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कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठकः

Date : 16-Aug-2019
 16 अगस्त 2019 कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक भारत प्रशासित कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेने के भारत के क़दम पर संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद शुक्रवार को बंद कमरे में बैठक करेगी. न्यूज़ एजेंसी को राजनयिकों ने यह जानकारी दी है. उनके अनुसार सुरक्षा परिषद के मौजूदा अध्यक्ष पोलैंड ने सुबह 10 बजे (1400 जीएमटी) इस मुद्दे को चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया है. वहीं विवादित क्षेत्र कश्मीर को बांटने वाली नियंत्रण रेखा पर भारत और पाकिस्तान के बीच भारी गोलाबारी हुई है. पाकिस्तान का कहना है कि नियंत्रण रेखा पर भारत की ओर से की गई गोलाबारी में तीन पाकिस्तानी सैनिक मार गए हैं. पाकिस्तान ने पांच भारतीय सैनिकों के मारा जाने का दावा भी किया जिसे भारत ने ख़ारिज कर दिया. भारत प्रशासित कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़ा हुआ है. जम्मू-कश्मीरः अनुच्छेद 370 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और मीडिया के काम करने पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र के फ़ैसले को क़ानूनी चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. यह याचिका वकील एमएल शर्मा और कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने दायर की है जिस पर चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे और जस्टिस एसए नज़ीर की पीठ सुनवाई करेगी. वकील ने जहां अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने को चुनौती दी है वहीं पत्रकार ने राज्य में मोबाइल, इंटरनेट, लैंडलाइन समेत सभी संचार सुविधाओं को बहाल करने की मांग की है ताकि मीडिया अपना काम कर सके.
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कश्मीरः लंदन में भारत विरोधी और समर्थक प्रदशन(गगन सब्बरवाल)

Date : 16-Aug-2019
लंदन 16 अगस्त । भारत के जम्मू-कश्मीर का ख़ास दर्जा ख़त्म करने के विरोध में लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन हुआ है. वहीं इस प्रदर्शन से कुछ ही दूर पर भारतीय समुदाय के लोगों ने आज़ादी का जश्न मनाया और कश्मीर का ख़ास दर्जा ख़त्म किए जाने के समर्थन में प्रदर्शन किया. दूसरी ओर भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पाकिस्तानी सरकार ने 15 अगस्त को देशभर में काले दिवस के तौर पर मनाया है. लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर हुए प्रदर्शन में दक्षिण एशिया के प्रवासियों के कई समूह शामिल थे. प्रदर्शनकारियों ने भारतीय सरकार से अनुच्छेद 370 पर लिए गए अपने फ़ैसले को वापस लेने की अपील की. गुरुवार को हुए इस प्रदर्शन का आह्वान ब्रिटेन की कश्मीर काउंसिल ने किया था. इसके समर्थन में कई ख़ालिस्तानी समूह भी जुटे. कश्मीर काउंसिल से जुड़े छात्रों ने मंगलवार से इस प्रदर्शन की तैयारी की थी और कई बैनर और पोस्टर डिज़ाइन किए थे. भारत सरकार के संविधान के अनुच्छेद 370 को बेअसर करने के बाद से ही लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं. आयोजकों का दावा है कि गुरुवार को हुए प्रदर्शन में भारी तादाद में लोग शामिल थे. संवाददाता गगन सब्बरवाल के मुताबिक सिख संगठन भी इसमें जुटे थे. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा, ये ज़ुल्म और ज़्यादती है क्योंकि कश्मीर के लोगों को अपना फ़ैसला अपनी मर्ज़ी से करने का अधिकार होना चाहिए. ये क़दम कश्मीर के लोगों के हक़ों पर डाका है. ये ग़ैर क़ानूनी तरीके से किया गया है. वहीं एक प्रदर्शनकारी ने कहा, संयुक्त राष्ट्र को कश्मीर के लोगों में रायशुमारी करानी चाहिए. वहीं भारत के समर्थन में जुटे लोगों का कहना था, भारत कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक है. हम इसी का जश्न मनाने जुटे हैं. एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, मैं नरेंद्र मोदी का दिल खोलकर समर्थन करती हूं. वो हमारे देश के लिए ऐसे बड़े बड़े क़दम उठा रहे हैं जो आज तक किसी ने नहीं उठाए थे. एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, सरकार के इस फ़ैसले के बाद कश्मीर में तेज़ तरक्की होगी. आप देखिएगा कश्मीर कितना आगे बढ़ेगा. वहीं प्रदर्शन के दौरान सौ से ज़्यादा स्कॉटलैंड यार्ड के जवान भी सुरक्षा में तैनात रहे. लंदन के अलावा बर्मिंघम, लूटन,ब्रैडफ़र्ड आदि शहरों में भी कश्मीर के मुद्दे पर भारत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं. लंदन में ऐसे प्रदर्शन पहले भी हुए हैं और आगे भी हो सकते हैं.
