National

Previous123456789...1617Next

ज्योति गिरी महाराज पर लगा यौन शोषण का आरोप

Date : 22-Aug-2019
गुरुग्राम: 22 अगस्त । स्वयं-भू संत ज्योति गिरी महाराज पर लगा यौन शोषण का आरोप, पीड़िता ने कहा – नाबालिगों के यौन शोषण के सैकड़ों वीडियो हैं मौजूद ज्योति गिरी महाराज ने मुझसे जबरदस्ती संबंध बनाए…मेरे पास ज्यो तिगिरी महाराज के ऐसे 600 वीडियो हैं जिनमें वह नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करते हुए नजर आ रहे हैं। यह दावा है उस पीड़ित महिला का जिसने गुरुग्राम के प्रख्यात बाबा ज्योति गिरी महाराज पर यौन शोषण के गंभीर आरोप मढ़े हैं। महिला के आरोपों और इसपर पुलिसिया कार्रवाई की हम आगे चर्चा करेंगे लेकिन सबसे पहले आपको इस बाबा की शख्सियत से परिचित करा दें। कई नेताओं के हैं करीबी: स्वयं-भू संत ज्योति गिरी महाराज का गुरुग्राम के बहोड़ा कलां गांव में आश्रम है। अफवाहों का बाजार इस बात से भी हमेशा गर्म रहता है कि ज्योति गिरी महाराज आईएएस की नौकरी छोड़ बाबा बन गए। यह बाबा पिछले बीस साल से इसी गांव में रहते हैं। हरियाणा की मौजूदा खट्टर सरकार के कई कैबिनेट मंत्रियों से लेकर इनेलो और कांग्रेस के कई नेता की भी तस्वीरें बाबा के साथ सोशल मीडिया पर मौजूद हैं। इतना ही नहीं गुरुग्राम के सांसद राव इंद्रजीत से लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता संतोष यादव, राव नरबीर सिंह जैसे बड़े सफेदपोश बाबा के आश्रम में आशीर्वाद की अभिलाषा लिए आते हैं। यूट्यूब पर ऐसे कई सारे वीडियो भी मौजूद हैं जिनमें बाबा राम मंदिर के मुद्दे पर बोलते हुए नजर आते हैं। दक्षिण हरियाणा में बाबा की तीन गोशलाएं हैं। सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि उज्जैन, काशी, और हरिद्वार जैसे शहरों में भी ज्योतिगिरी महाराज के कई आश्रम हैं। बाबा पर यह है आरोप: सफेदपोशों के बीच बड़ा रसूख रखने वाले बाबा ज्योति गिरी महाराज पर एक महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित महिला ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती सुनाई है। पीड़िता के मुताबिक बाबा ने उसके साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाया। महिला का यह भी कहना है कि उसके पास ऐसे 600 वीडियो हैं जिनमें वो नाबालिग बच्चियों का यौन शोषण करते हुए नजर आ रहे हैं। महिला का दावा है कि कई लड़कियां बाबा के खिलाफ मुंह खोलना चाहती हैं लेकिन उनकी जान को खतरा हो सकता है इसलिए वो खामोश हैं। कोई पीड़िता सामने नहीं आई: इस मामले में आम आदमी पार्टी की हरियाणा ईकाई के मीडिया प्रभारी सुधीर यादव ने वीडियो को देखने के बाद पुलिस के सामने शिकायत की है जिसके बाद साइबर सेल इस मामले की तफ्तीश कर रही है। हालांकि अभी तक किसी भी पीड़ित लड़की ने पुलिस के सामने आकर बयान नहीं दिया है या फिर केस दर्ज नहीं कराया है। कहा जा रहा है कि गांव के एक शख्स ने गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर और चंडीगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्योति गिरी महाराज के खिलाफ शिकायत पत्र जरुर भेजा है। गांव के कई लोग इस मामले को संदेहास्पद मान रहे हैं। लेकिन अभी तक किसी भी पीड़िता के सामने नहीं आने की वजह से मामले में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। इस मामले को लेकर गांव में तनाव ना बढ़े इसके लिए पुलिस ने ज्योति गिरी महाराज के आश्रम के पास पुलिस बल की तैनाती की है। इधर पीड़ित महिला का वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ भी पुलिस ने केस दर्ज किया है क्योंकि ऐसा करने वालों ने महिला की पहचान को उजागर किया है। कहा जा रहा है कि वीडियो वायरल होने के बाद से बाबा ज्योति गिरी महाराज फरार हो गए हैं। बहरहाल अब पुलिस इस मामले की पूरी तफ्तीश में जुटी है
View More...

