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एनडीटीवी पर सीबीआई ने एक और एफ़आईआर दर्ज की

Date : 21-Aug-2019
नई दिल्ली 21 अगस्त । केंद्रीयअन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने समाचार चैनल एनडीटीवी के प्रमोटर प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय के ख़िलाफ़ विदेशी निवेश से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मुक़दमा दर्ज किया है. प्रणय रॉय और राधिका रॉय एनडीटीवी के संस्थापक भी हैं. एनडीटीवी ने इन नए आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय पहले से ही प्रणय रॉय और एनडीटीवी के ख़िलाफ़ कई आरोपों में जांच कर रहे हैं. हाल ही में प्रणय और उनकी पत्नी राधिका को विदेश जाने से रोक दिया गया था. वहीं एनडीटीवी ने एक बयान जारी कर सभी आरोपों को खारिज किया है. एनडीटीवी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, स्वतंत्र प्रेस के निरंतर उत्पीड़न के रूप में एनडीटीवी पर सीबीआई ने एक नया मुक़दमा दर्ज किया है. बयान में कहा गया, ये मुक़दमा एनडीवीटी के ग़ैर-समाचार बिज़नेस में 15 करोड़ डॉलर के विदेशी निवेश से जुड़ा है. ये निवेश बड़े अमरीकी समूह जनरल इलेक्ट्रिक की कंपनी एनबीसीयू ने किया था. एनडीटीवी ने अपने बयान में कहा है कि अभी तक एजेंसियों को एनडीटीवी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं मिला है. एफ़आईआर में दावा किया गया है, साल 2004 से 2010 के बीच एनडीटीवी लिमिटेड ने 32 सहायक कंपनियां दुनिया के कई देशों में शुरू की, अधिकतर को हालैंड, ब्रिटेन, दुबई, मलेशिया और मॉरीशस जैसे टेक्स हेवेन देशों में खड़ा किया गया. एफ़आईआर के मुताबिक इनमें से अधिकतर कंपनियों ने कोई व्यापारिक लेनदेन नहीं किया और ये सिर्फ़ विदेश से पैसा लाने के मक़सद से शुरू की गईं थीं. एफ़आईआर में ये भी दावा किया गया है कि कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों ने इन कंपनियों में निवेश किया. एफ़आईआर में दावा किया गया है, अज्ञात सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार का पैसा एनडीटीवी लिमिटेड के ज़रिए निवेश किया गया. वहीं एनडीटीवी ने इस नई एफ़आईआर को स्वतंत्र प्रेस का उत्पीड़न बताते हुए ये भी कहा है कि स्वतंत्र प्रेस को दबान के ये प्रयास कामयाब नहीं होंगे. कंपनी के बयान में कहा गया, ये किसी कंपनी या व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता को बरकरार रखने की एक लंबी लड़ाई है. एनडीटीवी ने अपने बयान में कहा है कि उसे देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और भारत प्रेस स्वतंत्रता के लिए जाना जाता रहा है.
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गुजरात के IAS अधिकारी मेरी बेटी के पिता हैं..

Date : 21-Aug-2019
नई दिल्ली 21 अगस्त । दिल्ली की एक महिला ने आठ माह की अपनी बेटी की डीएनए जांच कराने की मांग की ताकि साबित किया जा सके कि गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी गौरव दहिया उसके जैविक पिता हैं. महिला ने आईएएस अधिकारी पर द्विविवाह और धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे. महिला गांधीनगर पहुंची और पुलिस महानिदेशक शिवानंद झा और गुजरात महिला आयोग की अध्यक्ष लीलाबेन अंकोलिया से मुलाकात की. राज्य सरकार ने 2010 बैच के आईएएस अधिकारी को 14 अगस्त को निलंबित कर दिया था और कदाचार और नैतिक पथभ्रष्टता के गंभीर आरोपों के लिये उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी थी. बता दें, गुजरात सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी गौरव दहिया को दो शादियां करने और धोखाधड़ी के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. दिल्ली की एक महिला ने उन पर ये आरोप लगाए थे. राज्य सरकार ने यहां जारी बयान में कहा कि इन आरोपों को लेकर दहिया को अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा निलंबित आईएएस अधिकारी दहिया ने आरोप लगाया है कि उक्त महिला ने हनी ट्रैप से उन्हें फंसाया और ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया.
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रातो रात लगा दी वीर सावरकर की मूर्ति

Date : 21-Aug-2019
नई दिल्ली 21 अगस्त । दिल्ली विश्वविद्यालय में रातोंरात वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमाएं स्थापित करने का मामला सामने आया है. न्यूज एजेंसी के मुताबिक़, ये मूर्तियां डूसू अध्यक्ष शक्ति सिंह की ओर से स्थापित की गई हैं. इन्हें किसी दूसरे कार्यक्रम के बहाने टेंट में छिपाकर लाया गया और आर्ट्स फ़ैकल्टी के बार लगा दिया गया. एनएसयूआई और आईसा ने इस क़दम का विरोध करते हुए एबीवीपी पर हमला बोला है. एजेंसी के मुताबिक़, डीयू प्रशासन ने डूसू अध्यक्ष को मूर्तियां हटाने के लिए कहा है और ऐसा न करने पर एफ़आईआर दर्ज करवाई जाएगी
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अफ़ेयर खोजते शादीशुदा मर्दों से निपटने के लिये सरकार कानून बनाने पर विचार कर रही है

Date : 20-Aug-2019
नई दिल्ली 20 अगस्त 2019। तीन तलाक पर कानून के बाद शादी शुदा मर्दो के अन्य महिलाओं से अनैतिक रिश्तों पर कड़ा कानून बनाने पर विचार विमर्श हो रहा है। भारत में विवाहेत्तर संबंधों की खोज में निकले आदमियों की संख्या बढ़ती जा रही है जो लड़कियों के सामने अविवाहित होने का ढोंग करते हैं. अब भारत सरकार इनसे निपटने के लिए एक योजना लेकर आने वाली है .