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पूरी दुनिया में कुछ इस तरह मनाई गई ईद

Date : 13-Aug-2019
रविवार शाम ईद का त्योहार शुरू हुआ जिसे दुनिया भर में मनाया गया. बकरीद यानी ईद-उल-अज़हा ये मुसलमानों का पवित्र त्योहार है. दुनिया भर की ईद तस्वीरों में देखिए-पाकिस्तान के लाहौर की बादशाही मस्ज़िद में नमाज़ पढ़ती महिला. पाकिस्तान के लाहौर की बादशाही मस्ज़िद में नमाज़ पढ़ने के लिए इकट्ठा हुए लोग , बांग्लादेश की राष्ट्रीय मस्ज़िद बैतुल मुकर्रम में सजदा करते लोग , भारत के कोलकाता में सजदा करने जाते लोग , भारत के चेन्नई में ईद के मौके पर तैयार बच्चियां , कोलकाता में सजदा करते लोग , ईद पर आंखों में सुरमा लगाता युवक. नेपाल में ईद के मौके पर नमाज़ के लिए इकट्ठा लोग यूक्रेन में ईद की खुशी में गुब्बारों के साथ लड़कियां
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सुरक्षा परिषद में लोग हमारे लिए हार लेकर नहीं खड़े हैं, महमूद कुरैशी

Date : 13-Aug-2019
नई दिल्ली 13 अगस्त । पिछले हफ़्ते भारत ने जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किया तब से पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद में ले जाने की घोषणा की है लेकिन वो ख़ुद मान रहा है कि इसकी राह बहुत आसान नहीं है. सोमवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, एक मसले को समझदारी से आगे ले जाना काफ़ी जटिल है. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में वो हमारे लिए हार लेकर खड़े नहीं हैं. सुरक्षा परिषद में जो पाँच स्थायी सदस्य हैं, उनमें से कोई भी रुकावट बन सकता है. क्या आपको कोई शक है? आपको इस चीज़ को लेकर सजग रहना होगा. क़ुरैशी ने कहा, देश आम कश्मीरी लोगों के साथ भारत की ओर से किए जा रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ खड़ा है. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने तुर्की, ईरान और इंडोनेशिया समेत तमाम दूसरे देशों की सरकारों से संपर्क किया है. ख़ान ने इन देशों के नेताओं को बताया है कि भारत सरकार ने किस तरह बिना किसी को भरोसे में लिए अपनी मर्जी के हिसाब से कश्मीर की क़ानूनी स्थिति में बदलाव कर दिया है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मसले को एक विवाद के रूप में देखा गया है और ये एक आम लक्ष्य था जो कि राजनीति और दूसरे तमाम हितों से ऊपर होना चाहिए. क़ुरैशी ने कहा, पाकिस्तान ने कश्मीर के मुद्दे को एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाने का फ़ैसला किया है और चीन ने इस प्रक्रिया में पाकिस्तान का समर्थन करने का आश्वासन भी दिया है. क़ुरैशी ने कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की राह आसान नहीं है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा, पाकिस्तान का राष्ट्रीय राजनीतिक नेतृत्व इस मुद्दे पर एकजुट है. अगर भारत ने कोई भी आक्रामक क़दम उठाया तो पाकिस्तान ख़ुद का बचाव करने का अधिकार रखता है. लेकिन यहां ये महत्वपूर्ण है कि भारत सरकार इस पूरी प्रक्रिया में कश्मीर में अवाम में बड़ा बदलाव करने की योजना बना रही है. सोमवार को ही पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने कहा है कि भारत दुनिया का ध्यान कश्मीर से नियंत्रण रेखा पर केंद्रित करने की कोशिश कर रहा है. बाजवा ने कहा कि वो भारत को कश्मीर में हो रहे नाइंसाफ़ी पर पर्दा नहीं डालने देंगे. पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार जनरल बाजवा ईद के मौक़े पर सोमवार को नियंत्रण के रेखा के पास बाघ सेक्टर गए थे और वहीं सैनिकों के साथ ईद मनाई. जनरल बाजवा के बयान को पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशन ने जारी किया है. इस बयान में कहा गया है, भारत दुनिया का ध्यान अपने क़ब्ज़े वाले कश्मीर से नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान की तरफ़ खींचना चाह रहा है. ऐसा करने के लिए भारत कुछ भी कर सकता है. हमें इस बात का ध्यान रखना है कि भारत को ऐसा करने का कोई मौक़ा न दें, जिससे ये बात छुप जाए कि कश्मीर में अभी क्या हो रहा है. जनरल बाजवा ने कहा, हमारा मजहब हमें शांति सिखाता है लेकिन बलिदान और सच का साथ देना भी बताता है. हम कश्मीर में अपने भाइयों और बहनों के साथ खड़े हैं. यह मायने नहीं रखता है कि कितना वक़्त लगेगा और कितनी कोशिश करनी होगी. इंशा-अल्लाह हम इसे साबित करेंगे. