National

Previous123456789...2122Next

रघुराम राजन बोले, बहुसंख्यकवाद भारत को अंधकार में ले जाएगा

Date : 13-Oct-2019
 13 अक्टूबर 2019 रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि बहुसंख्यकवाद और निरंकुशता से देश अंधकार में जाएगा और अस्थिरता बढ़ेगी. राजन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में वृ्द्धि दर टिकाऊ नहीं है और लोकप्रिय नीतियों के कारण ख़तरा है कि अर्थव्यवस्था कहीं लातिन अमरीकी देशों की तरह न हो जाए. रघुराम राजन ने भारतीय अर्थव्यवस्था में अभी की सुस्ती के लिए नोटबंदी और जीएसटी को ज़िम्मेदार ठहराया है. अमरीका की ब्रॉन यूनिवर्सिटी में ओपी जिंदल लेक्चर में राजन ने कहा कि सरकार पर प्रोत्साहन पैकेज को लेकर काफ़ी दबाव है. रघुराम राजन आईएमएफ़ के मुख्य अर्थशास्त्री भी रहे हैं. राजन ने भारतीय अर्थव्यवस्था में आई रुकावट के लिए मोदी सरकार में सारी शक्तियों के केंद्रीकृत होने को ज़िम्मेदार बताया. उन्होंने कहा, मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में अर्थव्यवस्था के लिए कुछ अच्छा नहीं किया क्योंकि इस सरकार में सारी शक्तियां एक जगह थीं. ऐसे में सरकार के पास अर्थव्यवस्था को लेकर कोई दृष्टिकोण नहीं था. मंत्रियों के पास कोई ताक़त नहीं थी. ब्यूरोक्रेट्स फ़ैसले लेने को लेकर अनिच्छुक थे. गंभीर सुधार के लिए कोई आइडिया नहीं था. राजन ने कहा, यहां तक कि सीनियर अधिकारियों को बिना कोई सबूत के हिरासत में ले लिया गया. मैं इस बात को लेकर दुखी हूं कि पूर्व वित्त मंत्री को बिना कोई जांच के जेल में कई हफ़्तों स रखा गया है. संस्थानों की कमज़ोरी से सभी सरकारों के निरंकुश बनने की आशंका रहती है. ऐसा 1971 में इंदिरा गांधी के वक़्त में भी था और अब 2019 में मोदी के वक़्त में है.
View More...

रविशंकर प्रसाद बोले- फ़िल्में जब करोड़ों रुपये कमा रही हैं तो अर्थव्यवस्था सुस्त कैसे?

Date : 12-Oct-2019
मुम्बई 12 अक्टूबर । केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि एनएससओ (नेशनल सैंपल सर्वे ऑफ़िस) के बेरोज़गारी से जुड़े आंकड़े पूरी तरह ग़लत हैं. उन्होंने ये बयान शनिवार को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया. रविशंकर प्रसाद ने ये भी कहा कि अगर फ़िल्में करोड़ों का कारोबार कर रही हैं तो फिर देश में मंदी कैसे है? उन्होंने कहा, मैं एनएसएसओ की रिपोर्ट को ग़लत कहता हूं और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ कहता हूं. उस रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफ़ैक्चरिंग, आईटी क्षेत्र, मुद्रा लोन और कॉमन सर्विस सेंटर का ज़िक्र नहीं है. क्यों नहीं है? हमने कभी नहीं कहा था कि हम सबको सरकारी नौकरी देंगे. हम ये अभी भी नहीं कह रहे हैं. कुछ लोगों ने आंकड़ों को योजनाबद्ध तरीके से ग़लत ढंग से पेश किया. मैं ये दिल्ली में भी कह चुका हूं. रविशंकर प्रसाद ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बारे में पूछे जाने पर इसे फ़िल्मों से जोड़ दिया. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,दो अक्टूबर को तीन फ़िल्में रिलीज़ हुई थीं: वॉर, जोकर और सायरा. बॉक्स ऑफ़िस के कारोबार पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञ कोमल नहाटा के मुताब़िक उस दिन इन फ़िल्मों ने 120 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा की कमाई की थी. यानी देश की अर्थव्यवस्था ठीक है. तभी तो फ़िल्में इतना अच्छा कमाई कर रही रविशंकर प्रसाद ने ये भी कहा कि वो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी सूचना प्रसारण मंत्री थे इसलिए उनका फ़िल्मों से लगाव है.
View More...