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कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता, वंदना

Date : 20-Aug-2019
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता जिसे भी देखिए वो अपने आप में गुम है ज़ुबां मिली है मगर हमज़ुबां नहीं मिलता" अगर आपसे पूछा जाए कि 1981 में आई इस फ़िल्मी गीत का संगीतकार कौन है तो जवाब होगा मशहूर संगीतकार ख़य्याम. वही संगीतकार ख़य्याम जिन्होंने 1947 में शुरू हुए अपने फ़िल्मी करियर के पहले पाँच साल शर्मा जी के नाम से संगीत दिया. भारतीय सिनेमा के दिग्गज संगीतकार मोहम्मद ज़हूर ख़य्याम हाशमी का सोमवार रात साढ़े नौ बजे 93 साल की उम्र में निधन हो गया. शर्मा जी और वर्मा जी ख़य्याम संगीतकार रहमान के साथ मिलकर संगीत देते थे और जोड़ी का नाम था शर्मा जी और वर्मा जी. वर्मा जी यानी रहमान पाकिस्तान चले गए तो पीछे रह गए शर्मा जी. बात 1952 की है. शर्मा जी कई फ़िल्मों का संगीत दे चुके थे और उन्हें ज़िया सरहदी की फ़िल्म फ़ुटपाथ का संगीत देने का मौक़ा मिला. दिलीप कुमार पर फ़िल्माया गया गाना था -शाम-ए-ग़म की क़सम आज ग़मगी हैं हम, आ भी जा, आ भी जा आज मेरे सनम... दूरदर्शन की एक पुरानी इंटरव्यू में ख़य्याम बताते हैं, एक दिन बातों का दौर चला तो ज़िया सरहदी ने पूछा कि आपका पूरा नाम क्या है. मैंने कहा मोहम्मद ज़हूर ख़य्याम. तो उन्होंने कहा कि अरे तुम ख़य्याम नाम क्यों नहीं रखते. बस उस दिन से मैं ख़य्याम हो गया. इन्हीं ख़य्याम ने फ़िल्म कभी-कभी, बाज़ार, उमराव जान, रज़िया सुल्तान जैसी फ़िल्मों में बेहतरीन संगीत दिया. 18 फ़रवरी 1927 को पंजाब में जन्मे ख़य्याम के परिवार का फ़िल्मों से दूर दर तक कोई नाता नहीं था. उनके परिवार में कोई इमाम था तो कोई मुअज़्ज़िन. लेकिन उस दौर के कई नौजवानों की तरह ख़य्याम पर केएल सहगल का नशा था. वो उन्हीं की तरह गायक और एक्टर बनना चाहते थे. इसी जुनून के चलते वे छोटी उम्र में घर से भागकर दिल्ली चचा के पास आ गए. घर में ख़ूब नाराज़गी हुई लेकिन फिर बात इस पर आकर टिकी कि मशहूर पंडित हुसनलाल-भगतराम की शागिर्दी में वो संगीत सीखेगें. कुछ समय सीखने के बाद वे लड़कपन के नशे में वो क़िस्मत आज़माने मुंबई चले गए लेकिन जल्द समझ में आया कि अभी सीखना बाक़ी है संगीत सीखने की चाह उन्हें दिल्ली से लाहौर बाबा चिश्ती (संगीतकार ग़ुलाम अहमद चिश्ती) के पास ले गई जिनके फ़िल्मी घरानों में ख़ूब ताल्लुक़ात थे. लाहौर तब फ़िल्मों का गढ़ हुआ करता था. बाबा चिश्ती के यहाँ ख़य्याम एक ट्रेनी की तरह उन्हीं के घर पर रहने लगे और संगीत सीखने लगे. दूरदर्शन समेत अपनी कई इंटरव्यू में ख़य्याम ये क़िस्सा ज़रूर सुनाते हैं, एक बार बीआर चोपड़ा बाबा चिश्ती के घर पर थे और चिश्ती साहब सबको तनख़्वाह बाँट रहे थे. लेकिन बीआर चोपड़ा ने देखा कि मुझे पैसे नहीं मिले. चोपड़ा साहब के पूछने पर बाबा चिश्ती ने बताया कि इस नौजवान के साथ तय हुआ है कि ये संगीत सीखेगा और मेरे घर पर रहेगा पर पैसे नहीं मिलेंगे. लेकिन बीआर चोपड़ा ने कहा कि मैंने देखा है कि सबसे ज़्यादा काम तो यही करता है. बस बीआर चोपड़ा ने उसी वक़्त मुझे 120 रुपए महीने की तनख़्वाह थमाई और चोपड़ा ख़ानदान के साथ रिश्ता बन गया. ख़य्याम ने कई संगीतकारों की तुलना में कम काम किया लेकिन जितना भी किया बेमिसाल माना जाता है. एक संगीत प्रेमी के नाते जब भी मैं उनके गाने सुनती हूँ तो उनमें एक अजब सा ठहराव, एक संजीदगी पाती हूँ जिसे सुनकर महसूस होता है मानो कोई ज़ख़्मों पर मरहम लगा रहा हो या थपकी देते हुए हौले हौले सहला रहा हो. फिर चाहे आख़िरी मुलाक़ात का दर्द लिए फ़िल्म बाज़ार का गाना- देख लो आज हमको जी भरके हो. या उमराव जान में प्यार के एहसास से भरा गाना हो ज़िंदगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है मुझे, ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें ..... इसके लिए ख़य्याम मेहनत भी ख़ूब करते थे. मसलन उनकी सबसे बेहतरीन पेशकश में से एक, 1982 की फ़िल्म, उमराव जान को ही लीजिए. ये एक उपन्यास उमराव जान अदा पर आधारित फ़िल्म थी जिसमें 19वीं सदी की एक तवायफ़ की कहानी है. ख़य्याम ने इस फ़िल्म का संगीत देने के लिए न सिर्फ़ वो उपन्यास पूरा पढ़ा बल्कि दौर के बारे में बारीक से बारीक जानकारी हासिल की- उस समय की राग-रागनियाँ कौन सी थीं, लिबास, बोली आदि. एक वीडियो इंटरव्यू में ख़य्याम बताते हैं, बहुत पढ़ने-लिखने के बाद मैंने और जगजीत जी (उनकी पत्नी) ने तय किया कि उमराव जान का सुर कैसा होगा. हमने आशा भोंसले को उनके सुर से छोटा सुर दिया. मैंने अपनी आवाज़ में उन्हें गाना रिकॉर्ड करके दे दिया. लेकिन रिहर्सल के दिन आशा जी ने जब गाया तो काफ़ी परेशान दिखीं और कहा कि ये उनका सुर नहीं है. मैंने उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की मुझे आशा का नहीं उमराव जान का सुर चाहिए. इस पर उनका जवाब था पर आपकी उमराव तो गा ही नहीं पा रही. फिर हम दोनों