चिदंबरम का नाम कैसे आया आईएनएक्स मीडिया घोटाले में

Date : 21-Aug-2019
नई दिल्ली 21 अगस्त । अग्रिम ज़मानत याचिका ख़ारिज होने के बाद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक रही है. चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया मामले में अभियुक्त हैं और उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया वो मामले के प्रमुख साज़िशकर्ता प्रतीत होते हैं. चिदंबरम ने मंगलवार कोअग्रिम ज़मानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रूख़ किया मगर अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को बुधवार को उपयुक्त बेंच के सामने ले जाने को कहा. मंगलवार की शाम जाँच एजेंसियों - सीबीआई और ईडी के अधिकारी - चिदंबरम को गिरफ़्तार करने के लिए दिल्ली में उनके घर पहुंचे लेकिन वो वहाँ नहीं मिले. इसके बाद जांच एजेंसियों ने उनके घर के बाहर नोटिस चिपका दिया जिसमें उनसे पेश होने के लिए कहा गया. क्या है आईएनएक्स मीडिया मामला सीबीआई ने मीडिया कंपनी आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ 15 मई, 2017 को एक एफ़आईआर दर्ज की थी. आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 305 करोड़ रुपये के विदेशी फ़ंड लेने के लिए फ़ॉरेन इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफ़आईपीबी) की मंज़ूरी में कई तरह की अनियमितताएं बरती गईं. जब साल 2007 के दौरान कंपनी को निवेश की स्वीकृति दी गई थी उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री हुआ करते थे. चिदंबरम तब जांच एजेंसियों के रडार पर आए जब आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी से ईडी ने पूछताछ की. ईडी ने इस संबंध में 2018 में मनी लांड्रिंग का एक मामला भी दर्ज किया था. एक रिपोर्ट के अनुसार ईडी ने अपने आरोप पत्र में लिखा है, इंद्राणी मुखर्जी ने जांच अधिकारियों को बताया कि चिदंबरम ने एफ़आईपीबी मंज़ूरी के बदले अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को विदेशी धन के मामले में मदद करने की बात कही थी. सीबीआई ने पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को फ़रवरी 2018 में चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ़्तार कर लिया था. उनके ख़िलाफ़ ये आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ संभावित जांच को रुकवाने के लिए 10 लाख डॉलर की मांग की थी. बाद में कार्ति चिदंबरम को कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी. सीबीआई का कहना है कि आईएनएक्स मीडिया की पूर्व डायरेक्टर इंद्राणी मुखर्जी ने उनसे पूछताछ में कहा कि कार्ति ने पैसों की मांग की थी. जांच एजेंसी के मुताबिक़ ये सौदा दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में तय हुआ था. एयरसेल-मैक्सिस सौदे में भी है नाम केंद्रीय जांच एजेंसी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल मैक्सिस सौदे में भी चिदंबरम की भूमिका की जांच कर रही है. साल 2006 में मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ने एयरसेल में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली थी. इस मामले में रज़ामंदी देने को लेकर चिदंबरम पर अनियमितताएं बरतने का आरोप है. वो 2006 में हुए इस सौदे के वक़्त पहली यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे. 2जी से जुड़े इस केस में चिदंबरम और उनके परिवार पर हवाला मामले में केस दर्ज है. आरोप है कि विदेशी निवेश को स्वीकृति देने की वित्त मंत्री की सीमा महज़ 600 करोड़ है फिर भी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस डील को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की इजाज़त के बिना पास कर दिया गया. लेकिन पी चिदंबरम ने हमेशा अपने और अपने बेटे के ख़िलाफ़ सभी इल्ज़ामों को ख़ारिज किया है. उनके अनुसार उनके ख़िलाफ़ इल्ज़ाम राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित हैं.
View More...

एनडीटीवी के सारे मालिकों व कई अनजान लोगों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज किया है

Date : 21-Aug-2019
नई दिल्ली 21 अगस्त । प्रणव रॉय और राधिका रॉय समेत एनडीटीवी के सारे मालिकों व कई अनजान लोगों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज किया है. इस एफआईआर में एनडीटीवी के मालिकों पर काले धन के खेल में गले तक डूबे होने का आरोप है. इन लोगों ने दर्जनों फर्म/कंपनियां बनाकर अरबों रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया. सीबीआई की तरफ से दर्ज एफआईआर में विस्तार से इस बात का खुलासा किया गया है कि एनडीटीवी के मालिकों ने दुनिया भर के कई देशों में अपनी कंपनियां खोलकर किस तरह अरबों रुपये उगाहे. इसे कह सकते हैं कि ब्लैक मनी को ह्वाइट करने का एक बड़ा खेल खेला है एनडीटीवी ने. उल्लेखनीय है कि आईआरएस अधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव, जिन्हें अपनी अतिसक्रियता के कारण सिस्टम का फिर शिकार बनना पड़ा है, ने एनडीटीवी के प्रणय राय और तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ खुलेआम अरबों रुपये के ब्लैकमनी को ह्वाइट मनी में कनवर्ट करने का आरोप लगाया था. सीबीआई की ताजी एफआईआर में इसी बात की पुष्टि होती है. माना जा रहा है कि अरबों रुपये के इन ट्रांजैक्शन का अगर सही से जांच कर दिया गया तो न सिर्फ एनडीटीवी के मालिक लोग, बल्कि कई बड़े नेता और अफसर भी नपेंगे.
View More...

