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नीरव मोदी: भारत भेजा गया तो आत्महत्या कर लूंगा

Date : 07-Nov-2019
  लंदन 7 नवम्बर । लंदन की अदालत में एक बार फिर ज़मानत याचिका ख़ारिज किए जाने के दौरान भारत के हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने कोर्ट में कहा कि अगर उन्हें भारत प्रत्यर्पित किया गया तो वे आत्महत्या कर लेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में उन्हें निष्पक्ष ट्रायल की उम्मीद नहीं है. नीरव मोदी ने कोर्ट को बताया कि जेल में उन्हें तीन बार पीटा गया. नीरव के वकील हुगो कीथ क्यूसी ने कहा, मंगलवार की सुबह नौ बजे के ठीक बाद जेल में ही बंद दो अन्य कैदी उसके सेल में आए. उन्होंने दरवाजा बंद करके उसे घूंसा मारा और ज़मीन पर गिराकर लातों से पीटा. इसके साथ ही उसे लूटने की भी कोशिश की. कीथ ने डॉक्टर की नीरव के डिप्रेशन की कॉन्फिडेंशल रिपोर्ट के लीक हिस्से का ज़िक्र करते हुए ये बातें कहीं. हालांकि इन सब दलीलों का कोर्ट पर कोई असर नहीं हुआ और उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी गई.
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ब्रेग्ज़िट यानी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने को लेकर संशय !

Date : 21-Oct-2019
लंदन 21 अक्टूबर । ब्रेग्ज़िट यानी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने को लेकर संशय बना हुआ है. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का शुरू से रुख़ रहा है कि ब्रिटेन को तय तारीख़ यानी 31 अक्तूबर तक हर हाल में यूरोपीय संघ से बाहर निकालना है. मगर इसकी राह अभी भी आसान नहीं दिख रही. गुरुवार को ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच एक नए समझौते पर सहमति बनी मगर शनिवार को ब्रितानी संसद ने इस समझौते के विरोध में मतदान किया. इसके बाद ब्रितानी सरकार को एक बार फिर यूरोपीय संघ को चिट्ठी भेजकर ब्रेग्ज़िट के लिए और मोहलत देने की गुज़ारिश करनी पड़ी मगर अब एक वरिष्ठ मंत्री ने विरोधाभासी बयान देते हुए कहा है कि ब्रिटेन हर हाल में तय तारीख़ को यूरोपीय संघ से बाहर निकलेगा. इस तरह से एक बार फिर ब्रेग्ज़िट को लेकर प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या यह 31 अक्तूबर को होगा या नहीं. अगर होगा तो किस सूरत में और नहीं तो उसके क्या परिणाम होंगे. मगर यह अनिश्चितता तभी से बनी हुई है जब 2016 में इस विषय पर करवाए गए जनमतसंग्रह के नतीजे आए थे. 52 प्रतिशत लोगों ने ब्रेग्ज़िट के पक्ष में वोट दिया था. नतीजे आने के बाद सत्ताधारी कंज़र्वेटिव पार्टी ने कहा कि जनता के आदेश का पालन किया जाएगा. 