के बीच एक समझौता हुआ. मैंने कहा कि हम दो तरह से गाना रिकॉर्ड करते हैं. आशा ने मुझे क़सम दिलाई कि मैं उनके सुर में भी गाना रिकॉर्ड करूँगा और मैंने उन्हें क़सम दिलाई कि वो मेरे वाले सुर में पूरी शिद्द्त से गाएँगी. आशा ने उमराव वाले सुर में गाना गाया और वो इतना खो गईं कि वो ख़ुद भी हैरान थीं. बस बात बन गईं. उमराव जान के लिए ख़य्याम और आशा भोंसले दोनों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. अपने 88वें जन्मदिन पर दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था उमराव जान का संगीत देने से पहले वो बहुत डर गए थे क्योंकि उससे कुछ समय पहले ही फ़िल्म पाकिज़ा आई थी जो संगीत में एक बेंचमार्क थी. साथी कलाकारों के साथ संगीत को लेकर ऐसे कई क़िस्से ख़य्याम के साथ हुए. मान मनुहार से वे अपने गायकों को मना लिया करते पर थे वो अपनी धुन के पक्के. अतीत में चलकर ख़य्याम के फ़िल्मी सफ़र की बात करें तो उन्होंने 1947 में अपना सफ़र शुरु किया हीर रांझा से. रोमियो जूलियट जैसी फ़िल्मों में संगीत दिया और गाना भी गाया. 1950 में फ़िल्म बीवी के गाने अकेले में वो घबराते तो होंगे से लोगों ने उन्हें जाना जो रफ़ी ने गाया था. 1953 में आई फ़ुटपाथ से ख़य्याम को पहचान मिलने लगी और उसके बाद तो ये सिलसिला चल निकला. 1958 में फ़िल्म फिर सुबह होगी में मुकेश के साथ वो सुबह कभी तो आएगी बनाया , 1961 में फ़िल्म शोला और शबनम में रफ़ी के साथ जाने क्या ढूँढती रहती हैं ये आँखें मुझमें रचा तो 1966 की फ़िल्म आख़िरी ख़त में लता के साथ बहारों मेरा जीवन भी सवारो लेकर आए. दिलचस्प बात ये है कि राजकपूर के साथ उन्हें फिर सुबह होगी मिलने की एक बड़ी वजह थी कि वो ही ऐसे संगीत निर्देशक थे जिन्होंने उपन्यास क्राइम एंड पनिशमेंट पढ़ी थी जिस पर वो फ़िल्म आधारित थी. ख़य्याम ने 70 और 80 के दशक में कभी-कभी, त्रिशूल, ख़ानदान, नूरी, थोड़ी सी बेवफ़ाई, दर्द, आहिस्ता आहिस्ता, दिल-ए-नादान, बाज़ार, रज़िया सुल्तान जैसी फ़िल्मों में एक से बढ़कर एक गाने दिए. ये शायद उनके करियर का गोल्डन पीरियड था प्रेम कहानी ख़य्याम के जीवन में उनकी पत्नी जगजीत कौर का बहुत बड़ा योगदान रहा जिसका ज़िक्र करना वो किसी मंच पर नहीं भूलते थे. जगजीत कौर ख़ुद भी बहुत उम्दा गायिका रही हैं. चुनिंदा हिंदी फ़िल्मों में उन्होंने बेहतरीन गाने गाए हैं जैसे बाज़ार में देख लो हमको जी भरके या उमराव जान में काहे को बयाहे बिदेस.. अच्छे ख़ासे अमीर सिख परिवार से आने वाली जगजीत कौर ने उस वक़्त ख़य्याम से शादी की जब वो संघर्ष कर रहे थे. मज़हब और पैसा कुछ भी दो प्रेमियों के बीच दीवार न बन सका. दोनों की मुलाक़ात तो संगीत के सिलसिले में हो चुकी थी लेकिन जब मुंबई की एक संगीत प्रतियोगिता में जगजीत कौर का चयन हुआ तो उन्हें ख़य्याम के साथ काम करने का मौक़ा मिला और वहीं से प्रेम कहानी शुरु हुई. जगजीत कौर ख़ुद भले फ़िल्मों से दूर रहीं लेकिन ख़य्याम की फ़िल्मों में जगजीत कौर उनके साथ मिलकर संगीत पर काम किया करती थीं. दोनों के लिए वो बहुत मुश्किल दौर था जब 2013 में ख़य्या के बेटे प्रदीप की मौत हो गई. लेकिन हर मुश्किल में जगजीत कौर ने ख़य्याम का साथ दिया. दोनों की प्रेम कहानी देखकर ऐसा लगता है कि जगजीत कौर ने ख़य्याम के लिए ही उनके निर्देशन में ये गाना गाया हो तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो तुम्हें ग़म की क़सम, इस दिल की वीरानी मुझे दे दो मैं देखूँ तो सही दुनिया तुम्हें कैसे सताती है कोई दिन के लिए अपनी निगहबानी मुझे दे दो जब छुड़ाया बदक़िस्मती का टैग यहाँ 1976 की फ़िल्म कभी-कभी के ज़िक्र के ब़गौर ख़य्याम पर बात अधूरी है.  इंटरव्यू में ख़य्याम ने बताया था, यश चोपड़ा मुझसे अपनी फ़िल्म के लिए संगीत लेना चाहते थे. लेकिन सभी उन्हें मेरे साथ काम करने के लिए मना कर रहे थे. उन्होंने मुझे कहा भी था कि इंडस्ट्री में कई लोग कहते हैं कि ख़य्याम बहुत बदक़िस्मत आदमी हैं और उनका म्यूज़िक हिट तो होता है लेकिन जुबली नहीं करता. लेकिन मैंने यश चोपड़ा की फ़िल्म का संगीत दिया और फ़िल्म ने डबल जुबली कर सबका मुंह बंद कर दिया. वाक़ई साहिर लुधियानवी की शायरी में डूबा और ख़य्याम के संगीत में निखरा कभी-कभी का एक एक गीत बेमिसाल है. यहाँ याद आता है कभी कभी का गीत - मैं पल दो पल का शायर हूँ….. कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझसे बेहतर कहने वाले तुमसे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझको याद करे, क्यों कोई मुझको याद करे मसरूफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल दो पल का शायर हूँ... ख़य्याम और साहिल लुधियानवी ख़य्याम भले ही संगीत प्रेमियों से जुदा हो गए हों लेकिन बहुत सारे संगीत प्रेमियों के लिए वाक़ई उनसे बेहतर कहने वाला कोई नहीं होगा. वो दौर जिसे हिंदी फ़िल्म संगीत का गोल्डन युग कहा जाता है, उस दौर के अंतिम धागों से जुड़ी एक और डोर ख़य्याम के जाने से टूट गई है.