छत्तीसगढ़ में 72 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा ऐतिहासिक कदम: श्री शरद यादव

Date : 20-Aug-2019
रायपुर, 20 अगस्त 2019/ पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री शरद यादव ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा राज्य में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 72 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की घोषणा को ऐतिहासिक कदम बताते हुए प्रशंसा की है। श्री यादव ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ राज्य में आरक्षण को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 72 प्रतिशत किए जाने को साहसिक कदम बताया है और वे इस कदम से काफी प्रभावित हैं। श्री यादव ने कहा कि देश में कुछ बड़े घराने ही सब कुछ समेटने लगे हैं। ऐसे में यदि वंचितों को हम कुछ दे सकते हैं तो सिर्फ यही एक रास्ता है आरक्षण का, जिसे बढ़ाकर आपने अन्य राज्यों के लिए एक मिशाल प्रस्तुत किया है। श्री यादव ने कहा कि आने वाले दिनों में अन्य प्रदेश भी आपके इस निर्णय का अनुसरण करेंगे। वंचितों के उत्थान के लिए आपने जो कदम उठाया वह वाकई में ऐतिहासिक है। मैं आपके इस निर्णय का स्वागत करते हुए आपको धन्यवाद देता हूँ।
View More...

तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, बंद नहीं होगा यौन उत्पीड़न का मामला

Date : 19-Aug-2019
नई दिल्ली 19 अगस्त । सुप्रीम कोर्ट ने तहलका मैगज़ीन के संस्थापक तरुण तेजपाल की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपने ऊपर चल रहे यौन हमले के मुक़दमे को रद्द करने की मांग की थी. तरुण तेजपाल के ख़िलाफ़ उनकी जूनियर सहकर्मी ने यौन हमले का मुक़दमा दर्ज कराया है और मामला गोवा की अदालत में है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर और नैतिक रूप से काफ़ी वीभत्स अपराध है. सुप्रीम ने यह आदेश भी दिया कि गोवा की अदालत में इसकी सुनवाई अगले छह महीने के भीतर पूरी की जाए. इससे पहले गोवा हाई कोर्ट ने भी तरुण तेजपाल पर चल रहे यौन हमले के मुक़दमे को रद्द करने वाली ख़ारिज कर दी थी. इसके बाद तेजपाल सुप्रीम कोर्ट गए थे और यहां भी उनके पक्ष में फ़ैसला नहीं आया. नवंबर 2013 में गोवा के एक फ़ाइव स्टार होटल में तहलका मैगज़ीन का कार्यक्रम था. इसी कार्यक्रम के दौरान उनकी जूनियर सहकर्मी ने लिफ़्ट में यौन हमले का आरोप लगाया था. उत्तरी गोवा में मापुसा टाउन की एक अदालत में तेजपाल के ख़िलाफ़ यौन हमला और उत्पीड़न के आरोप तय हुए हैं. आरोप लगने के बाद तरुण तेजपाल ने तत्काल तहलका मैगज़ीन के संपादक पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्हें नवंबर 2013 में ही गिरफ़्तार कर लिया गया था. मई 2014 से तरुण तेजपाल बेल पर हैं. तरुण तेजपाल कहते रहे हैं कि उन्हें फंसाया गया है.
View More...