2017 में जब फिर चुनाव हुए, तब लेबर पार्टी ने भी अपने मेनिफ़ेस्टो में यही बात कही. इस तरह से सभी पक्षों ने जनमत संग्रह के नतीजों के साथ ख़ुद के हाथ-पैर बांध लिए. अब आप उससे पीछे नहीं हट सकते क्योंकि यह लोकतंत्र के ख़िलाफ़ होगा कि आपने लोगों को प्रस्ताव दिया, उन्होंने उस पर वोट किया और फिर आप कहेंगे कि हम आपकी बात नहीं मान सकते. नॉदर्न आयरलैंड सबसे बड़ा मुद्दा जैसे-जैसे ब्रेग्ज़िट की प्रक्रिया 2016 से आगे बढ़ी है तो यह बिल्कुल साफ़ दिखाई देने लगा है कि इसके परिणाम ब्रिटेन के लिए हानिकारक होने वाले हैं. ये परिणाम न सिर्फ़ आर्थिक रूप से नकारात्मक होंगे बल्कि नॉदर्न आयरलैंड को लेकर भी बड़ा मसला खड़ा हो जाएगा. अभी तक जिस भी डील की बात हुई है, उसमें इस विषय को हल करने को लेकर कुछ ख़ास नहीं दिखा है. नॉदर्न आयरलैंड और आयरलैंड एक ही द्वीप के अंदर दो यूनिट्स हैं. आयरलैंड स्वतंत्र देश है जबकि नॉदर्न आयरलैंड यूके का हिस्सा है. आयरिश युद्ध को ख़त्म करने के लिए गुड फ़्राइडे अग्रीमेंट के तहत जो शांति क़ायम हुई थी, उसका आधारभूत बिंदू है कि दोनों के बीच हार्ड बॉर्डर नहीं रहेगा. अभी दोनों के बीच किसी तरह की रोकटोक या पाबंदी नहीं है. और नॉदर्न आयरलैंड के बीच हार्ड बॉर्डर बनने की आशंका को लेकर प्रदर्शन होते रहे हैं हार्ड बॉर्डर न होने का मतलब है कि अभी लोगों के आने-जाने, सामान लाने-ले जाने के बीच कोई सीमा का बंधन नहीं है. लेकिन 2016 में हुए रेफ़पेंडम के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यूके की यूनिट्स (इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉदर्न आयरलैंड) भी यूरोपीय संघ से बाहर हो जाएंगी. अब नॉदर्न आयरलैंड भी जब बाहर हो जाएगा तो पेचीदा मसला खड़ा हो जाएगा क्योंकि हार्ड बॉर्डर लगाना पड़ेगा. बोरिस जॉनसन आयरलैंड गए थे और टेक्निकल बॉर्डर की बात की मगर अव्यावहारिक होने के कारण इसे बाद में ठुकरा दिया गया. बोरिस जॉनसन ने अब आयरिश सी में बॉर्डर बना देने की बात की है. यानी ब्रिटेन और पूरे आयरलैंड के द्वीप के बीच सीमा बना देंगे. ऐसे में नॉदर्न आयरलैंड की पार्टी डीयूपी कहती है कि अगर हमें ब्रिटेन के बाक़ी क्षेत्र से अलग ट्रीट किया गया तो इससे यह हो सकता है कि नॉदर्न आयरलैंड कल को आयरलैंड से मिल सकता है और आयरलैंड का एकीकरण हो सकता है. यानी इसे हल करना आसान नहीं है. इसके अलावा जॉनसन ने जो प्रस्ताव पेश किया है, वह बिल्कुल साफ़ नहीं है. आने वाले 10 दिनों में क्या होगा? हर दिन ब्रेग्ज़िट मामले में नया मोड़ आ जाता है. आज जो होता है, वह दो दिन में ही अप्रासंगिक हो जाता है. लेकिन 31 तारीख़ तक यूरोपीय संघ से निकलना मुश्किल होगा. अगर ऐसा हुआ भी तो क़ानूनी प्रक्रिया तोड़-मरोड़कर ही किया जा सकेगा. बोरिस जॉनसन ने यूरोपीय संघ को जो चिट्ठियां भेजी हैं, उनमें से एक में उनके हस्ताक्षर ही नहीं हैं. यानी वह आधिकारिक पत्र है या नहीं, यह कोई कहने को तैयार नहीं है. ब्रेग्ज़िट को लेकर एक महीने से संसदीय कार्यवाही चल रही है. इसमें बेन एक्ट नाम का कानून पास हुआ था जिसके तहत ब्रितानी प्रधानमंत्री के लिए यूरोपीय संघ से ब्रेग्ज़िट को टालने की मांग करना ज़रूरी थ इसते तहत उन्होंने मोहलत मांगी और जो चिट्ठी भेजी, उसमें बेन्स एक्ट