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J&K: बैन के बावजूद चल रहा था अली शाह गिलानी का इंटरनेट? दो BSNL कर्मी सस्पेंड

Date : 19-Aug-2019
श्रीनगर 19 अगस्त । जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाए जाने के बाद मोबाइल और इंटरनेट सेवा पर बैन लगा हुआ है। कश्मीर घाटी में अभी सिर्फ लैंडलाइन फोन ही चालू किए गए हैं। इस बीच कम्यूनिकेशन पर बैन के बावजूद अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का कथित रूप से इंटरनेट चलने के मामले में बीएसएनएल ने अपने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि दोनों ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नाता अली शाह गिलानी को प्रतिबंध को ताक पर रखकर इंटरनेट लिंक मुहैया कराया हुआ था। इस दौरान गिलानी ने अपने कथित अकाउंट से कई ट्वीट भी किए थे। हालांकि यह अकाउंट वेरिफाइड नहीं है। गिलानी के इस कथित अकाउंट से ट्वीट होने के बाद सवाल उठे कि जब पूरे प्रदेश में इंटरनेट पर बैन लगा हुआ था तो गिलानी के पास कैसे यह सुविधा पहुंची। 4 अगस्त के बाद से इस अकाउंट से कई आपत्तिजनक ट्वीट किए गए।  बता दें कि अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के ऐक्शन के बाद शनिवार को 96 में से 17 टेलिफोन एक्सचेंज चालू करते हुए कश्मीर में लैंडलाइन फोन सेवा शुरू हुई थी। इस बीच सोमवार को श्रीनगर के 190 से ज्‍यादा प्राइमरी स्‍कूल करीब 14 दिनों बाद फिर से खोल दिए गए हैं। बीते कई दिनों से पढ़ाई का काम बाधित होने के बाद तमाम छात्र स्कूलों की क्लासेज में जाते नजर आए हैं।  अधिकारियों का कहना है कि सीनियर क्लासेज के स्कूल कुछ वक्त बाद खोले जाएंगे। जितने दिनों तक स्‍कूल बंद रहे हैं, उनके बदले इस महीने के बाद में पूरक कक्षाएं लगाई जाएंगी। हालात सामान्‍य होते ही अन्‍य जिलों के स्‍कूल भी खोल दिए जाएंगे। दूसरी ओर, किसी भी अव्‍यवस्‍था से निपटने के लिए सेना समेत अन्‍य सुरक्षा बल 24 घंटे मोर्चे पर तैनात हैं।  10 और टेलिफोन एक्सचेंज चालू  इससे पहले घाटी में रविवार को 10 और टेलिफोन एक्सचेंजों ने काम करना फिर से शुरू कर दिया। हालांकि, पहले बहाल 17 एक्सचेंज में से एक पर सेवाएं रोक दी गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन को लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल दुष्प्रचार अभियान में करने की जानकारी मिलने के बाद एक एक्सचेंज पर सेवाएं फिर से रोकी गई हैं। घाटी में मौजूद 50,000 टेलिफोन फिक्स्ड लाइन में 28,000 को चालू कर दिया गया है।  रविवार को जिन टेलिफोन एक्सचेंज का परिचालन शुरू किया है, वे हैं श्रीनगर जिले में डल झील, सचिवालय और निशात, उत्तरी कश्मीर में पट्टन, बोनियार और बारामुला, बडगाम जिले के चाबुरा और चरार-ए-शरीफ और दक्षिण कश्मीर की ऐशमुकाम। पांच अगस्त को केंद्र की ओर से अनुच्छेद-370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित करने की घोषणा से पहले राज्य में लैंडलाइन फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं।  सिर्फ इनकमिंग कॉल की मिलेगी सुविधा  कश्मीर में मोबाइल सर्विस की बहाली इस हफ्ते के आखिर तक होने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि शुरुआत में केवल इनकमिंग कॉल की सुविधा दी जाएगी। इससे यहां के स्थानीय लोग जम्मू-कश्मीर से बाहर अन्य राज्यों से कॉल अटेंड कर सकेंगे और आईएसडी कॉल की सुविधा भी प्राप्त कर सकेंगे, जबकि मोबाइल इंटरनेट अभी कुछ समय तक बंद ही रहेगा। 
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SACRED GAMES 2: सेक्रेड गेम्स की वीभत्स होती दुनिया बचाने लायक है या नहीं? विकास त्रिवेदी

Date : 18-Aug-2019
अहम ब्रहास्मि. मैं ब्रह्म की धूल हूं. मैं सबसे प्रेम करता हूं. मैं किसी से प्रेम नहीं करता. मैं अघोरी हूं. मैं मुर्दा खाकर जीवित रह सकता हूं. मैंने बार-बार अपने पिता, अपने पुत्र, पत्नी और मां का वध किया है. मैं कलयुग का पुत्र कली हूं. दानव का पुत्र, अधर्म का पिता. मैं कल्कि भी हूं. मैं परम हूं. मैं अणु हूं. मैं वीभत्स हूं. मैं भीषण हूं. मैं ब्रह्म हूं. सिर्फ़ मैं ही ब्रह्मल हूं.के अपनी स्मृति को खंगालकर बताइए कि बीते दिनों आपने सबसे वीभत्स क्या देखा था? मॉब लिंचिंग का कोई वायरल वीडियो. बलात्कार की विस्तृत जानकारी देती कोई ख़बर. नंगी पीठों को छीलती हुई कोई ताकतवर बेल्ट. गटर में उतरता कोई आदमी. तीन साल की बच्ची का धर्म की वजह से रेप. किसी समंदर तट पर औंधे मुंह पड़ा कोई नन्हा शव या नदी में मां का डुबाकर मारा कोई बच्चा. किसी पेलेट गन का शिकार हुई हरे रंग की कोई आंख या फ़ौजी पिता की चिता के सामने रोती बिटिया. इन सब या इससे इतर किसी भी वीभत्स चीज़ को देखकर आपने ख़ुद से क्या सवाल किया- ये दुनिया को क्या हो गया है? या ये दुनिया कल ख़त्म होनी है, आज ख़त्म हो जाए. ऑनलाइन स्ट्रीमिंग वेबसाइट नेटफ़्लिक्स की सिरीज़ सेक्रेड गेम्स का दूसरा सीज़न इसी सवाल के साथ आगे बढ़ता है. जवाब कौन देगा? क्योंकि जवाब आपसे, मुझसे...