तेजस्वी यादव की अपनो से ही बढ़ रही बेरुख़ी

Date : 19-Aug-2019
पटना 19 अगस्त। बिहार के मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल अपने इतिहास के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है. शनिवार को आरजेडी के विधायकों की बैठक थी लेकिन इसे रद्द करना पड़ा. यह बैठक पूर्वनियोजित थी लेकिन पार्टी ने रद्द करने की कोई वजह नहीं बताई. कहा जा रहा है कि विधायकों की बैठक को विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के कारण रद्द करना पड़ा क्योंकि वो इसमें शरीक होने को तैयार नहीं थे. इससे पहले शुक्रवार को बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा था कि विधायकों की बैठक में तेजस्वी यादव भी शामिल होंगे. लोकसभा चुनाव में पार्टी की बुरी तरह से हार के बाद से तेजस्वी यादव राजनीतिक परिदृश्य से ग़ायब हैं. तेजस्वी विधानसभा के सत्र में भी आख़िर की कुछ कार्यवाही में हिस्सा लिए. तेजस्वी विपक्ष के नेता हैं फिर भी किसी बहस में भाग नहीं लिए. यहां तक कि वो आरजेडी में चलाए गए सदस्यता अभियान से भी दूर रहे. आरजेडी में इस बात को लेकर चिंता है कि तेजस्वी पार्टी की राजनीति में लोकसभा चुनाव के बाद से बिल्कुल दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. कहा जा रहा है कि तेजस्वी पार्टी की पूरी कमान अपने हाथों में चाहते हैं लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया है. वो अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव की गतिविधियों से भी नाराज़ बताए जाते हैं. इसके साथ ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से भी नराज़ बताए जा रहे हैं जिन्होंने लोकसभा में हार के लिए तेजस्वी को ज़िम्मेदार ठहराया है. वो चाहते हैं कि पार्टी के भीतर पहले इन मुद्दों का समाधान किया जाए तब सक्रियता दिखाएंगे.
View More...