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का दौरा करेंगे. यहां वो विधानसभा को संबोधित करेंगे. इमरान ख़ान का कहना है कि वो कश्मीरियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए ऐसा कर रहे हैं. चीन का समर्थन किसको? वहीं, सोमवार को चीन की राजधानी पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मुलाक़ात चीनी विदेश मंत्री वांग यी से हुई. इस मुलाक़ात में चीन के बयान को भारत और पाकिस्तान की मीडिया में अपने-अपने तरीक़े से पेश किया है. पाकिस्तान में इस वार्ता से निकली बातों को चीन की ओर से जताई गई चिंताओं की तरह दिखाया जा रहा है. वहीं, भारत की ओर से ये बताया गया कि चीनी सरकार को इस मुद्दे पर कुछ शंकाएं थीं जिन्हें भारतीय विदेश मंत्री ने ख़त्म कर दिया है. इस वार्ता में चीनी विदेश मंत्री की ओर भारत सरकार के इस क़दम से चीन की संप्रभुता को चुनौती मिलने की आशंका जताई गई थी. इसके जवाब में एस. जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार ने ये फ़ैसला सिर्फ क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए लिया है और भारत नियंत्रण रेखा बदल नहीं रहा. इसके साथ ही लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के मुद्दे पर सवाल उठाया गया.
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जिम्बाब्वे: 50 लाख लोग भुखमरी के शिकार

Date : 08-Aug-2019
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ज़िम्बॉब्वे की एक तिहाई आबादी भुखमरी की कगार पर पहुंच गई है. एजेंसी का कहना है कि क़रीब 50 लाख लागों को खाद्यान्न की ज़रूरत है. ज़िम्बॉब्वे सूखा, चक्रवात और आर्थिक संकट से जूझ रहा है. विश्व खाद्यान्न कार्यक्रम (डब्ल्यूएफ़पी) ने 33.1 करोड़ डॉलर मदद की अपील की है. डब्ल्यूएफ़पी के प्रमुख डेविड बीज़्ले ने कहा कि अधिकांश लोग संकट में हैं और भुखमरी की ओर बढ़ रहे हैं. कभी खाद्यान्न के मामले में सम्पन्न रहा ज़िम्बॉब्वे पिछले कई सालों से उथल-पुथल के दौर से गुजर चुका है. सूखे की वजह से फसलें बहुत बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और खाने के दामों में तेज़ी से उछाल आया है. पानी के स्तर नीचे जाने से देश के कारीबा इलाक़े में स्थित मुख्य पनबिजली प्लांट पर भी असर पड़ा है और जिससे पूरे देश में बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसके अलावा देश आर्थिक संकट से भी गुजर रहा है और नई मुद्रा जिम्बॉब्वे डॉलर की शुरुआत की गई है. मंगलवार को अपील जारी करते हुए बीज़्ले ने कहा कि क़रीब 25 लाख लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं. उन्होंने कहा, हम उन लोगों के बारे में बातें कर रहे हैं जो भुखमरी की ओर बढ़ रहे हैं, अगर हमने उनकी मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया तो हालात और ख़राब होंगे. उनके मुताबिक़, हमलोग अभूतपूर्व सूखे का सामना कर रहे हैं.इस साल की शुरुआत में यहां इदाई चक्रवात की वजह से भारी तबाही हुई थी. इस भयंकर तूफ़ान से मालावी और मोज़ाम्बीक़ भी प्रभावित हुआ और क़रीब 5 लाख 70 हज़ार जिम्बॉब्वे निवासी प्रभावित हुए जिनमें दसियों हज़ार लोग बेघर हो गए. पिछले हफ़्ते वित्त मंत्री म्थुली नक्यूब ने कहा कि सरकार बीते जनवरी से ही ग्रामीण और शहर के क़रीब 7 लाख 57 हज़ार लोगों को अनाज मुहैया करा रही है. नवंबर 2017 में लंबे समय से शासन करते आ रहे रॉबर्ट मुगाबे के जाने के बाद राष्ट्रपति बने एमर्सन मनंगाग्वा ने मंगलवार को देश में पड़े सूखे को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया. हालांकि संयुक्त राष्ट्र पहले से ही 29.4 मिलियन डॉलर फ़ंड की अपील जारी कर चुका है, लेकिन अब उसका कहना है कि उसे और अधिक फ़ंड की ज़रूरत है क्योंकि सूखे का असर बाकी राज्य में भी फैल चुका है.