सबसे बड़ा है. दार्शनिकता का दूर-दर्शन भूख से तड़प रहे लोगों के सामने अचानक 56 भोग रख दें तो उनके अंदर धँसते पेट, बाहर निकलते फेफड़े दिखने बंद नहीं होते. भूखों के सामने एक साथ कई सारे पकवान परोसे जाएंगे तो वो उल्टी कर देगा या कंफ्यूज़ हो जाएगा. ख़ासतौर पर तब जब ये भूख भी खाना परोसने वाले ने ही पैदा की हो. सेक्रेड गेम्स-2 की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. स्कूल जाने वाले बच्चे के बस्ते में विज्ञान, नैतिक शिक्षा, पुराण, मनुस्मृति, जेनोसाइड, वर्महोल, गॉड इज डेड वाले दार्शनिक फेडरिक नीत्शे और ओशो की संभोग से समाधि किताब रख दी गई है. इस स्कूल जाने वाले बच्चे को गणेश गायतोंडे (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) की समझाई भदेस बात तो पसंद आती है. लेकिन गुरुजी (पंकज त्रिपाठी) के ज़रिए निहिलिज्म, अमीबा, अणु, न्यूक्लियर एनर्जी और समय चक्र समझाने की कोशिश दार्शनिकता का दूर-दर्शन जान पड़ती है. इन सबके बीच ठहरने की चाह में ये स्कूली बच्चा सरताज (सैफ़ अली ख़ान) की तरह भागता रहता है. ये सब एक बार में समझने की उम्मीद उस पब्लिक से की गई है, जो रियल में भी बिना डिस्कलेमर वाले रील देखने की आदी है. उन्नाव केस, मॉब लिंचिंग, गोरक्षा, बलात्कार, लव जिहाद, नो वन किल्ड पहलू ख़ान, देशभक्ति, सेक्युलर- एक गाली? सब अपना क़िस्सा लेकर आए हैं. अपुन का काम है, उसको जोड़ना.पहले सीज़न की ताक़त रहा ये डायलॉग दूसरे सीज़न की कमी जान पड़ता है. लेकिन क्या ये वाक़ई कमी है? सेक्रेड गेम्स-2 शायद उम्मीदों का शिकार है. ये उम्मीदें दोतरफ़ा हैं. सेक्रेड गेम्स बनाने वालों की भी और देखने वालों की भी. बनाने वालों ने शायद सोचा कि पहले सीज़न में अतापि-वतापि का कॉन्सेप्ट समझ चुके लोग नेक्स्ट लेवल के लिए तैयार हैं. देखने वालों को लगा कि सारे कॉन्सेप्ट समझना कुकू का जादू नहीं है कि सब पर चल जाए. लेकिन अगर इस जादू को एक छड़ी में बांधकर चलाया जाए तो क्या रील और रियल के बीच जो सच है, वो समझ आ सकता है? आइए आप और अपुन कोशिश करते हैं. 1.न्यूक्लियर से आए थे, न्यूक्लियर में जाएंगे सर्वशक्तिशाली इकलौते भगवान गणेश गायतोंडे के टूटते मंदिर. ठहरने की चाहत में भागता सरताज. बलिदान लेने की ओर बढ़ते चतुर्वेदी वंश के अवतार गुरुजी. फ़ैसले लेने वाली ताक़तवर औरतें जोजो, यादवजी, बत्या. नहीं समझ में आता है न, कहानी किधर जाएगा? तो कहानी एकदम ताज़ा घटनाओं से शुरू करिए. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का बयान, नरेंद्र मोदी आप इस क़ौम को ग़ुलाम नहीं बना सकेंगे. आपकी ईंट का जवाब पत्थर से देंगे. वक़्त आ गया है जब हम आपको सबक़ सिखाएंगे. भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान,भारत न्यूक्लियर हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति पर अभी भी कायम है लेकिन भविष्य में क्या होता है यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है. सेक्रेड गेम्स वाले गुरुजी का बयान,भारत और पाकिस्तान. दुनिया का सबसे पुराना संघर्ष. ये देशों या धर्मों का नहीं, सभ्यताओं का युद्ध है. न्यूक्लियर से आए थे... न्यूक्लियर में जाएंगे. अब न्यूक्लियर हथियारों और युद्ध को लेकर रील और रियल के इन बयानों पर ग़ौर कीजिए. ऐसे वक़्त में जब भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद की जड़ रहे कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाला अनुच्छेद 370 ख़त्म किया जा चुका है. बलिदान देने की बातें देश के नेता आए दिन करते ही हैं. तब गुरुजी का ये कहना कि बलिदान देना होगा...सच के ज़्यादा क़रीब लगता है. एक ट्रिगर चाहिए होता है और बन जाती है नई दुनिया. ग्लोबल वॉर्मिंग के नाम पर फ़र्स्ट वर्ल्ड वाले झगड़े. हज़ारों पटाखों पर लड़ियां बिछी पड़ी हैं. कहीं भी सुलगा दो और सब धुआं-धुआं. संसद की स्टाइल से अगर इस बात की सत्यता जांचनी हो तो यूं जांची जा सकती है! जो फेवर में हैं वो बोलें- AYES. जो विरोध में हैं वो बोलें- NO. अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, फ़लीस्तीन, सीरिया, म्यांमार: AYES. अमरीका, सऊदी अरब, रूस, चीन: NO. 2. गणेश गायतोंडे होने से बचा लो रे दुनिया... असल दुनिया में भले ही ईश्वर और उसके नाम पर मांगी जाने वाली क़ुर्बानियां ताक़तवर हुई हैं. लेकिन रील में ख़ुद को भगवान बताने वाला गणेश गायतोंडे दूसरे सीज़न में कमज़ोर और बेवकूफ़ बनता दिखता है. इसे बिना स्पॉइलर के समझना है तो आप-पास के बाबाओं पर ग़ौर कीजिए. वो बाबा जो कृपा बरसाने के नाम पर लाखों करोड़ों की भीड़ अपने साथ लिए हुए हैं. इन बाबाओं के दर पर चुनाव से पहले नेता मत्था टेकते हैं. फिर आस्था के इन मंचों से माइक से ऐलान होता है-अबकी बार, आम आदमी का हाथ... मंचों से चूती ये कृपा, भीड़ अपने मुंह पर चुपड़ लेती है और जाने-अनजाने मिशन में जुट जाती है. ग्लोबल वॉर्मिंग से लेकर इंटरनेट धार्मिक प्रॉपेगैंडा सब दुनिया ख़त्म करने में लगे हैं. सब पागल कुत्ते की तरह एक-दूसरे को काटने दौड़ेंगे. इतना धुंआ भरेगा कि धरती के पशु, पक्षी सब समाप्त हो जाएंगे. धरती का तापमान गिरेगा और आप सब न्यूक्लियर विंटर देखेंगे. धार्मिक प्रॉपेगैंडा में फँसे लोग कहां नहीं हैं? पहले गाय को धर्म