कश्मीर का लाल चौक 370 के निष्प्रभावी होने के बाद अब एक मामूली चौराहा, शुभ्रास्था

Date : 17-Aug-2019
जवाहरलाल नेहरू और शेख़ अब्दुल्ला के बीच कश्मीर मसले पर समझौता हुआ था. जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीरियों के सामने संकल्प लिया था कि कश्मीरी ही कश्मीर का भविष्य निर्धारित करेंगे. रेफ़रेंडम के उस ज़िक्र को कई राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टियां भारत की एक कूटनीतिक भूल भी मानते हैं. शेख़ अब्दुल्ला ने ख़ुशी के इस मौक़े पर फ़ारसी में एक नज़्म पढ़ी थी जिसका अर्थ, मैं आप बन गया और आप मैं बन गए. मैं आपका शरीर बन गया और आप मेरी आत्मा बन गए. अब कोई कह नहीं सकता कि हम अलग-अलग हैं. 1947 के बाद से कश्मीर के हालात लगातार बिगड़ते गए. चरमपंथ और वामपंथ का अड्डा बनते कश्मीर के लाल चौक को रूस के रेड स्क्वेयर की तरह देखा जाने लगा. लाल चौक धीरे-धीरे भारत के ख़िलाफ़ होने वाली हर गतिविधि के केंद्र बन गया. लाल चौक पर ख़ून से सनी कई इबारतें लिखी गईं. भारत से विद्रोह और पाकिस्तान की हिमायत, इन दोनों की क़वायद करने वाले नेताओं ने लाल चौक पर ख़ूब झंडे फहराए. आज हमें यह सोचना है कि कश्मीर का लाल चौक क्या वास्तव में किसी प्रतीकात्मक विजयघोष का केंद्र है? लाल चौक बना आम चौक?. धारा 370 के निष्प्रभावी होने पर लाल चौक का वामपंथी मिथक भरभरा कर गिर चुका है. एक सुदूर, अप्राप्य और बौद्धिक रोमांच के दिवास्वप्न का प्रतीक लाल चौक क्या आज के भारत और कश्मीर का प्रतिनिधित्व करता है? 1990 में कश्मीरियत को मिले सांप्रदायिक धोखे और पंडितों के जबरन पलायन का मूकदर्शक लाल चौक नेहरू और शेख़ अब्दुल्ला के मौखिक संकल्प पर कभी न खुलने वाले सांप्रदायिक साँकल की तरह है. कश्मीरियत के नाम पर की जाने वाली दोयम दर्जे की राजनीति का केंद्र बन चुका लाल चौक आज के संदर्भ में नकारात्मकता का केंद्र है. चाहे वह 2008, 2009 या 2010 का भारत विरोधी प्रचार हो, या वह कर्फ़्यू लगे कश्मीर में पैसे लेकर पत्थर फेंकने वाले युवाओं का जत्था हो, लाल चौक कश्मीर की बर्बादी का प्रतीक है. पिछले कई दशकों की भारत विरोधी और कश्मीरी विरोधी राजनीतिक स्ट्रैटेजी और उसके प्रयोगों की परखनली है लाल चौक. लेकिन अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी के. साथ कश्मीर के साथ भारत के संवैधानिक एकीकरण के बाद लाल चौक इस देश के किसी अन्य चौक की तरह बन गया है. हालाँकि कालांतर में कश्मीर में हुए सांप्रदायिक इस्लामिक चरमपंथ ने नेहरु के संकल्प की अवमानना करते हुए लाल चौक की स्मृतियों को दूषित किया तो था लेकिन अनुच्छेद 370 का निष्प्रभावी होना, लाल चौक की प्रतीकात्मक राजनीति को पूरी तरह से ध्वस्त करता है. जैसे त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति को गिराकर त्रिपुरावासियों ने जर्जर हो चुकी एक विचार परम्परा का बहिष्कार किया, ठीक उसी तरह, कश्मीर में लाल चौक को किसी भी ऐतिहासिकता से वंचित कर देना एक वैचारिक क़दम होगा. लाल चौक को उसके विवादित ऐतिहासिक स्वरूप से आज़ाद करने की आवश्यकता है. 370 के निष्प्रभावी होने पर और तमाम विपक्ष की इस मुद्दे विशेष पर कोई सिलसिलेवार या ठोस बहस के अभाव में, कश्मीर को देश के अन्य किसी भी राज्य या प्रांत के समकक्ष देखना लाल चौक के ऐतिहासिक महत्व पर एक टिप्पणी है. टिप्पणी यह है कि बौद्धिक उन्माद और छायावादी रोमांच के परे लाल चौक का कोई महत्व आज के भारत और उस भारत के एक हिस्से कश्मीर में नहीं बचा है. आज कश्मीरियत अपने नाम पर की जाने वाली दोयम दर्जे की राजनीति से आज़ादी चाहता है. भारत में एकीकृत होने के बाद, अन्य प्रदेशों की तरह कश्मीर की अवाम वस्तुतः उस मुद्दे पर उसी संविधान से न्याय की गुहार कर सकती है जिस संविधान की शरण में देश के सभी प्रदेशों की सभी सरकारें अपनी नीतियों से वैश्विक स्तर पर एक मिसाल क़ायम करती हैं. प्रश्न यह है कि क्या हम- कश्मीर और देश की नई पीढ़ी- इस नवीन आरम्भ को सदियों से सड़ रही भयावह और बासी हो चुकी राजनीतिक आवाज़ों से ऊपर एक नई धुन दे सकते हैं? किसने बढ़ाया चरमपंथ ? आँकड़े हमारे समक्ष हैं. किन लोगों ने कश्मीर की सियासत को कुछेक घरों तक नज़रबंद करके रखा, किन लोगों ने कश्मीर की कम-से-कम तीन पीढ़ियों के बच्चों की तुलना में अपने बच्चों के साथ भेदभाव किया, किन लोगों ने कश्मीर को धार्मिक उग्रवाद की तरफ़ प्रेरित किया, किन लोगों के जन्नत को दोज़ख़ बना डाला और किन लोगों ने कश्मीर पर लुटाए जाने वाले भारतवासियों के टैक्स और प्रेम को भी चंद व्यावसायिक सौदों तक समेट कर रख दिया. इन सबका ब्योरा आज कश्मीर की जनता और भारत की आवाम के सामने स्पष्ट है. कश्मीर का भारत के साथ इस रूप में एकीकृत होना अपने-आप में एक युगांतकारी घटना है. ये केवल एक राजनीतिक शिकस्त या जीत का बिंदु नहीं है, एक वैचारिक विजय भी है, इसलिए लाल चौक जैसे वामपंथी और भारतीय संदर्भ में अतार्किक शब्दावली को उसके भौतिक स्वरूप के साथ साथ नकारना आवश्यक है. नए कश्मीर में नई सोच के साथ एक नयी इबारत गढ़ी जाए. नए कश्मीर में इतिहास के राजनीतिक रस्साकशी के परे सौहार्द्र के इतिहास को जीवंत करने की क़वायद हो. नए कश्मीर में कल्हन की राजतरंगिनी के साथ साथ लल दद की कविताओं का पाठ भी हो. नए कश्मीर में पीरों की मज़ारों के दर्शन के अलावा शिव-पार्वती के विवाह का वार्षिक उल्लास भी सब मिलकर मनाएँ. नए कश्मीर में जो भगाए गए उनको गले लगाने के लिए एक पहल भी शुरू की जाए. और नए कश्मीर में ये सब केवल राजनीति से या राजनेताओं के माध्यम से न हो बल्कि कश्मीरी समाज से स्वयंभू चेतना के रूप में ख़ुद-ब-ख़ुद सामने आए. नया कश्मीर नए भारत के लिए प्रेरणा भी हो और नए भारत के तेजस्वी मस्तक के रूप में जगमगाए- ऐसी ही शुभकामना. (ये लेखिका के निजी विचार हैं)
View More...