वर्धा विश्वविद्यालय:छात्रों को नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखने की वजह से निलंबित किया गया

Date : 12-Oct-2019
वर्धा 12 अक्तूबर 2019 महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छह छात्रों को निलंबित कर दिया गया है. निलंबित छात्रों के नाम चंदन सरोज, रजनीश कुमार आंबेडकर, वैभव पिंपलकर, राजेश सारथी, नीरज कुमार और पंकज बेला हैं. छात्रों का आरोप है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखने की वजह से निलंबित किया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को ग़लत बताया है. विश्वविद्यालय के कुलपति रजनीश कुमार शुक्ला ने कहा, हमने विश्वविद्यालय में क़ानून व्यवस्था और शांति बनाए रखने के मक़सद से छह छात्रों पर कार्रवाई की है. इन छात्रों ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की याद में एक कार्यक्रम आयोजित करने की इजाज़त मांगी थी. छात्रों का कहना है कि उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली. पूरा मामला क्या है? विश्वविद्यालय के छह छात्रों चंदन सरोज, रजनीश कुमार आंबेडकर, वैभव पिंपलकर, राजेश सारथी, नीरज कुमार और पंकज बेला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर देश के कई मुद्दों पर ध्यान देने की गुज़ारिश की थी. इसमें छात्रों ने मॉब लिंचिंग, यौन उत्पीड़न, बलात्कार, कश्मीर की स्थिति और एनआरसी से जैसे मुद्दों का ज़िक्र किया था. इसके अलावा छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखने वाले 49 बुद्धिजीवियों पर देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने (बाद में यह केस वापस ले लिया गया था) के बारे में भी अपनी बात रखी थी. निलंबित हुए छात्र रजनीश आंबेडर ने बताया, हमने कांशीराम की पुण्यतिथि पर एक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अनुमति मांगी थी लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने हमें जानबूझकर इजाज़त नहीं दी. इसके बाद हमने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर देश के तमाम मुद्दों पर चर्चा करने की अनुमति मांगी थी. रजनीश बताते हैं, हमने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया था कि वो विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा को प्राथमिकता दिलाएं. हमने विश्वविद्यालय से अनुमति न मिलने के बावजूद कांशीराम की पुण्यतिथि भी मनाई और हमें कार्यक्रम के बीच में ही रोक दिया गया. चर्चा के दौरान ही हमें देर रात निलंबित कर दिया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष यूनिवर्सिटी के कुलपति रजनीश शुक्ला ने छात्रों के इस दावे का खंडन किया कि उन्होंने कांशीराम की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम के लिए अनुमति मांगी थी. कुलपति का कहना है कि राज्य में चुनाव का माहौल है और आदर्श आचार संहिता लागू है. उन्होंने कहा, "हमने छात्रों को बताया कि ऐसे माहौल में विश्वविद्यालय किसी भी तरह के राजनीतिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं दे सकता. कुलपति ने बताया, हमारे इनकार के बावजूद छात्रों ने 9 अक्टूबर को गांधी हिल में इकट्ठा होकर आंदोलन किया. इसके बाद हमने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की. चुनाव अधिकारी क्या कहते हैं? चुनाव निरीक्षक की ज़िम्मेदारी है कि वो जांच करे कि आदर्श आचार संहिता का पालन हो रहा है या नहीं. यह पूछे जाने पर कि आचार संहिता का पालन न करने के लिए छात्रों पर कार्रवाई क्यों की गई, कुलपति ने कहा, अभी चुनाव का माहौल है. इस दौरान हम विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी राजनीतिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं है. अगर इन नियमों का पालन नहीं हुआ तो स्थिति बिगड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है. हमने इस बारे में चुनाव अधिकारियों को भी सूचित किया है. वहीं चुनाव अधिकारी सुरेश बागले का कहना है कि विश्वविद्यालय ने उन्हें पत्र भेजा तो था लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब भेजे जाने से पहले ही छात्रों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर दी गई. बागले ने कहा, हमने अभी विश्वविद्यालय प्रशासन की चिट्ठी का जवाब नहीं दिया है. उन्हें पूछताछ पूरी होने के बाद ही फ़ैसला लेना चाहिए था. हमें नहीं मालूम कि उन्होंने क्या निर्णय लिया है. हम मामले की जांच कर रहे हैं.
View More...