से जोड़ा गया. फिर गोरक्षा का नियम मरोड़ा गया. क्रिया: गोरक्षा के नाम पर लोगों की लिंचिंग. प्रतिक्रिया: पहलू ख़ान लिंचिंग केस में सभी अभियुक्त बरी. मेरे अब्बा पहलू ख़ान को अगर वीडियो में दिख रहे लोगों ने नहीं मारा तो वो मरे कैसे? मारने वाले लोगों की लंबी लिस्ट में एक नाम शंभुलाल रैगरों जैसों का भी है. जो धर्म के नाम पर दूसरे धर्म के आदमी पर कुल्हाड़ी चला देते हैं. कुछ दिनों बाद एक शोभा यात्रा में सम्मान होता है. फिर इस बात पर ग़ौर कोई क्यों ही करे कि इस यात्रा में शामिल हुए ज़्यादातर लोग शायद बेरोज़गार हैं. ऐसे युवाओं की नसों में देश और धर्म को इंजेक्ट कर दिया गया है. जिनके लिए अब भी रोज़गार मुद्दा है, उनकी बात नेशन डोंट वॉन्ट टू नो. दुनिया की हर कमज़ोरी का फ़ायदा उठाना है. गणेश गायतोंडे जैसों की कमज़ोरियों का फ़ायदा दुनिया के हर उस खेल में उठाया जा रहा है, जिसे पवित्र बताया जाता है. देर लगेगी लेकिन इस तैयार होती भीड़ को एक रोज़ समझ आएगा कि उसका सिर्फ़ टैक्स नहीं कटा था. 3. ये देश किसका है? यादवजी को देश से बहुत प्यार है. मुझे भी देश से प्यार है. लेकिन उनके लिए देश वो जो आज है और जो आगे होगा. हमारे लिए देश जो पहले था, जो हो सकता था और जो होना भी चाहिए. सतयुग... 5वें एपिसोड में त्रिवेदी जब ये बात कहता है तो वो सेक्रेड गेम्स का दार्शनिक स्पॉइलर दे जाता है. ये देश कैसा होना चाहिए लेकिन हो नहीं पाया, ये सेक्रेड गेम्स की कहानी है. लेकिन कहानी तो पर्दे से बाहर भी हैं. अगर सरदार पटेल भारत के पहले पीएम होते तो देश ऐसा होता, देश वैसा होता. वॉट्सऐप से लेकर देश की संसद तक ऐसी कल्पनाएँ आपने ख़ूब सुनी होंगी. तिरंगे, राष्ट्रगान और धर्म का ढाल बनना. जो वंदे मातरम बोले वो सच्चा देश भक्त? जो जय श्रीराम बोले वो सच्चा हिंदुस्तानी? सेक्रेड गेम्स का माजिद जब अपने नाम की वजह से घर न मिलने की बात कहता है. या जब पर्चे छापने वाला कहता है कि मुसलमान को उठाने के लिए कोई वजह चाहिए आपको? या जब एक उभरता क्रिकेटर बचपने की लड़ाई की वजह से ख़ुद धर्म की कढ़ाई में उबलता और ख़त्म होता पाता है. एक समुदाय पूरे शहर में इतना घुस गया है कि.... क्या सेक्युलर-सेक्युलर करते रहते हो. तब ठीक उसी पल अंकित सक्सेना, जुनैद, मुंबई की कोई महंगी सोसाइटी की रूलबुक या 14 साल जेल में काटने के बाद बेगुनाह करार दिए मोहम्मद आमिर सामने खड़े हो जाते हैं. त्रिवेदी के भाई लोगों ने बाबरी मस्जिद गिराया. बदले में आईएसआई के पंटर दानिश ख़ान के साथ मिलकर ईसा ने बंबई मे बम दगाया. तमस ही तमस को ख़त्म करेगा. लेकिन इंतक़ाम से सिर्फ़ इंतक़ाम पैदा हुआ. श्रीदेवी को देखकर सिर्फ़ मोगेम्बो ख़ुश नहीं हुआ. राम जी वर्मा जैसे लोग भी ख़ुश हुए. क्योंकि... पिच्चर बोले तो सिरीज़ अभी बाक़ी है मेरे दोस्त.N 4. फ़ैसले लेती ताक़तवर औरतें फ़िल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने की कोशिश करती जोजो, मारिया, जमीला और न जाने कितनी ही लड़कियां. ऐसी लड़कियों की आपबीतियों से अक्खा समाज और गूगल भरा हुआ है. असल ज़िंदगी में ये लड़कियां मजबूरी में भले ही मन का फ़ैसला न कर पाती हों लेकिन सेक्रेड गेम्स में ये दमदार आवाज़ में फ़ैसला लेती हैं. ज़्यादातर फ़िल्मों में शो-केस जैसी जगह देने वाले लिखे गए महिला किरदारों के बीच सेक्रेड गेम्स अलग नज़र आता है. पहले सीज़न में कुकू, सुभद्रा, कांताबाई, अंजलि माथुर. दूसरे सीज़न में जोजो, कुसुम देवी यादव, बत्या और पैसे लेने से इनकार करती कॉन्सटेबल काटकर की पत्नी शालिनी और मेघा. सेक्रेड गेम्स के महिला किरदार स्टीरियोटाइप तोड़ते नज़र आते हैं. ख़ुद में खुद्दारी लिए. जैसी खुद्दारी और इच्छा केन्या में पुरुषोत्तम बरिया की पत्नी हर्षा की थी. हर्षा, जिसने गुरुजी के कहे शब्दों को बिना सुने हु-ब-हू मान लिया था. सेक्स को सांस की तरह सहज...और देवी की तरह ख़ुद को पूजे जाने से सख़्त ऐतराज. ओशो (रजनीश) की क़रीबी रही आनंद शीला से मिलता जुलता बत्या का किरदार पर्दे पर पूरा जान पड़ता है. 5. बलिदान किस दुनिया की ख़ातिर? कलयुग धीमी मौत है. इसे तेज़ करना होगा. बलिदान देना होगा. मगर इसे तेज़ कर कौन रहा है? जवाब है वो अपासमार दैत्य, जिसके पास सुपरपावर थी कि वो किसी की भी यादों को कंट्रोल कर सकता था. उसकी एक कमज़ोरी भी थी. वो अटेंशन काप भूखा था. सेक्रेड गेम्स और उससे बाहर आपको, हमें इसी अपासमार को तलाश लेना चाहिए कि नहीं लेना चाहिए? क्योंकि वक़्त रेडियोएक्टिव है. वो घटता है और हमेशा रहता है. ये एक चक्र है. इस चक्र को समझाने में कई बार समझाने वाले भी फँसते हैं और समझने वाले भी. लेकिन एक ज़रूरी सवाल इस चक्र से बाहर निकल ही आता है. इस दुनिया को वीभत्स कर कौन रहा है और क्या ये वाक़ई बचाने लायक है? यूं तो एक मुकम्मल जवाब हवाओं में बह ही रहा है. फिर भी एक सांकेतिक जवाब पहले साहिर लुधियानिवी और फिर पीयूष मिश्रा लिख चुके हैं. जैसी बची है, बचा लो रे दुनिया. अपना समझके अपनों के जैसी उठा लो रे दुनिया. छुटपुट सी बातों में जलने लगेगी संभालों रे दुनिया... क्योंकि हम सब अपने-अपने भीतर अपना-अपना ब्रह्मांड लेकर चल रहे हैं.