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अनुच्छेद 370 पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया !

Date : 06-Aug-2019
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने की चर्चा भारत से बाहर भी हुई. पाकिस्तान ने भारत के इस फ़ैसले की निंदा की. पाकिस्तानी संसद में मंगलवार को कश्मीर मुद्दे पर चर्चा भी की जाएगी. द यूरएशियन टाइम्स (ईटी न्यूज़) के मुताबिक़, पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर बिन मोहम्मद से फ़ोन पर बात भी की. इमरान ख़ान ने दावा किया कि तुर्की इस मामले में पाकिस्तान के साथ है. पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के अलावा कई देशों से इस मामले में समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में जिन देशों से पाकिस्तान मदद की गुहार कर रहा है, उन देशों और दूसरे देशों मीडिया में कश्मीर को लेकर क्या कुछ छपा है. तुर्की की समाचार एजेंसी अनादुल ने तुर्की के राष्ट्रपति से इमरान ख़ान के बात करने की ख़बर को प्रमुखता से वेबसाइट पर जगह दी है. अनादुल में छपे एक लेख के मुताबिक़, कश्मीर पर भारतीय कदम के भयानक नतीजे होंगे. इस लेख में वरिष्ठ पत्रकार इफ़्तिख़ार गिलानी कहते हैं, जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति बदलने का भय है. इससे हालात और बिगेड़ेंगे. जब आप ऐसा फ़ैसला करते हैं तो आप कट्टरपंथियों को प्रोत्साहित करते हैं. लेख में लिखा गया है कि भारत के इस फ़ैसले का बुरा असर होगा. तुर्की की दूसरी न्यूज़ एजेंसी DHA के मुताबिक़, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने दोनों देशों से बातचीत के ज़रिए मुद्दा सुलझाने के लिए कहा है. मलेशिया की न्यूज़ वेबसाइट बरनामा में भी ख़बर छपी है कि तुर्की और पाकिस्तानी नेताओं ने कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा की. बरनामा लिखता है- 1989 से लेकर अब तक कश्मीर में हुई हिंसा में हज़ारों लोगों की जान गई. कश्मीर में कुछ संगठन आज़ादी की ख़ातिर भारत के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ते आए हैं. ख़लीज टाइम्स में कश्मीर मुद्दे पर कई ख़बरें छपी हैं. ख़लीज टाइम्स एक ख़बर में लिखता है, अनुच्छेद 370 को ख़त्म किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में हालात शांतिपूर्ण हैं. ज़िंदगी रोज़ की तरह चल रही है. ख़लीज टाइम्स हैडिंग लगाता है- कश्मीर में शांति, स्थानीय लोगों ने अनुच्छेद 370 का किया स्वागत. कश्मीर पर पाकिस्तान के कंधे पर तुर्की ने रखा हाथ एक दूसरी ख़बर में ख़लीज टाइम्स लिखता है कि अमरीका ने कश्मीर मुद्दे पर अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है. अमरीका ने कहा कि वो कश्मीर मुद्दे की निगरानी कर रहा है. तुर्की की हुर्रियत डेली न्यूज़ के मुताबिक़, हिंदू राष्ट्रवादियों के आलोचकों का कहना है कि सरकार के इस कदम से मुस्लिम बहुल कश्मीर की डेमोग्राफी को हिंदू शरणार्थियों से बदलने की कोशिश की जा रही है. इस ख़बर में महबूबा मुफ़्ती के उस बयान को भी जगह मिली है, जिसमें उन्होंने कहा था- आज भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिन है. द वॉशिंगटन पोस्ट कश्मीर मुद्दे पर छपे ओपिनियन का शीर्षक लगाता है- कश्मीर में बस्तियां बसाने का भारतीय प्रोजेक्ट ख़तरनारक मोड़ पर... द वॉशिंगटन पोस्ट लिखता है, कई इतिहासकारों और कानून के जानकारों ने अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश को असंवैधानिक बताया है. इस लेख में आगे लिखा है कि आने वाले महीनों में कश्मीर में हालात और बिगड़ेंगे. कश्मीरी इतनी आसानी से नहीं मानेंगे, वो पक्के तौर पर विरोध करेंगे. लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने से क्या बदलेगा? गल्फ़ न्यूज़ में अनुच्छेद 370 और कश्मीर मुद्दे को कई ख़बरों