की फ़ोटोकॉपी भेजी, जिसमें हस्ताक्षर की जगह सिर्फ़ प्रधानमंत्री का नाम टाइप किया गया था. फिर एक चिट्ठी में पहले वाली चिट्ठी को ख़ारिज करते हुए कहा कि आगे हमें मोहलत नहीं चाहिए होगी. अब सोमवार को यह बात पता चलेगी कि कौन सी बात क़ानूनी और न्यायसंगत है, कौन सी नहीं. फिर भी, बोरिस जॉनसन क़ानून तोड़ते हुए 31 अक्तूबर तक ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से बाहर ले आएं, इसकी संभावना 50 प्रतिशत तो लग ही रही है. ब्रेग्ज़िट से ब्रिटेन पर क्या असर होगा अभी तक जो अनुमान आए हैं, उनके मुताबिक़ ब्रिटेन की एक प्रतिशत जीडीपी ब्रेग्ज़िट रेफरेंडम से आज तक ख़त्म हो चुकी है. जो औद्योगिक क़स्बे हैं, वहां जापानी या जर्मनी की कार कंपनियों ने इसलिए अपने प्रॉडक्शन यूनिट खोले थे क्योंकि ब्रिटेन के अंदर अच्छी और क़ाबिल वर्कफ़ोर्स मानी जाती है और यहां पर मज़दूरी भी स्थिर रहती है. लेकिन ब्रिटेन ईयू से बाहर आता है तो जितनी भी चीज़ें यहां बनती हैं तो वे कहीं और बनानी होंगी. तो काफ़ी नौकरियों पर संकट पैदा हो जाएगा. माना जा रहा है कि लाख से डेढ़ लाख नौकरियों पर सीधा असर पड़ सकता है. खाने-पीने की जीज़ों के दाम पर भी असर पड़ेगा. ब्रिटेन में किसी भी दुकान में अधिकतर रोज़मर्रा की चीज़ें यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों से आती हैं और वे महंगी हो जाएंगी. ब्रिटेन में किसानों और ख़ासकर मटन (लैम) फ़ार्म वालों की अधिकतर बिक्री यूरोपीय संघ के अन्य देशों में होती है. उनपर भी प्रभाव पड़ेगा. ऑटो, फ़ार्मिंग समेत हर सेक्टर पर कुछ न कुछ असर होगा. ध्यान देने वाली बात है कि पहले बहुत से फ़ार्म मालिकों ने ब्रेग्ज़िट के पक्ष में वोट दिया था. उन्हें लगा था कि सब्सिडी जो मिलती है ईयू से, वो शायद मिलती ही रहेंगी. लेकिन जनमतसंग्रह के समय लोगों के सामने सिर्फ़ ये सवाल थे कि आप चाहते हैं कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ में रहे या नहीं. उस समय प्रचार के दौरान यह नबीं बताया गया था कि आपके सेक्टर पर कितना असर पड़ेगा, सेल गिरेगी या बढ़ेगी, आप उसे बर्दाश्त कर पाएंगे या नहीं. उस समय चर्चा आर्थिक आधार पर नहीं, बल्कि भावनात्मक आधार पर हो रही थी. लोगों को लग रहा था कि यूरोपीय संघ हमारे लिए फै़सले ले रहा है और हमारा अपनी अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण नहीं हैं. लेकिन अब यह डेटा सामने आ रहा है कि किस सेक्टर को कितना नुक़सान होगा. इसी कारण लेबर पार्टी के रुख़ में भी बदलाव आया है. पहले लगता था कि वे किसी संशय में हैं. मगर अब उनका रुख़ सेंसिबल लगता है. वे कह रहे हैं कि अब हमारे पास अनुमान हैं कि ब्रेग्ज़िट का क्या परिणाम रहने वाला है. तो जो भी डील है, उसे हमें जनता तक लेकर जाना चाहिए कि हमारे पास यह सब है, अब बताइए आपको यह मंज़ूर है या नहीं? आप कोई और डील तो नहीं चाहते? या फिर हमें यूरोपीय संघ में ही रहना चाहिए? अभी मामला इसी सब पर अटका हुआ है.