भारत से नाराज़ पाकिस्तान ने वाघा बॉर्डर पर नहीं बांटी मिठाइयां:

Date : 15-Aug-2019
नई दिल्ली 15 अगस्त । पाकिस्तान अपनी आज़ादी और बक़रीद के अवसर पर अटारी-वाघा बॉर्डर पर भारतीय सीमा सुरक्षा बलों को मिठाई देता है जो इस पर नहीं दी गई. पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में भारत के साथ होने वाले मिठाई के आदान-प्रदान पर रोक लगा दी है. सोमवार को बक़रीद के अवसर पर भी सीमा सुरक्षा बल को इस बार मिठाई नहीं दी गई थी.
View More...

कश्मीर में आर्थिक प्रगति आएगी और सरकार का हालिया फ़ैसला इसमें मददगार साबित होगा, प्रधानमंत्री

Date : 12-Aug-2019
नई दिल्ली 12 अगस्त । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी किए जाने के बाद पहली बार चीन-अमरीका, कश्मीर और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी है. पीएम मोदी ने कहा है कि आने वाले समय में कश्मीर में आर्थिक प्रगति आएगी और सरकार का हालिया फ़ैसला इसमें मददगार साबित होगा. अंग्रेजी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कई मुद्दों पर बात की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर में निवेश की संभावनाओं पर कहा है कि वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर के युवा राज्य को नई ऊंचाइंयों पर ले जाएंगे. पीएम ने इस इंटरव्यू में कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि ये होकर रहेगा. यही नहीं, कई बड़े उद्यमियों ने अभी से ही जम्मू-कश्मीर में निवेश करने के प्रति अपना रुझान दिखाना शुरू कर दिया है. आज के दौर में एक बंद माहौल में आर्थिक प्रगति नहीं हो सकती. खुले दिमाग़ और खुले बाज़ार ये आश्वस्त करेंगे कि घाटी के युवा कश्मीर को प्रगति के रास्ते पर लेकर जाएं क्योंकि एकीकरण निवेश, अन्वेषण, और आमदनी को बढ़ावा देता है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 370 पर हालिया फ़ैसला आश्वस्त करता है कि घाटी में ये सभी तत्व मौजूद हों. ऐसे में निवेश होना निश्चित है. क्योंकि ये क्षेत्र कुछ ख़ास उद्योगों जैसे पर्यटन, आईटी, खेती और हेल्थकेयर के लिए काफ़ी मुफीद है. इससे एक ऐसा इको-सिस्टम तैयार होगा जो कि कौशल, प्रतिभा और क्षेत्रीय उत्पादों के लिए मुफीद साबित होगा. आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों के खुलने की वजह से युवाओं के लिए शिक्षा के बेहतर अवसर पैदा होंगे और कश्मीर को भी बेहतर कामगार मिलेंगे. हवाई-अड्डों और रेलवे के आधुनिकीकरण की वजह से यातायात करना बेहतर होगा. इससे इस क्षेत्र के उत्पाद पूरे देश में पहुंच पाएंगे जिससे आम आदमी को फायदा होगा. इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि ये पूरी तरह आंतरिक मामला है. प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं, मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैंने ये निर्णय बहुत सोच-समझकर लिया है. मैं इसे लेकर पूरी तरह निश्चिंत हूं. इससे आने वाले दिनों में लोगों का भला होगा. पीएम मोदी से एक सवाल किया गया कि एनडीए सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में जल संरक्षण को अपना उद्देश्य बनाया है, क्या इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मॉनसून पर निर्भरता कम करने का व्यापक लक्ष्य साधा जा रहा है? इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा है कि जल-शक्ति अभियान सिर्फ़ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है. बल्कि, ये आम लोगों का आंदोलन है जिसमें केंद्र सरकार एक साझेदार की भूमिका निभा रही है. मोदी ने कहा, भारत को आगे ले जाने के लिए आर्थिक कदम उठाने के साथ-साथ व्यवहार में बदलाव करने की भी ज़रूरत है. जब एक किसान ड्रिप इरिगेशन शुरू करता है तो इसमें पानी का छिड़काव करने के लिए उपकरणों की खरीद एक आर्थिक पहलू को सामने लाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डेटा सिक्योरिटी और प्राइवेसी को लेकर भी सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि इस मुद्दे से उपजने वाले आर्थिक अवसर को लेकर उनकी क्या राय है. इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा, मैं इसे इस तरह देखता हूं. जिस तरह 90 के दशक में सॉफ़्टवेयर और आईटी के क्षेत्र ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना असर दिखाया था, ठीक उसी तरह डेटा का क्षेत्र निकट भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना असर दिखाएगा. हमें डेटा को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए. जितनी ज़्यादा मात्रा में डेटा हासिल किया