में समझाया गया है. इस लेख में अनुच्छेद 370 ख़त्म किए जाने के वक़्त पर लिखा गया है, 2019 चुनावों में मिली भारी जीत के बाद पीएम मोदी बहुमत में हैं. इसी के चलते बीजेपी कई बड़े फ़ैसले ले रही है. अनुच्छेद 370 को ख़त्म किया जाना इसी का नतीजा है. आलोचकों का कहना है कि हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी मज़बूत छवि की ख़ातिर ही इस दिशा में कदम उठाया गया है. द न्यूयॉर्क टाइम्स शीर्षक लगाता है- कश्मीर को दी दशकों पुरानी स्वायत्तता को भारत ने ख़त्म किया, पाकिस्तान ने दी चेतावनी अख़बार लिखता है कि भारत की राष्ट्रवादी सरकार ने कश्मीर को दिए विशेषाधिकार को ख़त्म कर दिया है. कश्मीर में उठाए गए इस कदम से भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में हालात बिगड़ेंगे. लेख में लिखा है, सालों से हिंदू राष्ट्रवादी इस बारे में मांग करते रहे हैं और अब कश्मीरियों को मिले विशेषाधिकार ख़त्म कर दिए गए हैं. पाकिस्तान की न्यूज़ वेबसाइट द डॉन में भी कश्मीर से जुड़ी ख़बरें छपी हैं. द डॉन एक ख़बर में अमरीका के बयान को शीर्षक बनाता है- कश्मीर में उठाए कदमों को भारत ने बताया आंतरिक मसला. डॉन लिखता है कि कश्मीर के मसले पर भारत को विपक्षी पार्टियों का भी समर्थन मिला है.
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भारत ने क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया, जिनेवा संधि और अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है, शाह महमूद कुरैशी

Date : 04-Aug-2019
नई दिल्ली 4 अगस्त । क्या है क्लस्टर बम जिसके इस्तेमाल का पाकिस्तान ने भारत पर लगाया आरोप? पाकिस्तान ने भारत पर नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया है जिसमें दो लोगों की मौत हुई है और 11 लोग घायल हैं. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर और विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस पर ट्वीट किए हैं. शाह महमूद क़ुरैशी ने ट्वीट किया है कि भारतीय सुरक्षाबलों ने क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया है जो जिनेवा संधि और अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है. उन्होंने लिखा है, नियंत्रण रेखा पर आम नागरिकों को निशाना बनाकर भारतीय सेना द्वारा किए गए क्लस्टर बमों के इस्तेमाल की मैं निंदा करता हूं. यह जिनेवा संधि और अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन है. इसके बाद क़ुरैशी ने अगला ट्वीट किया और उसमें भारत को क्षेत्रीय शांति बिगाड़ने वाला बताया. उन्होंने लिखा कि युद्धोन्माद फैलाने वाला भारत न केवल क्षेत्रीय शांति को अस्थिर कर रहा है बल्कि नियंत्रण रेखा पर मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है. विदेश मंत्री क़ुरैशी ने इस ट्वीट में दुनिया के देशों से मांग की है कि वे नियंत्रण रेखा और भारत प्रशासित कश्मीर की हालिया स्थिति का संज्ञान लें. वहीं, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने भी भारत पर अंतर्राष्ट्रीय समझौता तोड़ने के आरोप लगाए हैं. उन्होंने ट्वीट में लिखा है, भारतीय सेना द्वारा क्लस्टर बमों का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन है और यह निंदनीय है. कोई भी हथियार आत्मनिर्णय के अपने अधिकार को पाने के लिए कश्मीरियों के दृढ़ संकल्प को दबा नहीं सकता है. कश्मीर हर पाकिस्तानी के ख़ून में बहता है. कश्मीरियों का स्वतंत्रता संग्राम सफल होगा. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के इन आरोपों को ख़ारिज किया है. भारतीय सेना ने कहा है कि पाकिस्तानी सेना लगातार घुसपैठ कराकर और उन्हें हथियार देकर चरमपंथियों को बढ़ावा देता है. भारतीय सेना के बयान में आगे कहा गया है कि भारतीय सेना हमेशा प्रतिक्रिया का जवाब देती है और इस तरह की प्रतिक्रिया केवल पाकिस्तानी सेना की सैन्य चौकियों और उनके द्वारा मदद पा रहे चरमपंथी घुसपैठियों के ख़िलाफ़ की गई है. जिनेवा समझौते के तहत क्लस्टर बमों का उत्पादन और इस्तेमाल प्रतिबंधित है मगर कई देशों और सेनाओं पर इनके युद्ध या सशस्त्र संघर्ष में इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहे हैं. ये ख़तरनाक इसलिए माने जाते हैं क्योंकि मुख्य बम से निकलने वाले कई सारे छोटे विस्फोटक निर्धारित लक्ष्य के आसपास भी नुक़सान पहुंचाते हैं. इससे संघर्ष के दौरान आम नागरिकों को नुक़सान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है. यही नहीं, मुख्य बम के फटने के बाद आसपास गिरने वाले छोटे विस्फोटक लंबे समय तक पड़े रह सकते हैं. ऐसे में संघर्ष समाप्त हो जाने के बाद भी इनकी चपेट में आने से जान-माल के नुक़सान की घटनाएं देखने को मिलती हैं. यह विरोधी सैनिकों को मारने या उनके वाहनों को नुक़सान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इन्हें लड़ाकू विमानों से गिराया या ज़मीन से लॉन्च किया जा सकता है. भारत-पाकिस्तान दोनों संधि में शामिल नहीं 2008 में डबलिन में कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन नाम से अंतरराष्ट्रीय संधि अस्तित्व में आई जिसके तहत क्लस्टर बमों को रखने, बेचने या इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव था. तीन दिसंबर 2008 से इस पर हस्ताक्षरों की शुरुआत हुई और सितंबर 2018 तक 108 देश इस पर हस्ताक्षर कर चुके थे जबकि 106 ने इसे अपनाने में सैद्धांतिक सहमति दी थी. मगर कई देशों ने इस संधि का विरोध भी किया था जिनमें चीन, रूस, इसराइल और अमरीका के साथ भारत और पाकिस्तान भी शामिल थे. इन दोनों देशों ने अब भी इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
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बिना रोक-टोक करेंगी विदेश यात्रा

Date : 02-Aug-2019
सऊदी अरब 2 अगस्त । सऊदी अरब में महिलाएँ अब किसी पुरुष अभिभावक की अनुमति के बिना भी विदेश यात्रा कर सकती हैं. शुक्रवार को इस संबंध में शाही आदेश जारी किया गया है. नए नियम के मुताबिक़ अब 21 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाएँ बिना किसी पुरुष अभिभावक की मंज़ूरी के पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकती हैं. यानी अब सऊदी अरब में सभी वयस्क विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट अप्लाई कर सकते हैं. अब इसमें महिला और पुरुष में भेदभाव नहीं होगा. शाही आदेश के मुताबिक़ अब महिलाओं को अपने बच्चे के जन्म, अपनी शादी और तलाक़ के लिए रजिस्टर कराने का अधिकार होगा. साथ ही नौकरियों में महिलाओं को ज़्यादा मौक़े देने की भी बात कही गई है. नए नियम के मुताबिक़ देश के सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के काम करने का अधिकार होगा. अभी तक सऊदी अरब में महिलाओं को विदेश यात्रा पर जाने या पासपोर्ट अप्लाई करने के लिए किसी पुरुष अभिभावक (पति, पिता या अन्य पुरुष रिश्तेदार) से अनुमति लेनी पड़ती थी. सऊदी अरब के शासक राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान ने इसके पहले भी कई तरह के सुधारों की घोषणा की थी. इनमें महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी हटाना भी शामिल है. वर्ष 2016 में उन्होंने 2030 तक देश की अर्थव्यवस्था में सुधार की योजना की घोषणा की थी. इसका एक मक़सद कामकाज में महिलाओं की भागीदारी 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 फ़ीसदी कर करने की थी. हालांकि सऊदी अरब में ऐसे कई हाई प्रोफ़ाइल मामले भी आए हैं, जिनमें महिलाओं ने प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कनाडा जैसे दूसरे देशों में शरण मांगी है. इसी साल जनवरी में कनाडा ने 18 वर्षीय रहाफ़ मोहम्मद अल क़ुनून को शरण दी थी. उन्होंने सऊदी अरब से भागकर ऑस्ट्रेलिया जाने की कोशिश की थी. लेकिन थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एयरपोर्ट के एक होटल में वो फँस गईं और फिर उन्होंने सहायता की अपील की. कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सऊदी अरब में महिलाओं से दूसरे दर्जे के नागरिकों की तरह व्यवहार किया जाता है