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युद्ध के साये में ऐसे जी रही हैं कुर्द औरतें

Date : 11-Oct-2019
11 अक्तूबर 2019 युद्ध कोई भी हो, कहीं भी हो, किसी भी परिस्थिति में हो, उसकी विभीषिका सबसे ज़्यादा औरतों को ही झेलने पड़ती है. युद्ध की विभीषिका झेलती, अपना घर छोड़कर बच्चों को लिए सुरक्षित ठिकाने तलाशती कुर्द औरतों की कहानी, इन तस्वीरों की नज़र से अमरीका ने तुर्की की सीमा से सटे उत्तर-पूर्वी सीरिया से अचानक अपने सैनिक वापस बुलाने का फ़ैसला लिया. अमरीका के इस अचानक लिए फ़ैसले के बाद कुर्द महिलाओं के लिए सबकुछ बदल गया. अमरीका के ऐलान के बाद तुर्की ने अपनी सीमा से लगे उत्तरी-पूर्वी सीमा के शहरों और गांवों में हवाई हमले करने शुरू कर दिए. इसके बाद वहां के लोगों को घर छोड़कर अपने परिवार के साथ सिर छिपाने की जगह ढूंढनी पड़ रही है. ऐसे में महिलाओं को ख़ासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. छोटे बच्चे लिए वो हवाई हमलों से बचने के लिए घर छोड़कर भागने पर मजबूर हैं. इस तस्वीर में एक महिला के ठीक पीछे हवाई हमले के बाद उठता काला धुआं देखा जा सकता है. कुर्द सुरक्षाबलों ने बताया कि अब तक हमलों में कम से कम पांच नागरिकों की मौत हो गई है और कम से कम 25 लोग घायल हुए हैं. बढ़ते मानवीय संकट के बीच एसडीएफ़ ने मासूम लोगों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए नो फ़्लाई ज़ोन बनाने की गुज़ारिश की है. इस तस्वीर में एक कुर्द महिला अपना सामान एक गट्ठर में बांधकर उसे सिर पर लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जा रही है. मिली जानकारी के मुताबिक़ सीरिया के कई गाँवों और शहरों पर हवाई हमले किए जिसकी वजह से वहां के हज़ारों लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ा. कुछ दिनों पहले कुर्द महिलाओं ने तुर्की के ख़िलाफ़ मार्च निकाला था. तुर्की की सेना का कहना है कि उन्होंने आतंकियों के 181 ठिकानों को निशाना बनाया है. एसडीएफ़ के प्रवक्ता मुस्तफ़ा बाली के मुताबिक़ उनके सुरक्षाबलों ने तुर्की के हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की है. उत्तरी-पूर्वी सीरिया से अपने सैनिक वापस बुलाने के फ़ैसले पर अमरीका की कड़ी आलोचना हो रही है. हालांकि अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि अमरीका ने तुर्की के फ़ैसले को ग्रीन सिग्नल नहीं दिया था.
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जर्मनी: यहूदी प्रार्थना घर में गोलीबारी

Date : 10-Oct-2019
जर्मनी 10 अक्टूबर। जर्मनी में एक यहूदी प्रार्थना घर में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई है. एक बंदूकधारी ने इमारत के बाहर अंधाधुन गोलियां चलाईं और फिर कार से फ़रार हो गया. स्थानीय यहूदी समुदा के प्रमुथ ने बताया कि बंदूकधारी इमारत में घुसने की कोशिश में था, जहां क़रीब 80 लोग मौजूद थे. कोनराड रोसलर भी गोलीबारी के समय इमारत में मौजूद थे. उन्होंने बताया, वो शख़्स पहले कबाब की दुकान पर आया. मुझे तभी कुछ अजीब लगा क्योंकि वो हेलमेट पहने हुए था और उसके हाथ में राइफ़ल थी. उसने एक हैंडग्रेनेड फेंके लेकिन वो दुकान के अंदर नहीं पहुंच पाया. मुझे लगता है कि उस समय दुकान में पांच छह ग्राहक मौजूद थे. मैंने टॉयलट में छिपकर अपनी जान बचाई.
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पाकिस्तान ने चीन से कश्मीर मुद्दे पर मदद मांगी

Date : 09-Oct-2019
बीजिंग 9 अक्टूबर । चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले बीजिंग पहुंचे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और पाकिस्तान सैन्य प्रमुख जनरल क़मर बाजवा ने चीन से कश्मीर मुद्दे पर मदद मांगी है. पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख इमरान ख़ान के पहुंचने से एक दिन पहले ही बीजिंग पहुंचे और चीन के शीर्ष नेतृत्व से मुलाक़ात की. बातचीत में जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्ज़ा ख़त्म करना भी शामिल था.