जा रहा है और सहेजा जा रहा है, वो अपने आप में नौकरियों, कंपनियों और उद्योगों के विशाल क्षेत्र का निर्माण कर रहा है. भारत अपने प्रतिभावान युवा, बढ़ती अर्थव्यवस्था, मुफ़ीद सरकार और विशाल बाज़ार के साथ दुनिया भर में डेटा साइंस, एनालिटिक्स और स्टोरेज़ का केंद्र बन सकता है. पीएम मोदी के साक्षात्कार पर वरिष्ठ पत्रकार आलोक पुराणिक कानज़रिया गहराई से देखें, तो पीएम मोदी की अर्थनीति एक गहन वामपंथी रुख ले चुकी है और उसमें गरीबों, किसानों, मजदूरों की बातें वैसी हैं, जैसी आम तौर पर वामपंथी नेता करते दिखते हैं. भाजपा अपनी नीतियों में जितनी वामपंथी दिखायी पड़ रही है, उतने तो वामपंथी भी वामपंथी दिखायी नहीं पड़ते. किसानों को सालाना छह हजार रुपए, 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपए सालाना तक की बीमा योजना की मदद. देश के महत्वपूर्ण आर्थिक अखबा़र इकोनोमिक टाइम्स में पीएम नरेंद्र मोदी का दो पेज का साक्षात्कार छपा है. मोटे तौर पर पीएम मोदी ने अपनी उन बातों को दोहराया है, जो वह तमाम मंचों से लगातार दोहराते रहे हैं. अस्तित्व के संकट से बचाने के लिए अर्थव्यवस्था में भरपूर इंतजाम हैं पर तमाम औद्योगिक क्षेत्रों में मांग को मजबूत करने के लिए जो नक्शा चाहिए, वह इस साक्षात्कार में नहीं है. आयुष्मान से लेकर किसानों के लिए छह हजार रुपये साल तक के जरिये सरकार न्यूनतम खर्च का इंतजाम कर देगी, पर तेज गति से विकास की ज़िम्मेदारी कौन उठाएगा यह नहीं मालूम. इस साक्षात्कार में विस्तार से इस बात पर विमर्श नहीं है कि किस तरह से ठीक ठाक नौकरियों का विकास होगा. किसानों को 6000 रुपये साल से उठा कर निर्यातक की श्रेणी में लाने की बात इस साक्षात्कार में है, पर इसे ठोस कार्ययोजना में कैसे बदला जायेगा, इस पर महीन विमर्श होना अभी बाकी है. पीएम मोदी राजनीतिक अर्थव्यवस्था का वह कोड खोल चुके हैं, जिसके तहत कुछ विपन्न तबकों को कुछ करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफ़र करके वोट हासिल करना मुश्किल नहीं है. किसानों के खाते में ट्रांसफर से लेकर छोटे कारोबारियों के लिए शुरू हुई मुद्रा कर्ज़ की योजनाओं की राजनीतिक सफलता यह साफ करती है कि समग्र अर्थव्यवस्था भले ही धीमी गति से चले पर कुछ वर्गों के हाथों में अगर क्रय क्षमता है तो पीएम मोदी को राजनीतिक दिक्कत नहीं होगी. इसे लेन देन की राजनीतिक अर्थव्यवस्था भी कह सकते हैं. पीएम मोदी इस साक्षात्कार में एक बार फिर दोहरा रहे हैं कि आगामी पांच सालों में निवेश आधारित विकास होगा. 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है. पर यह बात अलग है कि तमाम उद्योगपति निवेश को बढ़ाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं. चीन और अमेरिका के बीच चल रहे ट्रेड वॉर में भारत को लाभ क्यों नहीं मिल रहा है? चीन से तमाम कंपनियां भारत की तरफ क्यों नहीं आ रही हैं? इन सवालों का जवाब दरअसल पीएम मोदी के पास भी नहीं है. केंद्र और राज्य के स्तर पर इतनी तरह की औपचारिकताएं हैं कि कारोबार करना आसान अब भी नहीं है. खास तौर पर विदेशी निवेशकों के लिए गति धीमी है और मौजूदा ढांचे में इसमें तेजी संभव नहीं है. यह साक्षात्कार ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए थोड़ी राहत की बात करता है. पीएम मोदी इस सेक्टर को एक न्यूनतम आश्वस्ति देते हैं कि परंपरागत तकनीक पर आधारित ऑटोमोबाइल वाहनों को एक झटके में ही बिजली चालित तकनीक पर नहीं लाया जायेगा. बिजली चालित तकनीक और परंपरागत तकनीक का अस्तित्व साथ साथ बना रह सकता है. ऑटोमोबाइल सेक्टर का समग्र मैन्युफेक्चरिंग सेक्टर में बड़ा योगदान है. पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 से जुड़े सवाल का जो जवाब दिया है उसके विश्लेषण के लिए थोड़ा वक्त देना होगा. पीएम मोदी ने साक्षात्कार में जो कहा है, उसका आशय है कि नई स्थितियों में कश्मीर में निवेश बढ़ने की संभावनाएं हैं. सेंटर फॉर इंडियन इकॉनोमी यानी सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2016 से जुलाई 2019 के बीच जम्मू कश्मीर बेरोज़गारी के चार्ट में सबसे ऊपर है. इस अवधि में जम्मू कश्मीर में मासिक औसत बेरोज़गारी दर 15 प्रतिशत रही. इसी अवधि में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 6.4 प्रतिशत रही है. पूरे देश के मुकाबले दोगुने से ज्यादा बेरोज़गार जम्मू कश्मीर में है. तीन-चार साल में अगर जम्मू कश्मीर की बेरोज़गारी का स्तर राष्ट्रीय स्तर पर आ जाता है, तो माना जाना चाहिए कि कम से रोजगार के स्तर पर जम्मू कश्मीर देश की मुख्यधारा में आ गया है.
View More...