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दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देशों भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्तों मे कड़वाहट बढ़ी

Date : 17-Aug-2019
नई दिल्ली 17 अगस्त । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति पर अभी भी कायम है लेकिन भविष्य में क्या होता है यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है. अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किये जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है. ऐसे में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर भारतीय रक्षा मंत्री का ताज़ा बयान आना एक महत्वपूर्ण बात है. दो परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसी देशों भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्ते और उनकी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय जगत की भी नज़र रहती है. अगर भारत कोई नीतिगत फ़ैसला लेता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं. ऐसा नहीं है कि एनडीए सरकार में रक्षा मंत्री की ओर से ये बात पहली बार कही गई है. इससे पहले जब मनोहर पार्रिकर रक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने कहा था कि वो पहले इस्तेमाल न करने की नीति से सहमत नहीं हैं और वो इसे बदलना चाहते हैं. हालांकि उन्होंने इसे अपनी निजी राय बताई थी. राजनाथ सिंह भारत के दूसरे रक्षा मंत्री हैं जिन्होंने पहले इस्तेमाल न करने की नीति के बारे में कहा है. ये बात भारत के रक्षा मंत्री की ओर से कही गई है और इसे गंभीरता से लें तो ये कहा जा सकता है कि बीजेपी की सरकार में इस बारे में कुछ विचार-विमर्श चल रहा है. जब 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था तो उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को ख़त लिख कर कहा था कि ये चीन के ख़िलाफ़ प्रतिरोध नीति के तहत किया गया था. अगर भारत अपनी नीति में बदलाव लाता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं. सबसे पहले चीन और पाकिस्तान ही प्रतिक्रिया देंगे क्योंकि इस इलाक़े में तीनों देशों की सीमाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और ये तीनों देश परमाणु हथियार संपन्न देश हैं. भारत का पाकिस्तान के साथ इलाक़ाई विवाद है और चीन के साथ भी है. इसलिए नीति बदलने की स्थिति में ये बहुत गंभीर बात होगी क्योंकि भारत की अभी की नीति है वो है पहले इस्तेमाल न करने की नीति, जिसे रिटैलिएटरी डॉक्ट्रिन कहते हैं. यानी अगर भारत के ऊपर हमला किया गया तो वो इसके बाद हथियार इस्तेमाल कर सकता है. ऐसे गंभीर मुद्दे पर बहुत विचार विमर्श के बाद फ़ैसले लिए जाते हैं और हो सकता है कि अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए भावनात्मक रूप से ये बात राजनाथ सिंह ने कही हो.
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कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की बैठक में पाकिस्तान और भारत नहीं शामिल हुए क्योंकि ये दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य नहीं हैं

Date : 17-Aug-2019
न्यूयार्क 17 अगस्त । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को भारत प्रशासित कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर अनौपचारिक बैठक हुई. यह अनौपचारिक बैठक पाकिस्तान द्वारा लिखे गए ख़त के बाद आयोजित की गई थी. यह बैठक बंद कमरे में हुई लेकिन बैठक समाप्त होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत, चीन और पाकिस्तान के राजदूतों ने पत्रकारों से बात की. संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि अनुच्छेद 370 का मुद्दा आंतरिक मुद्दा है और इसका बाहरी लोगों से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार का हालिया फ़ैसला वहां की आर्थिक, सामाजिक विकास के लिए है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य करने के लिए आज कई फ़ैसले लिए गए हैं. इस दौरान अकबरुद्दीन ने पाकिस्तान को भी निशाने पर लिया उन्होंने कहा कि एक देश जिहाद और हिंसा की बात कर रहा है और हिंसा किसी मसले को नहीं सुलझा सकती है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत सैयद अकबरुद्दीन भारत ने कहा पहले आतंकवाद रोके पाकिस्तान अकबरुद्दीन ने कहा कि अगर पाकिस्तान को भारत से बात करनी है तो उसे पहले आतंकवाद को रोकना होगा. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मौजूद संवाददाता सलीम रिज़वी ने सवांददाता को बताया कि चीन के राजदूत ने कहा है कि सुरक्षा परिषद के देशों ने माना है कि इस मसले को शांतिपूर्ण तरीक़े से सुलझाया जाना चाहिए और एक तरफ़ा फ़ैसले नहीं लिए जाने चाहिए. साथ ही चीन ने कहा है कि उसका मानना है कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत सुलझाया जाना चाहिए और कश्मीर में बहुत ख़तरनाक स्थिति होने जा रही है. क्या कहा चीन ने? बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन ने कहा कि सदस्यों देश वहां मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर भी चिंतित हैं. उन्होंने कहा, महासचिव ने भी कुछ दिन पहले बयान जारी की था. और सुरक्षा परिषद की बैठक की चर्चा जो मैंने सुनी है उसके आधार पर कहा जाए तो, सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर की ताज़ा स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं ज़ाहिर की हैं." उन्होंने कहा, वो वहां के मानवाधिकार हालातों को लेकर भी चिंतित हैं. और सदस्यों की ये आम राय भी है कि संबंधित पक्ष कोई भी ऐसा इकतरफ़ा क़दम उठाने से बचे जिससे तनाव और अधिक बढ़ जाए. क्योंकि वहां तनाव पहले से ही बुत ज़्यादा है और बहुत ख़तरनाक है. पाकिस्तान ने अपनी पीठ ठोकी इस दौरान चीन ने लद्दाख का मुद्दा भी उठाया. उसने कहा कि अनुच्छेद 370 लद्दाख से भी हटी है और वह इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है. वहीं, पाकिस्तान ने कहा है कि उसने कश्मीर मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण कर दिया है. पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि कई दशकों के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह मुद्दा उठा है और इस मंच पर उठने के बाद यह साबित हो गया है कि यह भारत का आंतरिक नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मामला है. मलीहा ने कहा, मुझे लगता है कि आज की बैठक ने भारत के इस दावे को खारिज कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है. जैसा की चीनी राजदूत ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति पर ज़ोर दिया, वहां मानवाधिकारों की स्थिति बहुत ख़राब है और भारत बेरोकटोक इनका उल्लंघन कर रहा है. इस पर भी आज सुरक्षा परिषद ने चर्चा की है. इस बैठक में पाकिस्तान और भारत नहीं शामिल हुए क्योंकि ये दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य नहीं हैं.