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सऊदी अरब में अब अविवाहित जोड़े होटल में रहेंगे साथ

Date : 06-Oct-2019
6 अक्टूबर । अविवाहित विदेशी जोड़े अब सऊदी अरब के होटल में कमरा लेकर साथ रह सकते हैं. सऊदी सरकार की तरफ़ से नए वीज़ा नियम की घोषणा की गई है. इसके अलावा कोई महिला भी होटल में कमरा लेकर अकेले रह सकती है. इससे पहले कपल्स को यह साबित करना होता था कि वो शादीशुदा हैं. इसे सऊदी सरकार की पर्यटन को प्रोत्साहित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. नया क्या बदलाव हुआ है? इससे पहले सऊदी अरब में आने वाले विदेशी कपल्स को शादी के दस्तावेज दिखाने होते थे. लेकिन अब विदेशी कपल्स को सऊदी अरब आने पर साथ में रहने के लिए ख़ुद को विवाहित होना साबित नहीं करना होगा. सऊदी के पर्यटन और नेशनल हेरिटेज मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है, सऊदी अरब के नागरिकों को फैमिली आईडी या रिलेशनशिप के प्रमाण के दस्तावेज होटल चेकिंग के दौरान दिखाने होंगे जबकि विदेशी कपल्स के लिए यह ज़रूरी नहीं है. सभी महिलाएं आईडी देकर होटल में कमरा बुक कर सकती हैं. ऐसा सऊदी महिलाएं भी कर सकती हैं. मंत्रालय ने कहा है, नए वीज़ा नियम के अनुसार महिला पर्यटकों के लिए पूरी तरह से ख़ुद को कवर करने की ज़रूरत नहीं है लेकिन उनसे उम्मीद की जाती है कि वो मर्यादित कपड़े पहनेंगी. हालांकि शराब अब भी प्रतिबंधित है. इस बदलाव के पीछे क्या है? सऊदी अरब की पहचान पृथ्वी पर सबसे प्रतिबंधित जगह के रूप में रही है. लेकिन खुले बाज़ार वाली अर्थव्यवस्था में सऊदी अरब ख़ुद को अब उतना बंद नहीं रखना चाहता है. वो चाहता है कि उसके यहां विदेशी पर्यटक आएं और निवेश बढ़े. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान ने घोर रूढ़िवादी मुल्क में कई परिवर्तन किए हैं. क्राउन प्रिंस सलमान ने सऊदी अरब की महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगे प्रतिबंधों को भी ख़त्म किया था और इसके साथ ही सऊदी महिलाओं को बिना पुरुष अभिभावक के विदेश जाने पर लगी पाबंदी भी हटा दी थी. हालांकि इन बदलावों पर कई विवादित मुद्दे हावी रहे. इनमें सबसे बड़ा मुद्दा रहा जमाल ख़ाशोज्जी नाम के पत्रकार की तुर्की के सऊदी दूतावास में हत्या. द इंडिपेंडेंट के ट्रैवेल एडिटर सिमोन कैल्डर का मानना है कि सऊदी अरब के इस फ़ैसले से वहां विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी. सिमोन ने कहा, वीज़ा नियमों में ढील से सऊदी में विदेशी पर्यटकों की संख्या तेज़ी से बढ़ेगी. जो अरब वर्ल्ड में दिलचस्पी रखते हैं उनके लिए यह ख़ुशख़बरी है.