बीमा कंपनियों का जल्द विलय

Date : 09-Oct-2019
नई दिल्ली 9 अक्टूबर । बीमा कंपनियों के विलय पर जल्द ही फ़ैसला हो सकता है. वित्त मंत्रालय ने तीन बीमा कंपनियों के विलय का कैबिनेट नोट तैयार कर मंजूरी के लिए भेज दिया है. विलय का प्रस्ताव बजट में किया गया था. कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही ओरिएंटल इंश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के विलय की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी
View More...

यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मोटर व्हीकल एक्ट के अलावा भारतीय दंड संहिता के तहत भी मुक़दमा चलाया जा सकता है

Date : 09-Oct-2019
नई दिल्ली 9 अक्टूबर । सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मोटर व्हीकल एक्ट के अलावा भारतीय दंड संहिता के तहत भी मुक़दमा चलाया जा सकता है. गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट उलट दिया है जिसमें आदेश दिया गया था कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आईपीसी के तहत मुक़दमा नहीं किया जा सकता.
View More...

इंद्राणी—पीटर में सहमति से तलाक

Date : 04-Oct-2019
मुम्बई 4 अक्टूबर । महाराष्ट्र के चर्चित शीना बोरा केस के मुख्य आरोपी पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी को अदालत से तलाक लेने की मंजूरी दे दी गई है. पूर्व मीडिया कारोबारी पीटर मुखर्जी और उनसे अलग रह रही पत्नी इंद्राणी मुखर्जी के तलाक पर गुरुवार को मुंबई की एक परिवार अदालत ने मुहर लगा दी. पीटर और इंद्राणी दोनों ही शीना बोरा हत्याकांड में आरोपी बनाए गए हैं. इंद्राणी की वकील ने बताया कि तलाक आपसी सहमति से लिया गया है कोर्ट ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद इसकी सहमति प्रदान की है
View More...

डॉक्टर कफील को नहीं मिली क्लीनचिट

Date : 04-Oct-2019
लखनऊ 4 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव रजनीश दुबे ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अगस्त 2017 में गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बड़ी संख्या में इंसेफ्लाइटिस से ग्रस्त बच्चों की मौत के मामले में आरोपी डॉक्टर कफील खान से सम्बन्धित जांच समिति ने कुछ तथ्यों का संज्ञान नहीं लिया था और खान को कोई क्लीन चिट नहीं दी गयी है. प्रमुख सचिव ने कहा कि अभी किसी भी विभागीय कार्रवाई में अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. डॉ कफील गलत तरीके से अपनी क्लीनचिट प्रसारित करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि डॉ. कफील के ख़िलाफ़ सात आरोप हैं, जिस पर जांच चल रही है.
View More...

एक-एक कर​के छोड़े जाएंगे घाटी में नज़रबंद नेता : फ़ारूख़ ख़ान

Date : 04-Oct-2019
श्रीनगर 4 अक्टूबर। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकर फारूक खान ने कहा है कि भारत प्रशासित कश्मीर में हिरासत में लिए गए नेताओं को स्थिति का विश्लेषण करने के बाद एक-एक कर रिहा किया जाएगा.
View More...