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राजकुमारी हया और उनके पति दुबई के शासक शेख मोहम्मद में बढ़ी और रंजिश

Date : 01-Aug-2019
लंदन1अगस्त । दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल-मख़दूम से अलग हुईं उनकी पत्नी ने लंदन की अदालत में ज़बरन शादी में रखे जाने से सुरक्षा की मांग की है. शेख मोहम्मद की पत्नी जॉर्डन की 45 साल की राजकुमारी हया हैं, जो अपने पति को छोड़ दुबई से लंदन आ गई हैं. हया सेंट्रल लंदन में हाई कोर्ट के फैमिली कोर्ट डिविज़न में मंगलवार को इस मामले की शुरुआती सुनवाई में पेश हुई थीं. हया ने अदालत में फ़ोर्स मैरिज प्रोटेक्शन ऑर्डर की मांग की है, जो किसी व्यक्ति को शादी में ज़बरदस्ती रखे जाने से सुरक्षा देता है. इस सुनवाई में दुबई के शासक शेख मोहम्मद पेश नहीं हुए थे. राजकुमारी हया बिंत अल हुसैन जॉर्डन के शाह अब्दुल्लाह की सौतेली बहन भी हैं और वो शेख़ मोहम्मद की छठी पत्नी हैं. दुबई और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए इस मामले को बहुत संवेदनशील समझा जा रहा है. इस मामले पर इस महीने निजी सुनवाई भी हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने बयान जारी कर कहा था कि यह मुक़दमा उनके बच्चों की बेहतरी के लिए है न कि उनके तलाक़ के लिए या पैसे के लिए. यूएई ने इस मामले पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है और इसे परिवार का निजी मामला बताया है. दुबई के शाही परिवार के क़रीबी लोगों का कहना है कि शेख़ मोहम्मद और राजकुमारी हया के बीच पारिवारिक कलह की वजह उनकी 33 वर्षीय बेटी शेख़ा लतीफ़ा हैं, जिनकी मां शेख की एक दूसरी बीवी हैं. शेख़ा लतीफ़ा पहले भी विवाद में रह चुकी हैं. कथित तौर पर उनके तौर-तरीक़ों पर रोक-टोक लगाई गई थी जिसके बाद उन्होंने घर से भागने की कोशिश की थी. शेख़ लतीफ़ा के दोस्तों के अनुसार, पिछले साल उन्होंने भागने की कोशिश की थी लेकिन भारतीय तट के नज़दीक अमीराती सेना ने उनके जहाज़ को पकड़ लिया था. दिसंबर में आयरलैंड की पूर्व राष्ट्रपति मैरी रॉबिन्सन के साथ एक बैठक के बाद वह नज़र नहीं आई हैं. रॉबिन्सन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समूह की पूर्व प्रमुख हैं और राजकुमारी हया की दोस्त भी हैं. उस बैठक के बाद शेख़ लतीफ़ा को मुसीबत में बताया जा रहा था और कहा गया था कि वह अपने परिवार की प्यार भरी देखभाल में हैं. इसके बाद यूएई प्रशासन ने आरोपों के जवाब में शेख़ा लतीफ़ा के इलाज और रॉबिन्सन से मुलाक़ात की जानकारी जारी की थी. पिछले साल मार्च में सामने आए 40 मिनट के वीडियो में शेख़ लतीफ़ा ने अपने ऊपर लगाई जा रही पाबंदियों पर बात करते हुए कहा था कि वो दुबई में नहीं रहना चाहतीं. उन्होंने अपनी बहन शम्सा का ज़िक्र करते हुए कहा था कि 2000 में वह ब्रिटेन में छुट्टी मनाने के दौरान भाग गई थीं. लतीफ़ा ने कहा था, जब आप वीडियो देख रहे हैं तो हो सकता है तब मैं मर चुकी हूं या बहुत-बहुत बुरी स्थिति में हूं. क़ानूनी लड़ाई ने ब्रिटेन के दो मशहूर वकीलों को भी आमने-सामने ला खड़ा किया है. फ़ियोना शेकल्टन को अपने आकर्षण के साथ-साथ तेज़-तर्रार दांव-पेच के लिए भी जाना जाता है. साथ ही शाही मामलों का केस लड़ने में उन्हें महारत हासिल है. वह राजकुमारी हया की वकील हैं. शेकल्टन को प्रसिद्धि तब मिली जब उन्होंने 1992 में ब्रिटेन के राजकुमार एंड्र्यू और सारा फ़र्ग्यूसन के अलगाव का मामला लड़ा. पेन हिक्स बीच लॉ फ़र्म