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पाकिस्तान के पत्रकार आतिश तासीर का दावा- बुशरा बीबी के पास हैं जिन्न

Date : 29-Sep-2019
इस्लामाबाद 29 सितम्बर । पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तीसरी पत्नी बुशरा बीबी को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर से चर्चाएं हो रहीं हैं. एक पाकिस्तानी पत्रकार आतिश तासीर ने एक मैगजीन में दावा किया है कि बुशरा बीबी के पास जिन्न हैं, जो उनके कहने पर काम करते हैं. वहीं पाकिस्तान पीएमओ के हाउस स्टाफ के मुताबिक, प्रधानमंत्री इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी की तस्वीर शीशे में नहीं दिखती है. ऐसा पाकिस्तान के कैपिटल टीवी ने खातून-ए-अव्वल (प्रथम महिला) को लेकर दावा किया है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में हिस्सा लेने से पहले इमरान खान ने अपनी पत्नी के साथ उमरा किया, जिसकी तस्वीरों में वह सिर से लेकर पांव तक बुर्के में नजर आईं थी. कथित तौर पर बुशरा बीबी पीएम इमरान खान की पहली घूंघट वाली पत्नी हैं. वह एक विश्वासपात्र हैं और उन्होंने पिछले साल सत्ता में आने से करीब छह महीने पहले प्रधानमंत्री इमरान खान से शादी की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान का निकाह बुशरा बीबी के साथ 1 जनवरी को लाहौर में हुआ था और इस समारोह को बेहद गोपनीय रखा गया. पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार ये भी बताया गया कि इसके अगले ही दिन पीटीआई प्रमुख इमरान, इस्‍लामाबाद स्थित आतंकवाद निरोधक कोर्ट में पेश हुए थे. निकाह की रस्‍म पीटीआई की कोर कमेटी के सदस्‍य मुफ्ती सईद ने अदा कराई थी. बुशरा बीबी का अध्यात्म की ओर ध्यान है. उनकी पाकिस्तान में फैन फॉलोइंग है. इमरान खान बुशरा के पास आध्यात्मिक ज्ञान लेने जाते थे. बुशरा बीबी के पांच बच्चे हैं और उनकी बेटियां शादीशुदा हैं. दूसरी पत्नी ने इमरान पर साधा निशाना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम खान ने हाल में उन पर निशाना साधा था. रेहम खान ने एक वीडियो में कहा था कि कश्मीर पर इमरान खान सरकार की जितनी आलोचना की जाए, उतनी कम है. आप कभी भैंसें बेच रहे हैं तो कभी सड़कों पर धूप में खड़े हो रहे हैं. गर्मी में पाकिस्तान की सड़कों पर खड़े होने से कश्मीर का मसला हल नहीं हो जाएगा. लोग इस नौटंकी से थक चुके हैं. दरअसल, इमरान खान ने सत्ता में आते ही प्रधानमंत्री आवास की भैंसे बेचकर पैसे बचाने की कोशिश की थी.
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मुझे धमकियां मिलती हैं लेकिन मेरा मानना है कि मौत का वक़्त निश्चित है और जब आपकी मौत का समय आता है तो आपको मरना ही होगा, कंदील बलोच

Date : 28-Sep-2019
28 सितम्बर। पाकिस्तान की सोशल मीडिया स्टार क़ंदील बलोच की हत्या के मामले में अदालत ने उनके भाई मोहम्मद वसीम को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है. अदालत ने उनके दूसरे भाई मोहम्मद आरिफ़ को वॉन्टेड क़रार दिया और मामले के मुख्य अभियुक्त मुफ़्ती अब्दुल क़वी समेत चार अन्य अभियुक्तों को बरी कर दिया है. अदालत के जज ने फ़ैसला दिया कि क़ंदील के भाई मोहम्मद वसीम को धारा 311 के तहत आजीवन कारावास की सज़ा हो. अभियोजन पक्ष बाकी अभियुक्तों के आरोप साबित कर पाने में असफल रहा. फ़ैसला सुनाए जाने के बाद मुफ़्ती अब्दुल क़वी ने बताया कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा था और उम्मीद थी कि फ़ैसले में न्याय और ईमानदारी क़ायम रहेगी. क़वी ने कहा कि उन्हें अपने बेग़ुनाह साबित होने की पूरी उम्मीद थी क्योंकि एफ़आईआर में उनका नाम तक नहीं था. अपने बेबाक अंदाज़ के लिए पहचानी जाने वालीं पाकिस्तानी सोशल मीडिया सेलिब्रिटी क़ंदील बलोच की जुलाई 2016 में हत्या कर दी गई थी. 