हनीट्रैप: वीडियो-ब्लैकमेलिंग से लेकर नौकरशाहों में टकराव तक

Date : 02-Oct-2019
इंदौर 2 अक्टूबर । 17 सितंबर को मध्यप्रदेश के इंदौर जिले नगर निगम में कार्यरत इंजीनियर हरभजन सिंह ने पलासिया थाने में खुद को ब्लैकमेल किए जाने की एफआईआर दर्ज कराई थी तो उन्हें भी इसका अंदाजा नहीं था कि यह मामला इतना बड़ा बन सकता है। अब जैसे-जैसे प्रदेश में फैली हनीट्रैप मामले की कहानियां उजागर होनी शुरू हुई है वैसे-वैसे इसमें कई नौकशाह, राजनेता और पत्रकारों की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है। एफआईआर में हरभजन सिंह ने दावा किया था कि उन्हें 29 वर्षीय आरती दयाल नाम की एक महिला द्वारा ब्लैकमेल किया जा रहा था। उक्त महिला ने तीन करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की थी और ऐसा न करने पर इंजीनियर के कथित अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई थी। पुलिस ने जब जांच शुरू की तब पता चला कि एक गैर सरकारी संगठन ने कथित तौर पर राजनेताओं, नौकरशाहों और कई बड़े रसूखदारों को ब्लैकमेल करने के लिए उनके अश्लील वीडियो बनाए हैं। जिन्हें सार्वजनिक करने की धमकियों के एवज में जबरन वसूली की जाती थी। जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में गिरोह के द्वारा छह वरिष्ठ राजनेताओं और कम से कम 10 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के अलावा सिविल इंजीनियरों और बिल्डरों को लालच दिया गया था। इनमें से कुछ से वसूली करने की भी खबरें हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस मामले में पुलिस ने भोपाल की संदिग्ध मास्टरमाइंड श्वेता स्वप्निल जैन सहित पांच महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया गया है। जबकि इनके वकीलों ने दावा किया है कि इस मामले को जबरन गढ़ा गया है, वहीं आरोप लगाया गया कि पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में यातना भी दी है। इस बीच, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे मध्यप्रदेश की नौकरशाही और राजनीति में उथल-पुथल मचती दिख रही है। भाजपा और कांग्रेस भी मामले को लेकर एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। हनीट्रैप की सूत्रधार श्वेता विजय जैन, आरती से बनवाती थी वीडियो हनीट्रैप कांड की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन अफसर और नेताओं से आरती की दोस्ती करवा देती थी। बाद में आरती उन्हें अपने जाल में फंसा कर वीडियो बना लेती थी। फिर श्वेता के इशारे पर रुपये वसूलने का काम होता था। इंजीनियर हरभजन के लिए भी इसी तरह जाल बिछाया गया था।  एमपी पुलिस के अनुसार, आरती दयाल उर्फ आरती सिंह उर्फ ज्योत्सना ने पूछताछ में बताया कि गिरोह की मुखिया श्वेता विजय जैन है। उसकी हरभजन सिंह से करीब 10 साल पुरानी दोस्ती है। इसके बदले वह अपने भाई राजा के लिए सरकारी ठेके लेती थी। श्वेता ने हरभजन से आरती से मुलाकात करवा दी। श्वेता को दोनों की नजदीकी का पता था, लेकिन आरती ने हरभजन को बताया कि दोस्ती के बारे में श्वेता को जानकारी नहीं मिलनी चाहिए। पुलिस के अनुसार इंजीनियर हरभजन भी ठेके दिलाने का वादा कर संबंध बनाते रहे। वीडियो बनने के बाद योजना के मुताबिक आरती ने हरभजन को कॉल कर तीन करोड़ रुपये मांगे। हरभजन ने उससे कहा कि उसके पास तीन करोड़ रुपये नहीं हैं।  आरती ने श्वेता को कॉल कर कहा कि वह रकम कम करने को बोल रहा है। श्वेता के कहने पर आरती ने हरभजन को दो करोड़ रुपये देने का कहा और बैठक से रवाना हो गई। अंत तक हरभजन को यह पता नहीं था कि इस मामले में श्वेता भी शामिल है।  