दोस्त के न आने पर एनआईटी की छात्रा ने फाँसी लगा ली

Date : 10-Aug-2019
रायपुर 10 अगस्त । रायपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) की एक छात्रा जो केमिकल इंजीनियरिंग की रिसर्च स्कॉलर थी।उसने गले में फांसी का फंदा डालकर अपने आप को मौत के हवाले कर दिया। लड़की ने गले में फांसी का फंदा डालकर अपने दोस्त को वीडियो कॉल किया और उसे रायपुर आने के लिए कहा। दोस्त ने मना किया, तो दुखी छात्रा फंदे से लटक गई। इससे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक डीडीनगर के शहनाई गार्डन के पीछे पेइंग गेस्ट में रहने वाली संध्या सुरेश गेडाम (25) एनआईटी की रिसर्च स्कॉलर थीं। बुधवार को सुबह करीब 11 उन्होंने अपने नागपुर के इंजीनियर दोस्त आशुतोष को कॉल किया और रायपुर आने के लिए कहा। उसने इनकार कर दिया। इससे दुखी होकर संध्या ने सिलिंग फेन में चुनरी का फंदा बनाया और अपने गले में डाल लिया। इसके बाद आशुतोष को वीडियो कॉल किया और फांसी लगाने की जानकारी देते हुए फिर बुलाया। आशुतोष समझाने की कोशिश करने लगा। इतने में संध्या ने मोबाइल बंद कर दिया और फंदे पर झूल गई। अनहोनी की आशंका से आशुतोष घबरा गया और संध्या के आसपास रहने वाले उसके दोस्तों को फोन करके घटना की जानकारी दी। दोस्तों ने कॉलेज को जानकारी दी। इसके बाद संध्या के कमरे में पहुंचे। उनका दरवाजा भीतर से बंद था। दरवाजा तोडकऱ भीतर घुसे, तो संध्या फांसी के फंदे पर लटकते हुए मिली। उसे तत्काल नीचे उतारा गया। बताया जाता है कि उस समय उसकी सांसे चल रही थी। छात्रा को तत्काल आंबेडकर अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए मरच्यूरी में रखवा दिया गया। मृतका मूलत: नागपुर की रहने वाली थी।घटना की सूचना मिलने के बाद गुरुवार को परिजन रायपुर पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस का दावा, कॉलेज फ्रेंड से की बात मामले की जांच कर रहे डीडीनगर थाने के एसआई सोमित्री भोई ने बताया कि छात्रा की खुदकुशी की गुरुवार को शाम 4 बजे मिली थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि खुदकुशी से पहले संध्या ने नागपुर के आशुतोष से वीडियो कॉलिंग पर बातचीत की है। वह उसे रायपुर बुला रही थी। आशुतोष और संध्या नागपुर में एक साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं। तनाव में रहती थी छात्रा पुलिस के दावों के अलावा आसपास के छात्र-छात्राओं का कहना है कि संध्या पढ़ाई को लेकर काफी दबाव में थी। इसके चलते वह तनाव में रहती थी। आशुतोष से भी इसी बात को लेकर चर्चा करती रहती थी। उल्लेखनीय है कि संध्या पिछले एक साल से रायपुर में रहकर केमिकल इंजीनियरिंग में रिसर्च कर रही थी। शुक्रवार की छात्रा की मौत पर एनआईटी में शोकसभा का आयोजन किया गया
View More...
Previous123456789...1617Next