी के बाहर दोनों महिलाओं ने किया प्रदर्शन बीते हफ्ते अनुप्रिया और प्रियदर्शिनी को पता चला कि दिनेश एक बार फिर शादी की तैयारी कर रहा है और मैट्रिमोनियल साइट के जरिए वधू ढूंढ रहा है. सोमवार को अनुप्रिया और प्रियदर्शिनी, दोनों उस निजी कंपनी के बाहर पहुंच गईं जहां दिनेश काम करता है. दोनों ने दिनेश से मिलवाने के लिए कहा. निजी कंपनी ने उन्हें अपने परिसर में दाखिल होने की इजाजत नहीं दी. दोनों महिलाओं ने दिनेश को बाहर बुलाने के लिए कंपनी के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया. दिनेश जैसे ही गेट से बाहर आया, दोनों महिलाओं ने उसे पीटना शुरू कर दिया.     पुलिस कर रही है जांच दोनों महिलाओं ने दिनेश के खिलाफ सुलुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है
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