मीडिया के सामने बयान देने से घबराई पुलिस हनीट्रैप मामले में आरोपी आरती और बरखा ने इंदौर के एमवाय अस्पताल में मेडिकल के दौरान मीडिया के सामने पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए थे और कई बड़े लोगों पर साजिश में शामिल होने का आरोप भी लगाया था। जिसके बाद एसआईटी ने पुलिस अफसरों ने फटकार लगाई और जांच की गोपनीयता को और बढ़ा दिया है। आरोपियों के मीडिया से किसी भी प्रकार की चर्चा करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। जांच प्रभावित करने के लिए टकराव को हवा दे रहे नौकरशाह हनीट्रैप मामले की एसआईटी जांच को प्रभावित करने के लिए नौकरशाह कथित तौर पर दिन-रात एक किए हुए हैं। पहले इस जांच को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई और कहा गया कि इसमें कई वरिष्ठ राजनेता भी संलिप्त हैं, लेकिन जब उनका यह पैंतरा काम नहीं किया तो अब प्रदेश के वरिष्ठ नौकरशाहों में टकराव कराने की कोशिश कराकर जांच प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। हनीट्रैप मामले में की प्रारंभिक पूछताछ में कई नेता और अफसरों के नामों की चर्चा थी। इसी कारण डीजीपी वीके सिंह ने एसआईटी का गठन किया। लेकिन, विवादों को टालने के लिए नौ दिनों के अंदर ही इस टीम के प्रमुख को तीसरी बार बदल दिया गया।  23 सितंबर को गठित एसआईटी की जिम्मेदारी सबसे पहले पहले 1997 बैच के आईपीएस डी श्रीनिवास वर्मा को दी गई। लेकिन, गठन के 24 घंटे के अंदर ही एसआईटी की जिम्मेदारी तेजतर्रार अफसरों में शुमार एडीजी संजीव शमी को दी गई। एक अक्तूबर को संजीव शमी को एसआईटी प्रमुख के पद से हटाकर अब राजेंद्र कुमार को एसआईटी जांच की कमान सौंपी गई है। मददगार तीन पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज हनीट्रैप में आरोपियों की मदद करने वाले तीन पुलिसकर्मियों पर क्राइम ब्रांच ने अड़ीबाजी का केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। ये पुलिसकर्मी आरोपी लड़कियों के इशारे पर लोगों से रुपये देने का दबाव बनाते थे। तीनों पुलिसकर्मियों की पहचान सुभाष गुर्जर, अनिल जाट और लाड़ सिंह के रूप में हुई है। इस मामले में टीम ने नौ लड़कियों, आठ ग्राहक और तीन दलालों को बुधवार को ही गिरफ्तार कर लिया था। सरकारी गवाह नहीं बनेगी आरती पुलिस ने बताया कि वह आरती को अपना गुनाह कबूल करने के बाद सरकारी गवाह नहीं बनाएगी। हालांकि पुलिस ने पहले ही एक छात्रा को सरकारी गवाह बना लिया है। छात्रा को इंदौर की पलासिया  थाना पुलिस अपने साथ लेकर भोपाल लेकर पहुंची है। आरोपियों के बैंक खाते सील करने की तैयारी हनीट्रैप गैंग की चारों महिला आरोपियों के बैंक खाते सीज करने के लिए पुलिस ने भोपाल की बैंकों को पत्र लिखे हैं। पुलिस के अनुसार, अभी उनके पांच खातों की जानकारी ही मिल सकी है। एक टीम चारों महिलाओं की वैध और अवैध संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है। वहीं, पुलिस को पांच कंपनियों और कुछ एनजीओ के नामों की जानकारी भी मिली है जो आरोपियों के द्वारा संचालित किए जा रहे थे। कॉलेज की छात्राओं को भेजा जाता था अफसरों के पास हनीट्रैप की मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन ने पूछताछ में एसआईटी को बताया है कि मध्यवर्गीय परिवार से आने वाली 20 से अधिक छात्राओं को अफसरों के पास भेजा गया। श्वेता ने इस बात का भी खुलासा किया है कि हनी ट्रैप का मुख्य उद्देश्य सरकारी ठेके, एनजीओ को फंडिंग करवाना और वीआईपी लोगों को टारगेट करना था। श्वेता ने बताया कि कई बड़ी कंपनियों को ठेके दिलवाने में मदद की। इस काम में उसकी साथी रही आरती दयाल ने भी अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा श्वेता ने एसआईटी को बताया कि आईपीएस और आईएएस अफसरों की डिमांड पर कॉलेज की छात्राओं को उनके पास भेजा जाता था। इन अधिकारियों में कई तो उन छात्राओं की पिता की उम्र के बराबर थे। श्वेता ने मोनिका यादव नाम की छात्रा का भी नाम लिया।  