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एक दिन ऐसा आएगा जब पानी किराने की दुकान में बेचा जाएगा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

Date : 16-Aug-2019
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त की सुबह लाल क़िले की प्राचीर से पानी के महत्व को बताते हुए जैन मुनि बुद्धिसागर सूरीश्वरजी महाराज का नाम लिया. नरेंद्र मोदी ने कहा, जैन मुनि महुड़ी ने लिखा है कि एक दिन ऐसा आएगा जब पानी किराने की दुकान में बेचा जाएगा. उन्होंने यह 100 साल पहले लिखा था. आज हम किराने की दुकान से पानी लेते हैं. जल संचय का यह अभियान सरकारी नहीं बनना चाहिए, जन सामान्य का अभियान बनना चाहिए. महुड़ी उत्तर गुजरात का एक तीर्थ क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में जैन समुदाय के लोग तीर्थ करने आते हैं. बुद्धिसागरजी महाराज जैन मुनि थे लेकिन उनका जन्म पटेल परिवार में हुआ था जैन शास्त्र के छात्र और गुजरात के प्रसिद्ध लेखक कुमारपाण देसाई ने बताया कि आचार्य श्री बुद्धिसागर सूरीश्वरजी महाराज विजापुर के कणबी पटेल थे. उनका नाम बेचरदास पटेल था. जैन भिक्षु बनने के बाद उनका नाम बुद्धिसागर हो गया. आख़िर वो बेचरदास पटेल से बुद्धिसागर सूरीश्वरजी महाराज कैसे बने? इस सवाल के जवाब में कुमारपाण देसाई एक क़िस्सा सुनाते हैं. एक बार बेचरदास पटेल विजापुर में अपने एक भैंस को चराने बाहर निकले थे. वह भैंस दो भिक्षुओं पर हमला करने वाली थी. बेचरदास पटेल का शरीर तब पहलवानों जैसा था. उस समय उन्होंने पूरी ताक़त से भैंस की सींग पकड़ ली और उसे हमला करने से रोका. यह देख एक भिक्षु ने कहा कि तुम शारीरिक रूप से बलवान हो लेकिन यह बल पर्याप्त नहीं है. अंतर्बल सबसे बड़ा बल है. बेचरदास ने सोचा कि भिक्षु उनकी प्रशंसा करेंगे लेकिन उन्हें वो सोच में पड़ गए कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा. तब वो भिक्षुओं के पास गए और पूछा कि अंतर्बल क्या होता है. आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत कुमारपाण देसाई बताते हैं, भिक्षुओं से अंतर्बल के बारे में जानने के बाद उनकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई और वे एक भिक्षु बन गए. इस प्रकार वह बेचरदास पटेल से बुद्धिसागर सूरीश्वरजी महाराज बन गए. उस वक़्त बेचरदास पटेल की उम्र महज़ 25 साल थी. उन्होंने क़रीब 25 साल तक अपना जीवन साधुओं की तरह बिताया. साल 1925 में उनकी मृत्यु हो गई. दो हज़ार कविताएं लिखी हैं बुद्धिसागर जी महाराज ने कुमारपाण देसाई बताते हैं कि जैन भिक्षु बनने के बाद उन्होंने गुजरात के विभिन्न गांवों का दौरा किया. उन्होंने अपने जीवन में दो हज़ार से अधिक कविताएं लिखी थीं, जिनमें साबरमती नदी के बारे में सबसे अधिक कविताएं शामिल हैं. उन्होंने गुजराती, हिंदी और संस्कृत में 130 से अधिक ग्रंथ लिखे थे. यह अलग बात है कि उन्होंने महज़ छठी कक्षा तक पढ़ाई की थी. कुमारपाण देसाई बताते हैं कि बुद्धिसागर जी महाराज ने जितनी कविताएं साबरमती नदी पर लिखी हैं, उतनी कविताएं किसी और ने नहीं लिखी. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साबरमती नदी के किनारे उनकी मूर्ति लगानी चाहिए. बुद्धिसागर सूरीश्वरजी महाराज ने महुड़ी में एक तीर्थ स्थान की स्थापना की. गांधीनगर ज़िले के माणसा तालुक़ा में विजापुर के पास महुड़ी गांव है. कुमारपाण देसाई बताते हैं कि बुद्धिसागर जी महाराज यहीं भविष्यवाणी की थी और कहा था कि एक समय आएगा जब आदमी एक कमरे बैठकर दूसरे कमरे के आदमी से बात करेगा. बुद्धिसागर जी महाराज का कहना था कि विज्ञान पूरी दुनिया को बदल देगा. जब पूछा गया कि बुद्धिसागर सूरीश्वरजी ने इन बातों का ज़िक्र कौन से किताब में किया है तो कुमारपाण देसाई कहते हैं, मैं अभी उस पुस्तक का नाम नहीं बता सकता लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि एक दिन पानी किराने की दुकान में बेचा जाएगा, जिसका ज़िक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में किया है. वो कहते हैं कि कई गणमान्य लोगों ने बुद्धिसागर सूरीश्वरजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की है. वड़ोदरा के महाराज सयाजीराव गायकवाड़ ने बुद्धिसागर जी महाराज के बारे में कहा था कि अगर उनके जैसे और भी होते, तो इस देश का उद्धार हो जाता." भाषाविद, शोधकर्ता और संपादक केशवलाल हर्षदराय ध्रुव ने भी एक पुस्तक लिखी है, जिसमें बुद्धिसागरजी महाराज को श्रद्धांजलि दी गई है. बुद्धिसागरजी महाराज का जन्म विजापुर में हुआ था और उनकी मौत भी यहीं हुई थी. विजापुर में ही उनकी समाधि है.
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