में रहते हुए 1996 में राजकुमारी डायना और प्रिंस चार्ल्स के तलाक़ मामले में वह प्रिंस चार्ल्स की ओर से पेश हुईं. वहीं, शेख़ मोहम्मद की ओर से स्टुअर्ट्स लॉ की लेडी हेलेन वॉर्ड केस लड़ रही हैं. लेडी हेलेन ने ब्रिटिश फ़िल्म निर्देशक गाय रिची और पॉप स्टार मैडोना के तलाक़ का केस लड़ा है. उनके मुवक्किलों में संगीतकार एंड्र्यू लॉयड वेबर और फ़ॉर्म्यूला वन रेसिंग टीम के मालिक बर्नी एकल्स्टन शामिल ह उधर, शेख़ मोहम्मद के ब्रिटेन के साथ गहरे रिश्ते रहे हैं. वह ब्रिटेन की मशहूर सैन्य अकादमी सैंडहर्स्ट से स्नातक हैं. महारानी एलिज़ाबेथ की तरह ही उन्हें भी घोड़ों से प्यार है और ब्रिटेन के घुड़सवार उद्योग की वह ताक़तवर शख़्सियत हैं. उनके और उनके परिवार की ब्रिटेन में कई संपत्तियां हैं. उनके नेतृत्व के दौरान ही दुबई एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र और पर्यटन स्थल बना. लेकिन लंदन में अब शुरू होने वाली पारिवारिक रस्साकशी के बीच उन्हें अपने घर दुबई में राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है. बीते चार सालों से अर्थव्यवस्था ख़ासी धीमी है और तेल के दाम क्षेत्रीय तनाव के बाद लगातार नीचे जा रहे हैं. यह क़ानूनी लड़ाई जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला के लिए भी ख़ासी चिंतित करने वाली है क्योंकि यूएई और उसके सहयोगी सऊदी अरब से जॉर्डन को सरकारी आर्थिक मदद मिलती है. राजकुमारी हया का जन्म मई 1974 में हुआ है. उनके पिता जॉर्डन के शाह हुसैन थे जबकि मां महारानी आलिया अल-हुसैन थीं. जब राजकुमारी हया सिर्फ़ तीन साल की थीं तब एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मां की मौत हो गई थी. राजकुमारी हया ने अपना बचपन ब्रिटेन में बिताया. उन्होंने दो प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई पूरी की. इनमें ब्रिस्टल का बैडमिंटन स्कूल और डॉर्सेट का ब्रायनस्टन स्कूल शामिल हैं. इसके बाद उन्होंने ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी से राजनीति, दर्शन और अर्थशास्त्र में पढ़ाई की. अपने कुछ पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन्हें फै़लकनरी (बाज़ पालने का शौक) शूटिंग और बड़ी मशीनों का शौक है. इसके अलावा उन्होंने दावा किया था कि जॉर्डन में बड़े ट्रक चलाने का लाइसेंस पाने वाली वो एकमात्र महिला थीं. राजकुमारी हया को घुड़सवारी का भी शौक है. वो 20 साल की थीं तो उन्होंने घुड़सवारी को अपने करियर के तौर पर चुना था. घुड़सवारी में राजकुमारी हया ने साल 2000 के ओलंपिक खेलों में जॉर्डन का प्रतिनिधित्व भी किया था, वो उस ओलंपिक खेलों में अपने देश की ध्वजवाहक भी थीं.
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इस हॉस्पिटल की 36 नर्स हुईं प्रेग्नेंट, बोलीं - इस अस्पताल का पानी मत पीना वरना.

Date : 31-Jul-2019
अमेरिका : अमेरिका के चिल्ड्रन मर्सी कैनसेस सिटी (अस्पताल) की 36 नर्सेस एक ही साल में प्रेग्नेंट हुईं. गूगल के मुताबिक ये अमेरिका (मिसूरी) का बेस्ट चिल्ड्रन हॉस्पिटल है. यहां इंटेसिव केयर यूनिट (NICU) की 36 नर्सें एक ही साल में प्रेग्नेंट हुईं. किसी का पहला बेबी है तो किसी नर्स का ये दूसरा बेबी है. इस हॉस्पिटल ने ये तस्वीर अपने फेसबुक पेज पर शेयर करते हुए लिखा, हमारे इंटेसिव केयर नर्सरी की नर्स ने यहां आने वाले बच्चों के लिए दिन-रात बिताए. वो भी उस समय जब वे खुद प्रेग्नेंट थीं. ये तस्वीर जून महीने में ली गई थी, ये सभी इन नर्सों के साल 2019 में पैदा हुए बच्चों और कुछ पैदा होने वाले बच्चों (बेबी बम्प) की है. अभी तक 20 बच्चों का जन्म हो चुका है, जिनमें से सिर्फ 2 लड़कियां हैं. ICN की इन फैमिली को बधाई. बाकी 16 बच्चों का जन्म भी आने वाले कुछ महीनों में हो जाएगा.
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