मोनिका ने एसआईटी को बताया कि श्वेता ने उसे नामी कॉलेज में दाखिला करवाने में मदद के नाम पर ऐसा करने के लिए कहा था। श्वेता के बड़े अफसरों से खास संबंध थे। मुझे विश्वास दिलाने के लिए वह मंत्रालय भी लेकर गई थी। जहां उसने सचिव स्तर के तीन आईएएस अफसरों से मिलवाया। पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि श्वेता ने मोनिका को लग्जरी कार ऑडी भी इंदौर-भोपाल आने जाने के लिए दी थी। एसआईटी को लेकर एमपी पुलिस में खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी हनीट्रैप मामले की जांच कर रही एसआईटी को लेकर एमपी पुलिस के स्पेशल डीजी साइबर क्राइम और एसटीएफ पुरुषोत्तम शर्मा ने खुलकर प्रदेश पुलिस के मुखिया वीके सिंह पर निशाना साधा था। उन्होंने पत्रकार वार्ता में कहा था कि जांच के लिए गठित एसआईटी के सुपरविजन से डीजीपी को हटाया जाए। जिसके बाद कार्रवाई करते हुए सरकार ने उनका तबादला कर संचालक, लोक अभियोजन संचालनालय बना दिया है। एसआईटी की नजर कई अधिकारियों पर हनीट्रैप मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की नजर मध्यप्रदेश के कई आईएएस अफसरों पर है। इनमें से एक अधिकारी आरोपी के घर भी देखे गए थे। माना जा रहा है कि टीम जल्द ही उनसे सवाल-जवाब कर सकती है। वीडियो बनाने के लिए आरोपियों ने लिपस्टिक और चश्मों को बनाया था हथियार पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पकड़ी गईं आरोपियों ने अश्लील वीडियो तैयार करने के लिए स्वदेशी तरीकों से लिपस्टिक, चश्मों और यहां तक सामान्य मोबाइल में छिपाए गए कैमरों का इस्तेमाल किया था। इसी कारण उनके वीडियो बनाने का कभी किसी को शक नहीं हुआ। इन सभी के कब्जे से हाईप्रोफाइल लोगों की सैकड़ों आपत्तिजनक वीडियो क्लिप बरामद की गई थीं। इंदौर की एसएसपी रुचि वर्द्धन मिश्रा ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मीडिया को इनके पास से स्पाई कैमरे भी बरामद होने की जानकारी दी थी, लेकिन इन कैमरों का ब्योरा अभी तक नहीं दिया गया था।  मामले की जांच से जुड़े सूत्रों ने इन स्पाई कैमरों का ब्योरा दिया। हालांकि इसकी पुष्टि करने के लिए मिश्रा या उनके साथ जांच में सहयोग कर रहे क्राइम ब्रांच के अपर पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र सिंह से संपर्क के प्रयास रविवार को सफल नहीं हो सके। गाजियाबाद में सायबर सेल के फ्लैट पर भी बवाल मध्यप्रदेश पुलिस की सायबर सेल ने गाजियाबाद के पॉश इलाके में बिना सरकारी मंजूरी के फ्लैट ले रखा था। पुलिस महानिदेशक वीके सिंह ने इस मामले की जानकारी होने के बाद कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को फटकारा था और पूछा था कि इतनी दूर सायबर सेल के लिए फ्लैट लेने का क्या कारण था। इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने आनन-फानन में सायबर सेल से फ्लैट खाली करवा लिया। सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश पुलिस की सायबर सेल ने सरकारी कामकाज के नाम पर दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले के एक पॉश इलाके में किराये का फ्लैट लिया हुआ था। जांच शुरू हई तो सवाल उठा कि फ्लैट दिल्ली से दूर वो भी बिना शासकीय अनुमति के क्यों लिया गया। आरोपी महिला ने काटी कलाई, पुलिस पर लगाया प्रताड़ना का आरोप मामले की एक आरोपी महिला ने पुलिस हिरासत में कांच से कलाई काटने का प्रयास किया। पीड़िता के वकील ने पुलिस की प्रताड़ना से तंग आकर अपनी मुवक्किल द्वारा यह कदम उठाने का आरोप लगाया है। लेकिन, जिला अभियोजन अधिकारी ने किसी भी महिला के घायल होने से इनकार करते हुए इसे दबाव बनाने की रणनीति करार दिया है।  रिमांड पूरी होने के बाद जेल भेजे गए आरोपी पुलिस ने रिमांड पूरा होने के बाद श्वेता स्वप्निल जैन (48), श्वेता विजय जैन (39), आरती दयाल (29), मोनिका यादव (19) और बरखा सोनी (34) को मंगलवार को जुडिशियिल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (जेएमएफसी) मनीष भट्ट की अदालत में पेश किया था। अदालत ने पांचों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालत के बाहर श्वेता विजय जैन के वकील धर्मेंद्र गुर्जर ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने उनकी मुवक्किल के साथ बुरी तरह मारपीट की है। हालांकि जिला अभियोजन अधिकारी मोहम्मद अकरम शेख ने वकील के आरोपों को झूठा करार दिया। शेख ने कहा कि पुलिस रिमांड के दौरान किसी भी आरोपी को शारीरिक तौर पर टार्चर नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पांचों आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के बाद अदालत के सामने पेश किया गया है। 
View More...