15 जुलाई 2016 को ख़बर मिली कि क़ंदील बलोच की उनके सगे भाई ने हत्या कर दी है. देर रात गिरफ़्तारी के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके भाई वसीम ने हत्या की बात कबूल की थी. उनका कहना था कि क़ंदील के कारण उनके परिवार की बेइज़्ज़ती हो रही थी. हालांकि बाद में उन्होंने अपना बयान बदल लिया था. पुलिस जांच में पता चला था कि उनका गला घोंट दिया गया था. क़ंदील के भाई ने कहा कि सोशल मीडिया पर कंदील के जो वीडियो आते थे, उन्हें लेकर लोग ताने देते थे और वे ताने उनसे सहन नहीं हुए. कौन थीं क़ंदील बलोच? क़ंदील बलोच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत मुल्तान ज़िले में जन्मी एक ग़रीब परिवार की लड़की थीं. उनका असली नाम फ़ौज़िया था लेकिन उन्होंने क़ंदील बलोच के नाम से प्रसिद्धि पाई. उन्हें पाकिस्तान की किम कर्दाशियां भी कहा जाता था. अपने बेबाक और बोल्ड अंदाज़ के कारण उन्होंने पाकिस्तानी सोशल मीडिया में ख़ूब सनसनी मचाई. उनके वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से उनके लाखों प्रशंसक बने और बहुत से लोगल उनसे नफ़रत भी करने लगे. बहुत से लोगों ने उन पर इस्लाम के अपमान का आरोप लगाया और उनके बहिष्कार की मांग करने लगे. क़ंदील ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें जान से मारे जाने की धमकियां मिल रही थीं. उन्होंने कहा था, मुझे धमकियां मिलती हैं लेकिन मेरा मानना है कि मौत का वक़्त निश्चित है और जब आपकी मौत का समय आता है तो आपको मरना ही होगा. क़ंदील की हत्या से पहले उनका नाम पाकिस्तान में खोजे जाने वाले टॉप-10 लोगों में शामिल था. मुफ़्ती के साथ वीडियो से निशाने पर आईं क़ंदील बलोच कट्टरपंथियों के निशाने पर उस वक़्त आईं जब एक टीवी कार्यक्रम में वो मुफ़्ती अब्दुल क़वी के साथ शामिल हुईं. टीवी पर दोनों ने एक-दूसरे से खुले तौर पर फ़्लर्ट किया था. इसके कुछ वक़्त बाद वो मुफ़्ती से मिलने पहुंची थी और दोनों ने एक-दूसरे के साथ सेल्फ़ी ली थी. बातचीत के दौरान क़ंदील ने मुफ़्ती की टोपी भी पहन ली थी जिसे कई लोगों ने इस्लाम और मुफ़्ती के अपमान के तौर पर लिया था. क़ंदील की हत्या के बाद उनके भाई ने कहा था कि वो अपने परिवार के लिए शर्मिंदगी की वजह बन रही थीं और इसीलिए उन्होंने उनकी हत्या कर दी. क़ंदील बलोच की हत्या के बाद पाकिस्तान में ऑनर किलिंग से जुड़े क़ानून में बदलाव की मांग ने ज़ोर पकड़ी थी. क़ंदील बलोच के माता-पिता ने अदालत से उनके बेटों को माफ़ करने की गुज़ारिश की थी जिसे अदालत ने ठुकरा दिया था. क़ंदील की हत्या से पहले पाकिस्तानी क़ानून के मुताबिक़ ऑनर किलिंग के मामलों में लड़की के माता-पिता उसके हत्यारों को माफ़ कर सकते थे लेकिन बाद में सरकार को ये क़ानून बदलना पड़ा था. पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि वहां झूठी शान के नाम पर सैकड़ों महिलाओं की हत्या कर दी जाती है और ऐसे बहुत से मामले सामने तक नहीं आते.
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यूगांडा के पार्लियामेंट का डॉ. चरणदास महंत ने निरीक्षण किया ।

Date : 27-Sep-2019
कंपाला(युगांडा) 27 सितम्बर । यूगांडा के पार्लियामेंट हाउस पहुँच कर डॉ. चरणदास महंत ने पूरे परिसर का भ्रमण किया । पार्लियामेंट हाउस में उन्होंने पाकिस्तान के सांसद चौधरी महमूद बशीर विर्क के साथ बहुत ही सौहार्दपूर्ण भेंट की ।परिसर अवलोकन के दौरान डॉ. महंत के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा सचिव श्री गांराडे भी थे । डॉ. चरणदास महंत ने इम्फाल के अन्य पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण किया । इस अवसर पर उनके साथ कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, पुत्र सूरज महंत के अलावा अन्य परिचित भी थे ।
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इंडोनेशिया में शादी से पहले सेक्स विधेयक पर हिंसक प्रदर्शन  

Date : 25-Sep-2019
  जकार्ता 25 सितम्बर । इंडोनेशिया में शादी से पहले सेक्स पर पाबंदी को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं. विवादित विधेयक को लेकर इंडोनेशिया के कई शहरों समेत दूसरे हिस्सों में प्रदर्शन हुए. पुलिस ने इंडोनेशिया संसद के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर आंसू गैस के गोले और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. प्रस्तावित इंडोनेशियाई बिल में ज़्यादातर मामलों में गर्भपात और राष्ट्रपति के अपमान को ग़ैरक़ानूनी माना गया है. विरोध प्रदर्शनों के बीच यह विवादित विधेयक फ़िलहाल पास नहीं हुआ है लेकिन प्रदर्शनकारियों को चिंता है कि आख़िरकार इसे संसद के रास्ते पास करा दिया जाएगा. विवादित बिल में क्या है? प्रस्तावित बिल में एक नया क्रिमिनल कोड है, जो कुछ इस तरह है: -शादी से पहले सेक्स को दंडनीय अपराध माना गया है और इसके लिए एक साल ज़ेल की सज़ा हो सकती है. -शादी से पहले साथ रहने, लिव-इन रिश्ते में रहने को भी अपराध माना गया है और इसके लिए छह महीने तक की जेल हो सकती है. -राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, धर्म, सरकारी संस्थाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रगान का अपमान करना ग़ैरक़ानूनी है. -गर्भपात दंडनीय अपराध है. बलात्कार और मेडिकल इमर्जेंसी के मामलों के अलावा बाकी स्थितियों में गर्भपात कराने पर चार साल के लिए जेल की सज़ा हो सकती है. पहले इस विधेयक पर मंगलवार को मतदान होना था लेकिन राष्ट्रपति जोको विडोडो ने इसे शुक्रवार तक के लिए टाल दिया. विडोडो ने कहा कि विधेयक पर और विचार किए जाने की ज़रूरत है. लोग विरोध क्यों कर रहे हैं? भले ही राष्ट्रपति ने ये कह दिया हो कि विधेयक पर और ज़्यादा विचार किए जाने की ज़रूरत है, इंडोनेशिया के लोगों को ये चिंता सता रही है कि विधेयक को आख़िरकार किसी न किसी तरह संसद के दरवाजे से पारित करा ही दिया जाएगा. लोगों में इस बात को लेकर ग़ुस्सा है कि नए विधेयक में भ्रष्टाचार उन्मूलन आयोग को कमज़ोर कर दिया गया है. भ्रष्टाचार उन्मूलन आयोग इंडोनेशिया में भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई करने वाली प्रमुख संस्था है. विरोध प्रदर्शनों में क्या हुआ? इंडोनेशिया के अलग-अलग हिस्सों में हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकाला. युवा छात्रों ने भी इन प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शऩ हिंसक हो गए. राजधानी जकार्ता में प्रदर्शनकारियों ने संसद के सामने प्रदर्शन किया और संसद के स्पीकर बमबांग सोसैतियो से मिलने की मांग की. यहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और पुलिस ने जवाब में उन पर आंसू गैस के गोले और पानी की बौंछारें फेंके. प्रदर्शन के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तख्ती लिए नज़र आई और तख्ती पर लिखा था, "मेरी टांगों के बीच की जगह सरकार की नहीं है." वेस्ट जावा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले फ़ुआद वाहियुदीन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हम भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी को लेकर बनाए गए नए क़ानून का विरोध कर रहे हैं.' बताया जा रहा है कि राजधानी जकार्ता में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए 5,000 से ज़्यादा सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं.
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