कपिल कक्कड़: हत्या करने वाले आराेपी हनी ओबेराय और धर्मपाल को कोर्ट ने14 दिन के लिये जेल भेजा

Date : 01-Oct-2019
पिपरिया/हाेशंगाबाद 1 अक्टूबर .मप्र के पचमढ़ी में रायपुर के कारोबारी कपिल कक्कड़ की हत्या करने वाले अाराेपी हनी ओबेराय और धर्मपाल को पुलिस ने सोमवार को अदालत में पेश किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दाेनाें अाराेपियाें काे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए हैं। काेर्ट के अादेश के बाद उन्हें जेल भेज दिया है। पिपरिया काेर्ट के एडीपीअाे चाैधरी विक्रम ने बताया कि अाराेपियाें की अाेर से हाईकाेर्ट से अाए वकील ने जमानत अर्जी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दी थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी फिराेज अख्तर ने अाराेपियाें की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हंे जेल भेजने के अादेश दिए हैं। अाराेपी हनी और धर्मपाल की जमानत के लिए दुर्ग से उनके मित्र बड़ी संख्या में पिपरिया की अदालत में पहुंचे थे। काेर्ट का निर्णय सुनते ही साथियाें के चेहराें पर निराशा छा गई। पूछताछ के दौरान धर्मपाल ने बताया कि वह हनी अाेबेराय का पीएसअाे बनने के पहले पहले सुब्रतो राय और सुरेश रैना का गनमैन रह चुका है। दूसरी तरफ पचमढ़ी में ऑल इंडिया बाईकर्स एसोसिएशन के देश के विभिन्न हिस्साें से अाए सदस्य घटना के बाद शनिवार रात से ही होटल से वापस हाने लगे थे। रविवार की दोपहर तक अधिकांश सदस्य जा चुके थे। पुलिस ने सभी के बारे में होटल से जानकारी ले ली है। हनी के वकील ने दिया पेट में जख्म का हवाला :कड़ी सुरक्षा के बीच पचमढ़ी थाना प्रभारी महेश टांडेकर दोनों आरोपियों को लेकर साेमवार दोपहर अदालत में पहुंचे। अदालत में आरोपियों की ओर से हाजिर जबलपुर उच्च न्यायालय अधिवक्ता सौरव शर्मा ने जमानत का आवेदन देते हुए कहा कि हनी के पेट में भी जख्म हुआ है वह गोली से हुआ है। अदालत इस बात को संज्ञान में ले। दूसरी ओर से अभियोजन पक्ष के एडीपीओ विक्रम चौधरी ने कार्रवाई में पुलिस जांच पूरी होने तक आरोपियों को जमानत ना देने के लिए अदालत से निवेदन किया। इसके बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने का आदेश दिया है। अागे क्या- अब अाराेपियाें के वकील की अाेर से सेशन काेर्ट में अर्जी लगाई जा सकती है, यहां से भी खारिज हाेने के बाद जमानत अर्जी हाईकाेर्ट में लगाई जा सकेगी। अभी अाराेपी जेल में हैं।इस खबर के साथ फोटो 30 पीआईपी 7 और 8 भेजे जा रहे हैंपिपरिया। न्यायालया मे आरोपियों को पेश करने के लिए ले जाते हुए पुलिस अधिकारी।
View More...
Previous123456789...2122Next